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इंसानों पर चूहों की तरह दवाईयों की जांच

आजतक ब्‍यूरोनई दिल्‍ली, 20 June 2011

जरा सोचिए, एक इंसान, जिसे बना बताए. चूहे, बंदर या कुत्ते की तरह इस्तेमाल किया जाए और फिर उसकी जिंदगी को जहन्नुम से भी बदतर बना के छोड़ दिया जाए. ये हकीकत है हमारे ही देश की. आज हम आपके सामने एक एसे सच से पर्दा उठा रहे हैं जिसमें करोड़ों के वारे न्यारे होते है लेकिन इनसानी जान की कीमत दो कौड़ी  की भी नही होती. ये सच है,  देश में दिनों दिन बढ़ते नई दवाओं के गैरकानूनी ट्रायल की. ये खबर आपके भी रोंगटे खड़े कर देगी.

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