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वंदे मातरम्: कुमाऊं-नागा रेजिमेंट के 'हेड हंटर्स' की शौर्य गाथाएं

श्वेता सिंह [Edited By: जावेद अख़्तर]नई दिल्ली, 28 October 2018

वंदे मातरम में आज शौर्य की उन गाथाओं के बारे में जानिए, जो कुमाऊं रेजिमेंट से जुड़ी हैं. 1813 में जिस रेजिमेंट की नींव रखी गई, उसे आजादी के बाद कुमाऊं रेजिमेंट कहा गया. कुमाऊं रेजिमेंट में अभी 19 बटालियन हैं और 1970 के बाद से इसे कुमाऊं एंड नागा रेजिमेंट के नाम से जाना जाता है.
कुमाऊं-नागा रेजीमेंट का गौरवशाली इतिहास स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है. देश को पहला परमवीर चक्र दिलाने एवं तीन थल सेनाध्यक्ष देने सहित तमाम उपलब्धियां रेजीमेंट के नाम हैं. चीन पर भारत के इकलौते आक्रमण का श्रेय भी कुमाऊं रेजिमेंट को ही जाता है.

The Kumaon Regiment is one of the most decorated infantry regiments of the Indian Army. The regiment traces its origins to the 18th century and has fought in every major campaign of the Army, including the two world wars. On November 1, 1970 Naga regiment was raised at Ranikhet as a single battalion regiment and was affiliated to the Kumaon regiment.

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