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मैं भाग्य हूं: निस्वार्थ भाव से करें प्रेम

मैं भाग्य हूं: निस्वार्थ भाव से करें प्रेम
aajtak.inनई दिल्ली, 06 November 2019

जहां प्रेम होता है वहां स्वार्थ नहीं होता है. सच्चा प्यार और सच्ची भक्ति निस्वार्थ भावना से की जाती है. प्यार हो महसूस किया जाता है. प्यार को नापा और तोला नहीं जाता है. प्यार का कोई मोल नहीं होता, प्यार तो अनमोल होता है.  मैं भाग्य हूं... और मैं आज आपको सच्चे प्रेम की परिभाषा बताऊंगा... यह भी बताऊंगा जीवन में प्रेम का क्या महत्व है. इंसान को कैसे ईश्वर की कृपा मिलती है.

Main Bhagya Hoon brings to you stories that helps you in becoming a better version of yourself. In this episode e will tell you a story about love. Know about truth love and its importance. Also, know what stars have in store for you.

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