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संजय सिन्हा की कहानी: रिश्तों की भाषा

तेज ब्यूरो[Edited by: राहुल झारिया]नई दिल्ली, 10 February 2019

संजय सिन्हा आज आपको जो कहानी सुनाने जा रहे हैं, उसमें रिश्तों की भाषा छिपी हुई है. कुछ लोग उनके अपने, रिश्तेदार या करीबी के अलावा किसी जानवर यहां तक की मच्छर की भी भाषा समझते हैं. जो इस भाषा को समझते हैं वे ही कुछ करते हैं. जो कुछ नहीं करना चाहते वे मां-पिता, भाई-बहन या गुरू-शिष्य किसी की भाषा नहीं समझते. संजय सिन्हा की ये कहानी सुनकर आप भी इस बात को मान जाएंगे.

Some people understand the language of their own family members, relatives or close people. Apart from this some of also understand the language of animals even mosquitoes. Those who understand this language only do something. Those who do not want to do anything, they do not understand the language of their parents, siblings or teachers. You will also agree with this after listening story.

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