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वारदात: GB रोड के कोठों से पोलिंग बूथ तक की कहानी

aajtak.in [Edited by: रविकांत सिंह]नई दिल्ली, 10 April 2019

संसद में महिलाओं की सुरक्षा और आरक्षण से लेकर नारी सशक्तीकरण तक की बातें तमाम पार्टियों के नेता करते हैं, लेकिन हर चुनाव के बाद नेता अपना वादा भूल जाते हैं. इसी बीच महिलाओं का एक तबका ऐसा भी सामने आता है जिनके लिए महिला अधिकार, आरक्षण और सुरक्षा जैसे अल्फाज सब बेमानी हो जाते हैं. हम बात कर रहे हैं उन महिलाओं की, जो दिल्ली की बदमान गलियों में रहकर अपना जिस्म बेचने को मजबूर होती हैं. लेकिन भारतीय संविधान ने इन महिलाओं को भी वोट डालने का अधिकार दिया है. लोकतंत्र के इस पर्व में दिल्ली के कोठों से निकलकर मतदान केंद्रों तक जाने वाली महिलाओं की दास्तान....किसी भी आम आदमी के रौंगटे खड़े कर सकती है.





The leaders of all parties talk about the safety and reservation of women in Parliament and women empowerment, but after every election the leaders forget their promise. In the meantime, a section of women is also exposed, for whom women rights, reservations and security like issues are all meaningless. We are talking about those women who are forced to sell their respect while living in the lanes of Delhi. But the Indian Constitution has given these women the right to vote.

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