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'विफल नहीं, बल्कि ‘जबर्दस्त सफलता’ रहा चंद्रयान'

निर्धारित समय से एक साल पहले हाल ही में खत्म किये गये चंद्रयान-1 के बारे में भारत के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को नासा के अंतरिक्ष यात्री एडवर्ड माइकल फिंके की कही बात से कुछ राहत मिली है जिन्होंने कहा कि भारत का पहला मानव रहित चंद्र अभियान विफल नहीं था, बल्कि एक ‘जबर्दस्त सफलता’ रहा.

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भाषागुवाहाटी, 11 September 2009
'विफल नहीं, बल्कि ‘जबर्दस्त सफलता’ रहा चंद्रयान'

निर्धारित समय से एक साल पहले हाल ही में खत्म किये गये चंद्रयान-1 के बारे में भारत के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को नासा के अंतरिक्ष यात्री एडवर्ड माइकल फिंके की कही बात से कुछ राहत मिली है जिन्होंने कहा कि भारत का पहला मानव रहित चंद्र अभियान विफल नहीं था, बल्कि एक ‘जबर्दस्त सफलता’ रहा.

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र में दो अभियानों के सदस्य रह चुके फिंके ने कहा, ‘‘इस तरह की कई अटकलें लगायी गयीं कि अभियान विफल रहा. इसके विपरीत, यह सफल रहा है और इसके 95 फीसदी उद्देश्य हासिल किये जा चुके हैं.’’ नासा की इंजीनियर असम की मूल निवासी रेनिता साइकिया से विवाहित फिंके ने कहा, ‘‘यह आधिकारिक नजरिया नहीं, बल्कि बतौर एक अंतरिक्ष यात्री मेरा अपना दृष्टिकोण है.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का चंद्रमा की कक्षा में उपग्रह भेजना और चांद की सतह पर भारतीय ध्वज का जाना एक चकित कर देने वाला तथ्य है.’’ वर्तमान में पूर्वोत्तर के 11 दिवसीय दौरे पर आये नासा के इस अंतरिक्ष यात्री ने स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों तथा स्थानीय आईआईटी के करीब पांच हजार विद्यार्थियों और प्रोफेसरों से बातचीत की.

फिंके ने कहा कि आपसी मदद के मामले में इसरो और नासा का मजबूत इतिहास रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘मुझे आशा है कि हमारी सरकारें एक साथ काम करना जारी रखेंगी.’’ फिंके ने कहा, ‘‘इसरो में कर्मचारियों का एक काफी प्रतिभावान दल है और मुझे उम्मीद है कि अंतरिक्ष के क्षेत्र में सहयोग आगे बढ़ेगा क्योंकि नासा का मकसद हर देश में अंतरिक्ष कार्यक्रम को बढ़ावा देना है.’’

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