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संजय सिन्हा की कहानी: मेरा पराभव...

तेज ब्यूरो [Edited By: हर्षि‍ता पाण्डेय]नई दिल्ली, 10 May 2019

कभी-कभी आदमी अपने ही पेशे को कोसने लगता है. कभी-कभी आदमी ये सोचने पर मजबूर हो जाता है कि उसने पूरी ज़िंदगी जिस काम को किया, क्या उसके साथ उसने न्याय किया? आज संजय सिंहा भी हमें एक ऐसी ही कहानी सुनाएंगे जिसकी वजह से वे यह सोचने को मजबूर हो गए कि ये कौन सी पत्रकारिता है जो वह कर रहे हैं? क्या इसीलिए पत्रकार बनने आए थे? जानें क्या है वो कहानी जिसने संजय सिन्हा को ऐसा सोचने पर मजबूर कर दिया? 

Today in this episode of Sanjay Sinha ki Kahani, Sanjay Sinha will share an experience from his life, which made him question his presence in the field of journalism. The story which Sanjay Sinha is going to share with us today, forced him to think whether he is performing his duty of journalism well? To know, what the story is, Watch video.

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