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26/11 मामला: पाकिस्‍तान में आरोपियों पर चार्जशीट दायर

पिछले साल 26 नवंबर को मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों के मामले में पाकिस्‍तान में 7 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी गई है. दायर चार्जशीट से कई अहम खुलासे भी हुए हैं.

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aajtak.in
अंकुर कुमार लाहौर, 28 November 2009
26/11 मामला: पाकिस्‍तान में आरोपियों पर चार्जशीट दायर

अजमल कसाब और मुंबई पर पिछले वर्ष हमला करने वाले 9 अन्य आतंकवादियों ने इस दौरान पाकिस्तान में लश्कर ए तैयबा के शीर्ष कमांडरों के साथ संपर्क बनाए हुए थे और उन्हें ‘‘भारत के राजनीतिक नेताओं, विदेशियों और प्रमुख हस्तियों को मौत के घाट उतारने की हिदायत दी गई थी.’’

पाकिस्तान में मुंबई हमले के 7 संदिग्धों के खिलाफ दाखिल किए गए आरोपपत्र में यह बात कही गई है. हिरासत में रखे गए इन लोगों में हमलों का मास्टरमाइंड जकिउर रहमान लखवी भी है, जो लश्करे तैयबा के अभियानों का प्रमुख है. इनके अलावा इनमें आतंकी संगठन का संचार विशेषज्ञ जरार शाह भी है. लखवी और शाह उर्फ अब्दुल वाजिद के अलावा रावलपिंडी स्थित आतंक विरोधी अदालत ने हमाद अमीन सादिक, अबु अल कामा उर्फ मजहर इकबाल, शाहिद जमील रियाज, जमील अहमद और युनस अंजुम के खिलाफ औपचारिक तौर पर आरोपपत्र पेश किया गया है. इनपर 26 नवंबर 2008 के हमलों की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में मदद करने का आरोप है.

आरोप पत्र में कहा गया है कि जरार शाह और अबु अल कामा मुंबई हमले के दौरान इंटरनेट टेलीफोनी, सेटेलाइट फोन और सेल फोन के जरिए लगातार हमलावरों के संपर्क में बने हुए थे और उन्हें भारत के ज्यादा से ज्यादा राजनीतिक नेताओं, विदेशियों और प्रमुख लोगों की जान लेने की हिदायत दे रहे थे. मुंबई हमलों के दौरान एकमात्र जीवित बचे गिरफ्तार आतंकवादी कसाब को इस समय मुंबई में उच्च सुरक्षा वाली आर्थर रोड जेल में रखा गया है.

आरोप पत्र में कहा गया है कि सातों संदिग्धों पर आतंकवाद निरोधक कानून के तहत ‘अन्तरराष्ट्रीय हत्या’ करने और पाकिस्तान दंड संहिता के अंतर्गत हत्या का प्रयास करने का आरोप लगाया गया है. आरोपियों पर मुंबई में विभिन्न स्थानों पर 166 लोगों की हत्या और 304 अन्य के घायल होने की घटनाओं में शामिल होने का आरोप है क्योंकि इन्होंने हमलों को अंजाम देने वाले 10 आतंकवादियों के लिए प्रशिक्षण, धन, हथियार, विस्फोटक, ग्रेनेड, मोबाइल फोन और जीपीएस सिस्टम का इंतजाम किया था. इन लोगों पर हमले की आपराधिक साजिश रचने का भी आरोप है.

आरोप पत्र में कहा गया है, ‘‘सभी सातों अभियुक्तों ने 20 भगोड़े आरोपियों के साथ मिलकर 10 आतंकवादियों को कराची में प्रशिक्षण, साजोसामान, धन और छिपने की जगह मुहैया कराई और उसके बाद उन्हें भारत में घातक हमले करने के लिए मुंबई भेज दिया.’’ इसमें कहा गया है कि पहले पांच आरोपी लखवी, शाह, सादिक अबु अल कामा और रियाज लश्करे तैयबा के सक्रिय सदस्य हैं, जबकि जमील अहमद और युनस अंजुम ने हमलों की तैयारी के लिए मुजफ्फराबाद, कराची और गुजरांवाला में बैंकों के जरिए 39 लाख 84 हजार रूपए मुहैया कराए.

पहले पांच आरोपियों का जिक्र करते हुए आरोप पत्र में कहा गया है, ‘‘एक दूसरे की सक्रिय भागीदारी से उन्होंने लखवी के संचालन में कराची में युसफ गोठ और मीरपुर सकरू टत्था, सिंध में प्रशिक्षण शिविर स्थापित किए.’’ आरोप पत्र में कहा गया है कि पांचों अभियुक्तों ने कसाब और मुंबई पर हमले के दौरान मारे गए 9 अन्य आतंकवादियों को आतंकवादी घटना को अंजाम देने के लिए आग्नेयास्त्रों, विस्फोटकों और अन्य हथियारों के इस्तेमाल और वहां तक पहुंचने के रास्तों के बारे में प्रशिक्षण दिया.

आरोप पत्र में लखवी को 26 नवंबर 2008 के हमलों का मास्टरमाइंड बताया गया है क्योंकि उसे सबसे पहले प्रशिक्षण और हिदायतें मिलीं और उसने इनका इस्तेमाल करते हुए कसाब और अन्य को आग्नेयास्त्रों, विस्फोटकों, बम और ग्रेनेड के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया. आरोप पत्र में कहा गया है कि पांच भगोड़े उसामा जिया, मुख्तार अहमद, मोहम्मद अब्बास नासिर, जावेद इकबाल और गुफयान जफर हमलावरों और उनके आकाओं को धन के हस्तांतरण में शामिल थे.

आरोप पत्र के अनुसार जमील अहमद पर सउदी अरब में जेद्दाह से अपने नाम पर तुराया सेटेलाइट फोन जिसका सिम न. 881655526412 था, हासिल करने और उसे कसाब और अन्य हमलावरों के हवाले करने का आरोप है. एक अन्य अभियुक्त युनस अंजुम जेयूडी की मुलतान इकाई के प्रमुख हैं. भारत इस बात से नाराज है कि आतंकी हमलों के संदिग्धों के खिलाफ मामलों की रफ्तार बहुत धीमी है और पाकिस्तान उनके खिलाफ जान बूझकर कार्रवाई करने में देर लगा रहा है. मुंबई हमलों की पहली बरसी से एक दिन पहले आतंकवाद विरोधी अदालत में जिन सात अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है, दोषी पाए जाने पर उन्हें मौत की सजा दी जा सकती है.

आतंकवाद निरोधक कानून और पाकिस्तान दंड संहिता के प्रावधानों के तहत उन्हें मौत की सजा और अन्य सजाएं दी जा सकती हैं. बुधवार को उनपर दोषारोपण के दौरान सभी अभियुक्तों से पूछा गया कि क्या उन्होंने आरोपों को सुना और समझ लिया है तो उन्होंने जवाब दिया, ‘‘हां.’’ यह पूछे जाने पर कि क्या वह अपना जुर्म कुबूल करते हैं, उनका साझा जवाब था, ‘‘मैं दोषी नहीं हूं. आरोप पत्र में मेरे खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं उनमें से कोई भी गवाहों के बयान और मुझे दिए गए अन्य दस्तावेज से मेल नहीं खाता.’’

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