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सिनेमा का पॉलिटिकल ड्रामा: द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर और ठाकरे पर विवाद

सईद अंसारी [Edited by: विशाल कसौधन]नई दिल्ली, 06 January 2019

सिनेमा का अपना ड्रामा होता है और पॉलीटिक्स का अलग. फिल्मों के लिहाज से इसे कहानी में दिलचस्पी बढ़ाने वाला फैक्टर भी कहते हैं. मगर राजनीति में आए दिन हमें देखने को मिलता है, कभी सभा में, कभी संसद में, तो कभी आपके हमारे सामने दिखने वाले दृश्य के पर्दे के पीछे. मगर तब क्या होता है जब पॉलीटिक्स का यह ड्रामा सिनेमा के पर्दे पर साकार होता है. इसे समझिए जनवरी में रिलीज हो रही दो फिल्मों के हवाले से

The cinema has its own drama and politic have different drama. In terms of movies, it is also called the factor to increase interest in the story. But we get to see in politics, sometimes in the meetings, sometimes in the Parliament, and then behind the curtain of the scenes that appear in front of us. But what happens when the play of Politics is realized on the screen of the cinema. Understand this by two films released in January.

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