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दाउद मांगा तो परेशान हो गए थे मुशर्रफ: आडवाणी

भाजपा के वरिष्‍ठ नेता लालकृष्‍ण आडवाणी ने कहा है कि पाकिस्‍तान के तत्‍कालिन राष्‍ट्रपति परवेज मुशर्रफ उस वक्‍त बेहद परेशान हो गए, जब उनसे माफिया सरगाना दाउद इब्राहिम को भारत के हवाले करने को कहा गया.

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aajtak.in
आईएएनएस नई दिल्‍ली, 04 October 2008
दाउद मांगा तो परेशान हो गए थे मुशर्रफ: आडवाणी

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्‍ठ नेता लालकृष्‍ण आडवाणी ने कहा है कि में 2001 में आगरा शिखर वार्ता के दौरान पाकिस्‍तान के तत्‍कालिन राष्‍ट्रपति परवेज मुशर्रफ उस वक्‍त बेहद परेशान हो गए, जब उनसे माफिया सरगाना दाउद इब्राहिम को भारत के हवाले करने को कहा गया.

एक सेमिनार को संबोधित करते हुए आडवाणी ने कहा कि शिखर वार्ता के लिए आगरा पहुंचने से पहले मैंने मुशर्रफ से कहा था कि हमने हाल ही में तुर्की के साथ प्रत्‍यर्पण संधि की है. हम चाहते हैं कि भारत और पाकिस्‍तान को भी इसके बारे में सोचना चाहिए. आडवाणी ने कहा कि इसके बाद मैंने फिर कहा कि भले ही दोनों देशों के बीच प्रत्‍यर्पण संधि न हो लेकनि पाकिस्‍तान को चाहिए कि वह दाउद को भारत के सुपुर्द कर दे, क्‍योंकि 1993 में मुंबई बम धमाकों के आरोप उस पर साबित हो चुके हैं. इसके बाद ही मुशर्रफ परेशान हो गए.

आगरा शिखर वार्ता की असफलता के कारणों का खुलासा करते हुए आडवाण्‍ी ने कहा कि जब मुशर्रफ ने यह राग अलापना चालू कर दिया कि भारत में आतंकवाद नहीं है तो हमने साफ मना कर दिया कि दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हो सकता है. भारत का यह रुख एकदम सही था और इससे साबित भी होता है कि आतंकवाद पर भारत सरकार गंभीर थी.

आडवाणी ने कहा कि पाकिस्‍तान की कोशिश सदैव भारत को अस्थिर करने की रही है. उसे पता है कि वह भारत के खिलाफ युद्ध नहीं कर सकता, इसलिए उसने आतंकवाद को बढ़ावा देना प्रारंभ किया. उन्‍होंने कहा कि देश में लगातार हो रही आतंकवादी घटताओं में कुछ लोगों की संलिप्‍तता के लिए किसी धर्म विशेष को निशाना बनाया जाना बिल्‍कुल गलत है.

आडवाणी ने कहा कि भले ही आतंकवादी संगठन अपनी धमकियों भरे ईमेल में कुरान के उद्धरण देते हों, लेकिन इसके चलते इस्‍लाम को और निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए. आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए पोटा जैसे सख्‍त कानून की पार्टी की मांग का जिक्र करते हुए आडवाणी ने कहा कि पोटा का गलत उपयोग न हो, इस संबंध में सावधानी बरतने बाबत सर्वोच्‍च न्‍यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों को हमने स्‍वीकार किया है. इससे स्‍पट होता है कि भाजपा कठोर कानून बनाने के लिए कितनी दृढ़ है.

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