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क्या है अनुच्छेद 371, जिसे न छेड़ने का वादा कर रहे हैं अमित शाह

aajtak.in
09 September 2019
क्या है अनुच्छेद 371, जिसे न छेड़ने का वादा कर रहे हैं अमित शाह
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जिस तरह से अनुच्छेद 370 ने जम्मू और कश्मीर को विशेष अधिकार दिए थे, जिसे खत्म कर दिया गया है ठीक उसी तरह अनुच्छेद 371 भी अन्य राज्यों को कई तरह के विशेष अधिकार देता है. वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अध्यक्ष और गृह मंत्री अमित शाह ने अनुच्छेद 371 से भविष्य में किसी तरह का छेड़छाड़ न करने का भरोसा दिया है. आइए जानते हैं क्या है अनुच्छेद 371 और राज्यों को क्या- क्या अधिकार देता है.
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सबसे पहले आपको बता दें, जम्मू और कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद स्थानीय जनता और राजनीतिक दलों के मन में आशंकाएं थीं कि सरकार किसी दिन पूर्वोत्तर के राज्यों को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 371 को भी हटा सकती है. जिसके बाद गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को पूर्वोत्तर के राज्यों को आश्वस्त करते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 और 371 के बीच काफी फर्क है. गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार अनुच्छेद 371 को कभी नहीं टच करेगी.
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आखिर क्या है अनुच्छेद 371

अनुच्छेद 371 महाराष्ट्र, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में लागू है. इस अनुच्छेद के पास महाराष्ट्र और गुजरात के राज्यपाल के कुछ विशेष अधिकार है. महाराष्ट्र के राज्यपाल विदर्भ और मराठावाड़ा में अलग से विकास बोर्ड बना सकते हैं. इसी तरह गुजरात के राज्यपाल भी सौराष्ट्र और कच्छ में अलग विकास बोर्ड बना सकते हैं. टेक्निकल एजुकेशन, वोकेशनल ट्रेनिंग और रोजगार के लिए भी राज्यपाल 'स्पेशल अरेंजमेंट' कर सकते हैं. अनुच्छेद 371 में 371 A, 371 B, 371 C, 371 D, 371 E, 371 F, 371 G, 371 H, 371 I और 371 J शामिल हैं. इनमें शामिल सभी राज्यों के लिए कुछ विशेष प्रावधान दिए गए हैं. आइए विस्तार से जानते हैं.
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अनुच्छेद 371

अनुच्छेद 371 के तरह कोई भी व्यक्ति जो हिमाचल प्रदेश से बाहर का वह है राज्य में एग्रीकल्चरल लैंड (खेती के लिए जमीन) नहीं खरीद सकता है. वहीं अगर कोई व्यक्ति हिमाचल प्रदेश का निवासी है और किसान नहीं है तब भी वह खेती के लिए जमीन नहीं खरीद सकता है.
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अनुच्छेद 371 A आपकों बता दें, आर्टिकल 371 A नगालैंड में लागू है. इसके तहत नगालैंड राज्य को 1949 और 1963 में तीन विशेष अधिकार दिए गए हैं.

1. पहला:- भारतीय संसद का कोई भी कानून नगालैंड लोगों के सांस्कृतिक और धार्मिक मामलों में लागू नहीं होगा.

2. दूसरा:- नगा लोगों के प्रथागत कानूनों और परंपराओं को लेकर संसद का कानून और सुप्रीम कोर्ट का कोई आदेश लागू नहीं होगा.

3. तीसरा:- नगालैंड में जमीन और संसाधन किसी गैर नगा को स्थानान्तरित नहीं किया जा सकेगा. आपको बता दें, नगालैंड का नागरिक ही अपने राज्य की जमीन खरीद सकता है, देश का किसी और राज्य का नागरिक नगालैंड में जमीन नहीं खरीद सकता है.
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अनुच्छेद 371 B

यह अनुच्छेद असम के लिए लागू है. इसके तहत भारत के राष्ट्रपति राज्य विधानसभा की समितियों के गठन और कार्यों के लिए राज्य के जनजातीय क्षेत्रों से चुने गए सदस्यों को शामिल कर सकते हैं.
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अनुच्छेद 371 C

यह अनुच्छेद मणिपुर के लिए लागू है. यहां राष्ट्रपति चाहे तो राज्य के राज्यपाल को विशेष जिम्मेदारी देकर चुने गए प्रतिनिधियों की कमेटी बनवा सकते हैं. ये कमेटी राज्य के विकास संबंधी कार्यों की निगरानी करेगी.
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अनुच्छेद 371 D

अनुच्छेद 371 D आंध्र प्रदेश और तेलंगना में लागू है. इन राज्यों के लिए राष्ट्रपति के पास ये अधिकार होता है वह राज्य सरकार को आदेश दे कि किस जॉब में किस वर्ग के लोगों को नौकरी दी जा सकती है. इसी तरह एजुकेशन सेक्टर में भी राज्य के लोगों को बराबर की हिस्सेदारी या आरक्षण मिलता है. 
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अनुच्छेद 371 E

अनुच्छेद 371 E के तहत केंद्र सरकार संसद में कानून बनाकर आंध्र प्रदेश में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना करेगी. ये अनुच्छेद समय के साथ अप्रसांगिक हो गया है.
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अनुच्छेद 371 F


अनुच्छेद 371 F सिक्किम में लागू है. इसके तहत सिक्किम के पास पूरे राज्य की जमीन का अधिकार है. चाहे वह जमीन भारत में विलय से पहले किसी की निजी जमीन ही क्यों न हो. यहां किसी भी तरह की जमीन विवाद में देश के सुप्रीम कोर्ट या संसद को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है.  हालांकि जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति जमीन मामले में दखल दे सकते हैं.



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अनुच्छेद 371 G


अनुच्छेद 371 G मिजोरम में लागू है. इस अनुच्छेद के तहत मिजोरम में जमीन का मालिकान हक सिर्फ वहां बसने वाले आदिवासियों का है. कोई बाहर का आदमी मिजोरम में जाकर जमीन नहीं खरीद सकता है. हालांकि वहां प्राइवेट सेक्टर की इंडस्ट्री खोलने के लिए राज्य सरकार 'मिजोरम एक्ट 2016' के तहत भूमि अधिग्रहण कर सकती है.

अनुच्छेद 371 I गोवा राज्य के लिए बनाया गया कानून था. हालांकि ये भी समय के साथ अप्रसांगिक हो गया है. वहीं अनुच्छेद 371 J हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र के छह पिछड़े जिलों को विशेष दर्जा देता है. 
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अनुच्छेद 371 H

अनुच्छेद 371 H अरुणाचल प्रदेश में लागू है. राज्यपाल के पास कानून और व्यवस्था की स्थिति पर विशेष अधिकार है और इसके आधार पर मुख्यमंत्री के फैसले को रद्द किया जा सकता है. इस तरह का अधिकार किसी राज्य के पास नहीं है जो मुख्यमंत्री के फैसले को रद्द कर सके.



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क्या है 'इनर लाइन परमिट'

मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड. तीन राज्य ऐसे हैं, अगर आप वहां पर जाना चाहते हैं तो आपको इनर लाइन परमिट लेना होगा. बिना इनर लाइन परमिट के आप इन तीनों राज्यों में प्रवेश नहीं ले सकते हैं.


बता दें, इनर लाइन परमिट भारत सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज है जो एक निश्चित समय के लिए यात्रा की अनुमति देता है.  भारत में भारतीय नागरिकों के लिए बने इनर लाइन परमिट के इस नियम को ब्रिटिश सरकार ने बनाया था. वहीं भारत की आजादी के बाद समय-समय पर फेरबदल कर इसे जारी रखा गया है.




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क्या है अनुच्छेद 370 और  371 में फर्क


जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद  370 को 5 अगस्त 2019 को हटा दिया गया. संसद में जब 370 पर बहस के दौरान छह अगस्त को अनुच्छेद 371 का भी मुद्दा उठा तो बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कई तर्क गिनाए थे कि क्यों सरकार इस अनुच्छेद को नहीं हटाना चाहती. अमित शाह ने एक तर्क दिया था कि 370 की तरह अनुच्छेद 371 राज्यों में अलगाववाद को बढ़ावा नहीं देता है. इसलिए इसे नहीं हटाया जाएगा.




(सभी तस्वीरें: amitshah.army, instagram से ली गई है.)




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