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दंगल: मसूद का इलाज UN नहीं भारत की स्ट्राइक है?

रोहित सरदाना [Edited By: अमित रायकवार]नई दिल्ली, 14 March 2019

संयुक्त राष्ट्र में वही हुआ जिसकी आशंका थी. जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को चीन ने फिर बचा लिया.  UNSC के 15 देशों में 13 देश मसूद पर बैन लगाने के प्रस्ताव के स्पॉन्सर थे लेकिन चीन की ओर से डेडलाइन बीतने के महज एक घंटे पहले टेक्निकल होल्ड लगा दिया गया. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि मसूद अजहर पर लगे आरोपों को परखने के लिए उसे और वक्त चाहिए. ये वो चीन है जो मसूद अजहर पर 2009, 2016 और 2017 में संयुक्त राष्ट्र के बैन के प्रस्तावों को रोकता आया है. चीन के इस रवैये के बाद भारत में गुस्सा है. आवाजें उठने लगी हैं कि हमें चीन के साथ अपने रिश्तों पर नए सिरे से सोचने की जरूरत है क्योंकि चीन, अपने फायदे के लिए आतंक पर समझौता करने को तैयार है.

Once again, China saved Jaish e Mohammed chief Masood Azhar in United Nations while 13 out of 15 countries were sponsoring the proposal to put ban on Masood. This time China put technical hold just one hour before the deadline. China foreign ministry spokesman said that they need more time to investigate allegations against Masood Azhar. Earlier too, China has stopped the proposal of UN to put ban on the Masood Azhar in 2009, 2016 and 2017. There is anger in India because of China latest move in UN. Indians are demanding that we need to rethink about reshaping our relations with China because China is ready to compromise on terror for its own benefit.

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