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लालकृष्‍ण आडवाणी चुने गए लोकसभा में विपक्ष के नेता

बीजेपी ने लालकृष्‍ण आडवाणी को लोकसभा में विपक्ष का नेता चुन लिया है. पार्टी की संसदीय दल की बैठक में यह फैसला किया गया.मंत्रियों की सूची । चुनाव परिणाम । शख्सियत । विश्‍लेषण । चुनाव पर विस्‍तृत कवरेज

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भाषानई दिल्‍ली, 31 May 2009
लालकृष्‍ण आडवाणी चुने गए लोकसभा में विपक्ष के नेता

पंद्रहवीं लोकसभा का पहला सत्र शुरू होने की पूर्व संध्या पर बीजेपी संसदीय दल ने लालकृष्ण आडवाणी को अपना नेता चुन लिया.

संसद सौध में हुई इस बैठक में आडवाणी को यह अधिकार भी दिया गया कि वे ही राज्यसभा में विपक्ष के नेता और उपनेता तथा लोकसभा के उपनेता को चुनें. साथ ही पार्टी की संसदीय कार्यकारिणी समिति का भी वही गठन करेंगे.

संसदीय दल का नेता चुने जाने पर आभार प्रकट करते हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार रहे आडवाणी ने स्वीकार किया, ''मैं इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि हमने वास्तविकता में चुनाव में उससे कहीं कम पाया है जितनी हमारी पार्टी की उम्मीदें और हमारे समर्थन का आधार था, लेकिन हम इस जनादेश को पूरी विनम्रता के साथ स्वीकार करते हैं.''

बैठक के बाद पार्टी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने संवाददाताओं को बताया कि आडवाणी बीजेपी संसदीय दल के नेता होने के साथ ही स्वाभाविक रूप से लोकसभा में विपक्ष के नेता भी होंगे. सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि राज्यसभा में विपक्ष के नेता और उपनेता तथा लोकसभा में विपक्ष के उपनेता के नाम अभी तय नहीं किये गये हैं और आडवाणी जैसे ही इस बारे में कोई निर्णय करेंगे इससे अवगत करा दिया जायेगा.

आडवाणी ने सभी पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को भरोसा दिलाया कि बीजेपी नेतृत्व चुनाव में मिली हार का आत्मावलोकन करेगा और हार के किसी भी कारण की अनदेखी नहीं की जायेगी. आडवाणी ने कहा ''हमें इस बात की जांच करनी होगी कि राजस्थान उत्तर प्रदेश दिल्ली हरियाणा उत्तराखंड और उड़ीसा में हमारा प्रदर्शन इतना खराब क्यों रहा. हमें यह भी जानना होगा कि गुजरात मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में हमारी सीटें उम्मीद से इतनी कम क्यों रही.''
 
उन्होंने कहा, ''इसके अलावा यह भी जरूरी है कि आने वाले 5 वर्ष में हम आंध्र प्रदेश तमिलनाड़ु केरल और पश्चिम बंगाल में अपने समर्थन आधार को विस्तार देने की कार्ययोजना तैयार करें.''

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा, ''यह सचाई है कि हम आम चुनाव में लगे इस बड़े झटके और उसके कारणों को कम कर नहीं आंक सकते. लेकिन साथ ही मैं इस बात पर भी जोर देना चाहूंगा कि भाजपा वह पार्टी नहीं है जो चुनावी झटके के बाद आपसी आरोप-प्रत्यारोप और मतभेदों में लिप्त हो जाए.'' उन्होंने कहा कि हम संघर्ष में एक रहे और संघर्ष का नतीजा भले ही कुछ भी रहा हो हम एक रहेंगे. लोकतंत्र का स्वभाव ही यह है कि हार और जीत उसका हिस्सा है.

आडवाणी ने कहा, ''चुनाव नतीजों का एक पहलू यह भी है कि हार की घड़ी में अक्सर हम उसे बहुत बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं लेकिन जिस तरह हार को कम कर नहीं आंकना चाहिये उसी तरह इसे बढ़ा-चढ़ाकर भी पेश नहीं करना चाहिए.'' संसदीय दल की बैठक में आडवाणी ने इस लोकसभा चुनाव के जनादेश को कांग्रेस और संप्रग के पक्ष में स्वीकार करते हुए इसके लिये प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को बधाई दी.

आडवाणी ने साथ ही यह भी कहा कि कांग्रेस नेतृत्व इस सफलता को यह समझने की भूल न करे कि जनादेश उसके 5 साल के प्रदर्शन का अनुमोदन हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा एक रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभायेगा और उम्मीद जतायी कि संप्रग सरकार एक जिम्मेदार सरकार की भूमिका अदा करेगी.
 
आडवाणी ने बीजेपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से निराश नहीं होने की अपील करते हुए विश्वास जताया, ''निश्चित तौर पर हम जनता का विश्वास फिर से जीतेंगे. लेकिन फिलहाल हमारा काम संयम और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए अपना कर्तव्य निभाने का है.''

बीजेपी संसदीय दल के नेता के तौर पर आडवाणी का नाम वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह ने रखा और मुरली मनोहर जोशी तथा सुषमा स्वराज ने इसका समर्थन किया. राज्यसभा की ओर से इसी पद के लिये आडवाणी के नाम का प्रस्ताव एम. वेंकैया नायडू ने रखा जिसका समर्थन अरुण जेटली और शांता कुमार ने किया. इसके बाद आडवाणी को सर्वसम्मति से पार्टी के संसदीय दल का नेता चुना गया.

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