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कोई और होता तो टूट जाता, 70 साल की इस महिला ने जीती डेथ रेस

aajtak.in
08 October 2019
कोई और होता तो टूट जाता, 70 साल की इस महिला ने जीती डेथ रेस
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बोलिविया देश की रहने वाली मिर्था मुनोज नाम की 70 साल की महिला किसी नजीर से कम नहीं. जिन घटनाओं में लोग टूट जाते हैं, उस एक घटना से उबरने के लिए इस महिला ने जो किया, वो हम सबको सीखना चाहिए. आईए, जानें- बेटे की मौत के बाद किन हौसलों के साथ मुर्था दोबारा जी उठीं. फिर 70 की उम्र तक आते-आते डेथ रेस जीत ली.
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आपको बता दें कि जब उनकी उम्र 65 साल की थी, तब उनके बेटे की अचानक मौत हो गई. वो बेटे की मौत से बुरी तरह टूट गई थीं, वो धीरे-धीरे डिप्रेशन में जाने लगी थीं. हालत इतनी ज्यादा बिगड़ गई कि उन्हें मनोवैज्ञानिक के पास जाना पड़ा. वहां से उन्हें प्रेरणा मिली और कुछ अलग करने की बात मन में आई.
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तभी उनके पड़ोस के परिवार से उन्हें बाइकिंग का आइडिया मिला, उस परिवार ने उन्हें बाइकिंग सिखाई और मिर्था नये सफर पर निकल पड़ीं. धीरे-धीरे वो अपने असीम दुख से बाहर आने लगी थीं. वो बाइकिंग में रुचि लेने लगीं थीं, धीरे धीरे ये शौक पैशन बनता चला गया.
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अब उनका कॉन्फिडेंस इतना बढ़ गया था कि उन्होंने दक्षिणी अमेरिका और बेालिविया की बाइक रेस में हिस्सा  लेने की ठान ली. ये रेस उन स्थान की थी जिसे डेथ रोड कहा जाता है. इस डेथ रोड पर मिर्था ने बाइकिंग करने के लिए अपने मन में हामी भर दी थी. ये डेथ रोड 11 हजार फीट की ऊंचाई पर बना है.
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जहां डेथ रेस की जाती है वो नॉर्थ यंगास रोड 1930 में बनी थी, तब से यहां हादसों में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. लेकिन, मिरथा मुनोज ने दुनिया की इस सबसे खतरनाक सड़क पर 60 किमी साइकिल चलाकर सबको हैरान कर दिया.
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ये पूरा इलाका जंगल से घिरा, सड़क संकरी और सीधी ढलान में है. कई जगह सड़क के किनारे रेलिंग भी नहीं है. भारी बारिश और बर्फबारी के दौरान यहां भूस्खलन भी होता है. ऐसी खतरनाक स्थिति के कारण इस सड़क को डेथ रोड भी कहा जाता है. यहां बीते करीब 90 साल में इस सड़क में हादसों में हजारों लोग मर चुके हैं.
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एक इंटरव्यू में वो कहती हैं कि साइकिल रेस ने ही उन्हें दर्द सहने और खुद को दोबारा खड़ा करने की हिम्मत दी. ये जुनून आज का नहीं कई साल पुराना है. वो कहती हैं कि इतनी लंबी रेस में हिस्सा लेना ही बड़ी उपलब्धि है. जीतना या हारना उद्देश्य नहीं है. पहली बार महसूस हुआ कि कुछ भी मुश्किल नहीं है.
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छह पोते-पोतियों के साथ साइकिल चलाना पसंद : मिरथा स्काई रेस स्पर्धा की संस्थापक सदस्य भी हैं. उन्हें साइकिल चलाने में सबसे ज्यादा खुशी तब मिलती है, जब उनके 6 पोते-पोतियां साथ होते हैं. उनकी एक पोती 18 साल की हो चुकी हैं. मिरथा को इससे बहुत उम्मीदें हैं. वह कहती हैं कि नई पीढ़ी भी उन्हीं के ट्रैक पर चलना चाहती है.
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