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खबरदार: सामाजिक न्याय में 'सामान्य न्याय' का विश्लेषण

श्वेता सिंह [Edited By: अमित रायकवार]नई दिल्ली, 10 January 2019

पहली बार आर्थिक आधार पर आरक्षण को लेकर संविधान संशोधन का जो ऐतिहासिक कदम. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उठाया है. वो लोकसभा के टेस्ट में पास होने के बाद इस वक्त राज्यसभा की परीक्षा से गुज़र रहा है. ख़बरदार में हम इसी ऐतिहासिक पल का विश्लेषण करेंगे. क्योंकि पहली बार देश में ये संवैधानिक तौर पर माना जा रहा है कि एक जाति गरीब की भी होती है और जिसे भी उन्हीं जातियों और वर्ग के तौर पर देखना चाहिए. जिनके सामाजिक न्याय के लिए आरक्षण का प्रावधान संविधान में किया गया है. ये नए ज़माने का सामाजिक न्याय है. जिसमें पहली बार आरक्षण के आधार को अमीरी और गरीबी के खांचे में देखा जा रहा है. राज्यसभा में 10 परसेंट जनरल कोटा के लिए संविधान संशोधन बिल पर क्या फैसला होगा. ये कुछ ही देर में पता चल जाएगा. लेकिन उससे पहले आज राज्यसभा में 12 बजे से जिस तरह से इस बिल को लेकर बहस चल रही है. वो बहुत ही दिलचस्प रही है. इसमें तो कोई संदेह नहीं कि विपक्ष अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कदम की वजह से एक तरह से हैरान है. क्योंकि इसमें विपक्ष इस मजबूरी में फंसा दिख रहा है कि वो इस बिल का विरोध नहीं कर सकता. इसलिए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने किस तरह से इसे पीएम मोदी का सिक्सर बताया और किस तरह से कहा कि आगे ऐसे सिक्सर और लगने वाले हैं और किस तरह से कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल ने शायरी के ज़रिए सिक्सर वाले डायलॉग का जवाब दिया. सबसे पहले हम यही दिलचस्प हिस्सा आपको दिखाते हैं.

The historic step of constitutional amendment for the reservation on the basis of economy, by PM Modi, has passed the test in the Lok Sabha. Now, the bill is undergoing the examination in Rajya Sabha. Today in Khabardar we will be analyzing this historic step taken by the PM. The decision over the bill will be out in open, in some time. Watch Khabardar to see how events unfolded in the Rajya Sabha over the reservation bill.

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