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जेसिका हत्‍याकांड: मनु की उम्रकैद की सजा बरकरार

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा के पुत्र मनु शर्मा को 1999 के जेसिका लाल हत्याकांड में दोषी करार दिये जाने और उम्रकैद की सजा को उच्चतम न्यायालय ने आज बरकरार रखा.

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प्रज्ञा बाजपेयी नई दिल्‍ली, 19 April 2010
जेसिका हत्‍याकांड: मनु की उम्रकैद की सजा बरकरार

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा के पुत्र मनु शर्मा को 1999 के जेसिका लाल हत्याकांड में दोषी करार दिये जाने और उम्रकैद की सजा को उच्चतम न्यायालय ने आज बरकरार रखा.

न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार और न्यायमूर्ति पी सदाशिवम की एक पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा, ‘‘अभियोजन पक्ष ने अपराध के समय मनु शर्मा की उपस्थिति को साबित कर दिया है. इस पर संदेह नहीं किया जा सकता.’’ शीर्ष न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के विवादास्पद नेता डीपी यादव के बेटे विकास यादव और एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में अधिकारी अमरजीत गिल की दोषसिद्धि और उन्हें सुनाई गई चार वर्ष की जेल की सजा को भी बरकरार रखा. उन्हें साक्ष्य नष्ट करने का दोषी करार दिया गया था.

पीठ ने कहा, ‘‘दिल्ली उच्च न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा बरी किये जाने के फैसले को पलटने के लिए पर्याप्त और अकाट्य तर्क दिये थे.’’ फैसला सुनाते वक्त पीठ ने कहा, ‘‘अभियुक्त की उपस्थिति को अभियोजन पक्ष ने चश्मदीद गवाहों के साक्ष्य से साबित किया है.’’

पीठ ने कहा कि अपराध के बाद मनु शर्मा का जो आचरण था उससे अपराध साबित होता है और इस पर संदेह नहीं किया जा सकता. अपराध को अंजाम देने में मनु शर्मा द्वारा उपयोग में लाई गई टाटा सफारी को नोएडा से बरामद कर अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य साबित कर दिया था.

पीठ ने ढाई सौ पन्नों के आदेश में कहा ‘‘उसके दोष के बारे में इसे एक संकेत के रूप में लिया जा सकता है क्योंकि आरोपी ने अपने वाहन के चोरी जाने की प्राथमिकी तक दर्ज नहीं कराई थी.’’ शीर्ष न्यायालय ने कहा कि उच्च न्यायालय ने सही तरीके से दोष सिद्ध किया है और यादव तथा गिल को साक्ष्य नष्ट करने के लिए चार वषरें की जेल की सजा दी है.

अभियोजन पक्ष पर निचली अदालत द्वारा की गयी प्रतिकूल टिप्पणियों को न्यायालय ने काट दिया. पीठ ने निचली अदालत द्वारा आरोपियों को बरी किये जाने के फैसले को उच्च न्यायालय द्वारा रद्द किये जाने को भी सही ठहराया.

पीठ ने कहा, ‘‘अपराध में कथित तौर पर अभियुक्त द्वारा प्रयुक्त पिस्तौल का बरामद न होना और उसका टालमटोल का रवैया अपराध के कोण की ओर संकेत करता है.’’

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