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वारदात: पत्रकार मर्डर केस में राम रहीम दोषी करार

शम्स ताहिर खान [Edited By: अमित रायकवार]नई दिल्ली, 12 January 2019

वो साल था 2002. गुरमीत राम रहीम बाबागीरी की दुनिया में अपने पूरे शबाब पर था. अरबों का साम्राज्य था. करोड़ो भक्त थे. नेता, बाबा के आगे पीछे घूमा करते थे. तभी 30 मई 2002 को पंजाब के पंचकुला से निकलने वाले सांध्य दैनिक अखबार 'पूरा सच' में एक खबर छपी.  खबर यह थी कि सिरसा के डेरा सच्चा सौदा में 'धर्म के नाम पर किए जा रहे हैं साध्वियों के जीवन बर्बाद'. जी हां... यही हेडलाइन थी उस दिन उस अखबार की.  इधऱ खबर छपी.  उधर इस खबर को छापने वाले पत्रकार रामचंद्र छत्रपति का जीना दूभर हो गया.  फिर तमाम धमकियों के बाद दो बाइक सवारों ने पत्रकार रामचंद्र के सीने में 5 गोलियां उतारकर उन्हें राम रहीम की करतूतों को पर्दाफाश करने की आखिरकार सज़ा दे दी.  उन्हीं पत्रकार रामचंद्र के कत्ल के लिए आज 16 साल और 3 महीने बाद अदालत ने राम रहीम और उसके तीन गुर्गों को दोषी करार दिया है.

Holding him guilty of conspiracy to murder, a special CBI court in Panchkula town of Haryana on Friday convicted Dera Sacha Sauda sect chief Gurmeet Ram Rahim Singh for the murder of journalist Ram Chander Chhatrapati. Three others, who were close aides of the sect chief, were also convicted by the court. The quantum of punishment will be pronounced on January 17. Chhatrapati, who edited a newspaper in Sirsa, was shot at five times on October 24, 2002 in Sirsa town in Haryana. He died on November 21 in a hospital in New Delhi after battling for life.

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