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जानें: क्या आप ही हैं 'मिलेनियल्स', जिन्हें मंदी की वजह मान रही है सरकार

aajtak.in
11 September 2019
जानें: क्या आप ही हैं 'मिलेनियल्स', जिन्हें मंदी की वजह मान रही है सरकार
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मिलेनियल जो पूरी दुनिया में जेनरेशन Y या GenY  के नाम से जाने जाते हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑटो सेक्टर में ब्रेक लगने का एक कारण इस जेनरेशन द्वारा ओला उबर का ज्यादा इस्तेमाल बताया है. आइए जानते हैं कौन हैं ये मिलेनियल्स, क्यों आया इनका जिक्र. कैसे तय होता है मिलेनियल्स का माइंडसेट. सरकार ने इनके माइंडसेट को लेकर क्या प्रतिक्रिया दी है, पढ़िए... 

(फोटो: प्रतीकात्मक)
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तो सबसे पहले आप जान लें कि पूरी दुनिया में तय परिभाषा के अनुसार जो लोग 1980 के दशक से लेकर 1990 के दशक के मध्य तक पैदा होते हैं, उन्हें इस कैटेगरी में रख जाता है. इनकी आयु सीमा 1980 से 1996 तक के बीच की मानी जाती है. इस आयु वर्ग के लोगों को भी तमाम सेक्टर (जैसे सोशल और इकोनॉमिक्स) अपने अध्ययन के केंद्र में रखते हैं.
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लेखक विलियम स्ट्रॉस और नील होवे को 1987 में इस शब्द को गढ़ने का श्रेय जाता है. ये उस दौरान हुआ जब 1982 में पैदा हुए बच्चों के लिए ये टर्म इस्तेमाल किया था. उन्होंने अपनी किताबों जनरेशन: द हिस्ट्री ऑफ अमेरिकाज फ्यूचर, 1584 से 2069 (1991) और मिलेनियल्स राइजिंग: द नेक्स्ट ग्रेट जनरेशन (2000) में इसके बारे में लिखा है.
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अगस्त 1993 में इसी को लेकर एक ग्लोबल मीडिया ब्रांड ने अपने विज्ञापन में जनरेशन Y का जिक्र करके इसे मशहूर बना दिया. उस दौरान ये मिलेनियल्स 11 या उससे कम उम्र के थे और साथ ही आने वाले दस वर्षों के किशोर थे, जिन्हें जेनरेशन एक्स से अलग परिभाषित किया गया था. मिलेनियल्स को इको बूमर्स भी कहा जाता है. इकोबूमर्स कहने के पीछे वजह की बात करें तो आंकड़ों के अनुसार पूरी दुनिया में इस दशक में सबसे ज्यादा जन्मदर बढ़ी थी. अगस्त 1990 में, संयुक्त राज्य अमेरिका में जन्म दर चरम पर पहुंच गई थी.
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विशेषज्ञ मानते हैं कि मिलेनियल्स का अपना अलग माइंडसेट हैं. ये एक ऐसी सिविक माइंडेड जेनरेशन मानी जाती है जो समाज के पुरानेपन से हटकर नया सोचने में आगे रहती है. इस जेनरेशन के लोग टैकसेवी और बचत व निवेश का महत्व जानने वाले माने जाते हैं. भारत के परिप्रेक्ष्य में बात करें तो इस जेनरेशन को सबसे ज्यादा स्वीकार्यता के लिए जाना जाता है. समाज में नये बदलावों को स्वीकार करने में ये जेनरेशन काफी आगे होती है. 
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निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को चेन्नई में प्रेस कांफ्रेंस में कहा था  ऑटो सेक्टर ऑटो-मोबाइल इंडस्ट्री BS6 स्टैंडर्ड और मिलेनियल्स के माइंड सेट से सबसे ज्यादा प्रभावित है. सीतारमण की मानें तो मिलेनियल्स आजकल गाड़ी खरीदने की जगह ओला-उबर को तवज्जो दे रहे हैं.इस तरह से वित्त मंत्री ने ऑटो सेक्टर की गिरावट के लिए इनके माइंडसेट में बदलाव और बीएस-6 मॉडल को जिम्मेदार ठहराया है. वित्त मंत्री ने कहा कि ऑटोमोबाइल सेक्टर की हालत के लिए जिम्मेदार फैक्टरों में BS-6 मूवमेंट, रजिस्ट्रेशन fees से संबंधित मामले और लोगों का mindset शामिल है.
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निर्मला सीतारमण ने कहा कि आजकल लोग गाड़ी खरीदकर EMI भरने से ज्यादा Ola uber से चलना पसंद करते हैं. हालांकि उन्होंने माना कि ऑटो सेक्टर बुरे दौर से गुजर रहा है और इसका जल्द हल निकलना चाहिए.

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