एडवांस्ड सर्च

Advertisement

इंसाफ दिलाने तक 'मुझे' भूल न जाना...

आजतक ब्‍यूरोनई दिल्‍ली, 17 January 2013

13 दिनों तक अपने ज़ख्मी जिस्म में फंसी मैं इतना थक गई थी कि जब आज़ाद हुई, तो बता नहीं सकती कि कितना सुकून मिला. उन सारे डॉक्टर्स का, नर्सों का, अटेंडेट्स का मैं कैसे शुक्रिया अदा करूं, मेरी समझ में नहीं आ रहा है. इंसाफ दिलाने तक मुझे भूलेंगे तो नहीं आप...सुनिए 'उस' काली रात की कहानी 'मेरी' जुबानी...

Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay