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झारखंड में त्रिशंकु नतीजों के बाद जोड़तोड़ शुरू

झारखंड विधानसभा के घोषित परिणामों में बीजेपी पर बाबूलाल मरांडी के अलग होने का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखा. पूर्व मुख्यमंत्री मरांडी की पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर 25 सीटों पर जीत हासिल की.

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aajtak.in
पूजा बजाज रांची, 23 December 2009
झारखंड में त्रिशंकु नतीजों के बाद जोड़तोड़ शुरू

झारखंड विधानसभा के घोषित परिणामों में बीजेपी पर बाबूलाल मरांडी के अलग होने का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखा. पूर्व मुख्यमंत्री मरांडी की पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर 25 सीटों पर जीत हासिल की.

त्रिशंकु विधानसभा में 18 सीटें जीतने वाले शिबू सोरेन के झामुमो के हाथ में सरकार के गठन की कुंजी है. ‘गुरुजी’ के नाम से लोकप्रिय शिबू सोरेन भावी सरकार के निर्माण में ‘किंगमेकर’ की भूमिका में हैं. उनकी पार्टी ने तो यहां तक घोषणा कर दी है कि जो भी पार्टी या गठबंधन ‘गुरूजी’ को मुख्यमंत्री बनायेगी वह उसका समर्थन करेगी. राज्य में सरकार बनाने के लिए 41 सीटों की जरूरत है.

इन चुनावों में भ्रष्टाचार का मुद्दा छाये रहने के बावजूद कई दागी फिर से विधानसभा में पहुंच गये हैं और राज्य में इनकी पूछ बढे तो ताज्जुब नहीं. राज्य में मुख्यमंत्री पद के प्रमुख उम्मीदवारों में से किसी ने भी इस बार अपनी किस्मत नहीं आजमाई थी. अर्जुन मुंडा, शिबू सोरेन, बाबूलाल मरांडी और मधु कोड़ा में से कोई भी पूर्व मुख्यमंत्री चुनावी अखाड़े में नहीं था. वहीं मुख्य दावेदार माने जाने वाले सुबोध कांत सहाय, यशवंत सिन्हा, भी चुनाव में नहीं खड़े थे.

भाजपा और झारखंड मुक्ति मोर्चा दोनों 18- 18 सीटों के साथ सबसे बडी पार्टी बनी हैं. भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे कई पूर्व मंत्री इस बार चुनाव जीत गये हैं. बंधु तिर्की, हरिनारायण राय, चंद्रप्रकाश चौधरी जैसे पूर्व मंत्री चुनाव जीत गये हैं, लेकिन सरकार बनाने के लिये 81 सदस्यीय विधानसभा में आवश्यक 41 के जादुई आंकडे को कोई भी नहीं छू पाया है. ऐसे में सरकार गठन के लिये विचार विमर्श और बैठकों का दौर शुरू हो गया है.

कुल 18 सीटों के साथ शिबू सोरेन के नेतृत्व वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास सत्ता की चाभी आ गयी है और उसने साफ कर दिया है कि जो गुरूजी’ को मुख्यमंत्री बनायेगा वह उसी को समर्थन देगी. पार्टी ने यह भी साफ कर दिया है कि उसके लिये कोई भी दल अछूत नहीं है.

कांग्रेस ने इन चुनावों में अपनी स्थिति मजबूत करते हुए 14 सीटें हासिल की हैं. गत चुनावों में उसे 9 सीटें मिली थीं. उसकी सहयोगी झारखंड विकास मोर्चा को 11 सीटें मिली हैं. पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भाजपा से अलग होकर वर्ष 2006 में यह पार्टी बनायी थी. वर्ष 2005 में हुआ पिछला चुनाव उन्होंने भाजपा टिकट पर ही जीता था.

इस तरह कांग्रेस गठबंधन को कुल 25 सीटें मिली हैं, जबकि बहुमत के लिये उसे अभी 16 और सीटों की जरूरत है, जो झामुमो से पूरी हो सकती है. पार्टी ने झामुमो और राजद दोनों को अपना नैसर्गिक सहयोगी बताया है और भाजपा को छोड कर किसी भी दल से सहयोग लेने पर रजामंदी जतायी है.

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