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मैं भाग्या हूं: इच्छाओं के जाल में न उलझें

aajtak.in [Edited By: अजीत तिवारी]नई दिल्ली, 28 August 2018

मनुष्य की कई प्रकार की इच्छाएं होती हैं. कुछ पूरी हो जाती हैं तो कुछ अधूरी रह जाती हैं. इच्छाओं के जाल में जो उलझ जाता है उसे नुकसान का सामना करना पड़ता है. लेकिन अच्छे कर्मों का परिणाम भले ही देर से मिले, अच्छा ही मिलता है. इसलिए इच्छाओं के जाल में न उलझें.
There are many types of desires of man. many of them is complete and many remains incomplete. The person who gets entangled in the desires of the world has to face the loss. But the result of good deeds, even if it is late, only gets good. So do not engage for desires.

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