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वारदात: बाबा का कुर्बानी ब्रिगेड

शम्स ताहिर खान [Edited by: दिनेश अग्रहरि]नई दिल्ली, 31 August 2017

25 अगस्त को बाबा राम रहीम को डेरा से निकाल कर पंचकुला अदालत तक ले जाना कोई आसान काम नहीं था. मगर पुलिस ने भी ऐसी चाल चली कि बाबा फंस गए. दरअसल बाबा को फैसले से कुछ दिन पहले से ही लगातार ये यकीन दिलाया जा रहा था कि अदालत से वो बरी हो जाएंगे और फिर भक्तों के साथ जश्न मनाएंगे.  मगर फंचकुला पहुंचते-पहुंचते जब बाबा के काफिले की सिर्फ दो ही गाड़ी बची, तब बाबा की हवा खराब होनी शुरू हो गई, क्योंकि तब तक बाबा की प्राइवेट आर्मी को तितर-बितर किया जा चुका था. राम रहीम पर आए फ़ैसले के बाद पंचकूला में भड़की हिंसा यूं ही नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक बेहद सोची समझी साजिश थी, जिसे राम रहीम के इशारे पर बाबा के ही कथित भक्तों ने अंजाम दिया था. जी हां, उन भक्तों ने जिन्हें शायद बाबा ने ऐसे ही किसी मौके के लिए तैयार भी किया था. और जो अब तक राम रहीम के इशारे पर तमाम ग़ैरकानूनी हरकतों को अंजाम दिया करते थे. राम रहीम ने बना रखी थी अपनी प्राइवेट आर्मी. गुंडों के गैंग की तरह काम करती थी प्राइवेट आर्मी. इस प्राइवेट आर्मी में शामिल थे 30 हज़ार से ज़्यादा लोग. देखिए वारदात...    



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