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रक्तचरित्र: खून के बिना नामुमकिन बंगाल की राजनीति?

aajtak.in [Edited by- ईशा मालवी]नई दिल्ली, 15 May 2019

एक बार फिर से ये साबित हो गया है कि बंगाल में राजनीति रक्त चरित्र से निर्धारित होती है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह रोड शो करने कोलकाता पहुंचे थे. लेकिन बंगाल का रक्त चरित्र उनका इंतजार कर रहा था. न तो वो जैसे चाहते थे वैसे रोड शो शुरू हो पाया और न ही जैसे चाहते थे वैसे खत्म हो पाया. रोड शो के दौरान टीएमसी (TMC) और बीजेपी (BJP) कार्यकर्ता एक दूसरे के आमने-सामने आ गए और इसके बाद जो हुआ उसकी चपेट में केवल दोनों दलों के कार्यकर्ता ही नहीं आए, पत्रकार भी आए. बेकसूर नागरिक भी आए. पुलिसवाले भी आए. बंगाल की राजनीति में एक बात बहुत ठोस तरीके से स्थापित हो चुकी है. हिंसा के बिना यहां राजनीति नहीं हो सकती. एक जमाने में ये कांग्रेस (Congress) ने किया. फिर वाम दलों ने किया, वही रक्त चरित्र ममता बनर्जी की टीएमसी (TMC) के रक्त में समा चुका है. और अब बीजेपी के लोग भी जवाबी हिंसा के गेरुआ रंग में रंग चुके हैं. तो क्या सच में बंगाल में सत्ता की लड़ाई खून मांगती है?

Once again, it has been proved that the politics in West Bengal is incomplete without violence. Today, BJP President Amit Shah was addressing a roadshow in Kolkata. During his roadshow TMC and BJP supporters broke violence on the streets of Kolkata. Not only the party members but journalists were also affected by the clash of the TMC and BJP supporters. Violence and West Bengal goes hand in hand when it comes to elections.

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