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कभी बेचते थे चाय, इस टीचर के पढ़ाए सभी 14 छात्र NEET में पास

aajtak.in [Edited by: मानसी मिश्रा ]
11 June 2019
कभी बेचते थे चाय, इस टीचर के पढ़ाए सभी 14 छात्र NEET में पास
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जिंदगी, ये उस कोचिंग का नाम है जिसने चायवाला रहे अजयवीर की जिंदगी बदल डाली है. अजयवीर ओडिशा में निम्न आय वर्ग के बच्चों को NEET की फ्री कोचिंग देते हैं. हैरान करने वाली बात ये है कि इस साल उनके सभी 14 स्टूडेंट्स ने नीट 2019 की परीक्षा पास की है. 46 साल के अजयवीर एक शिक्षक के तौर पर बच्चों को एक ही गुरुमंत्र देते हैं, आइए जानते हैं उनके पूरे सफर को.
(फोटो: फेसबुक से )
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देश में डॉक्टर बनने का सपना कौन नहीं देखता. लेकिन नीट (राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा) पास करना सबके वश की बात  नहीं है. फिर भला ऐसा क्या हुआ कि सभी 14 स्टूडेंट नीट पास कर गए. इन युवाओं के जज्बे और अजयवीर की कहानी का बड़ा रिश्ता है. इन बच्चों को पढ़ाने वाले अजयवीर को एक गुरु के तौर इन बच्चों की सफलता का श्रेय जाता है. बता दें कि अजय कभी खुद डॉक्टर बनना चाहते थे. लेकिन विपरीत परिस्थितियों के चलते वो अपना सपना पूरा नहीं कर पाए. अब वो इन्हीं बच्चों में अपना सपना जी रहे हैं.
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अपने सपने को जीने के लिए उन्होंने 2017 से जिंदगी फाउंडेशन की नींव डाली जहां वो जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं. ये कोचिंग बिहार के जाने माने आनंद कुमार की सुपर 30 कोचिंग की तर्ज पर बनी है. जहां ऐसे बच्चों केा पढ़ाया जाता है जो प्रतिभाशाली तो हैं लेकिन संसाधनों की कमी से महंगी महंगी कोचिंग में पढ़ नहीं पाते.अजयवीर सिंह ने एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया था कि उन्होंने 2018 में ज़िंदगी की शुरुआत की थी. इसमें 18 बच्चों को पढ़ाना शुरू किया था जिसमें से 12 को  ओडिशा के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में सीट मिल गई थी.
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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अजयवीर के पिता एक इंजीनियर थे और वो अपने बेटे को डॉक्टर बनाने के इच्छुक थे. लेकिन कभी ऐसी स्थिति आ गई कि अजय सिंह के पिता को एक गुर्दे के प्रत्यारोपण की जरूरत आ गई. इन कठिन हालातों ने परिवार को अपनी संपत्ति बेचने के लिए मजबूर कर दिया, जिससे वे आर्थिक रूप से मजबूर हो गए. अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए उन्हें चाय तक बेचनी पड़ी लेकिन इसी दौरान उन्होंने समाजशास्त्र ऑनर्स से स्नातक की पढ़ाई भी की.
(प्रतीकात्मक फोटो)
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उन्होंने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा कि मैं हमेशा से एक डॉक्टर बनना चाहता था. इसके लिए तैयारी भी कर रहा था. लेकिन मेरी पढ़ाई मेरे पिता की किडनी फेल होने के कारण बाधित हो गई. तब मैंने चाय और शरबत बेचकर अपना काम शुरू किया. इंटरमीडिएट की शिक्षा पूरी करने के बाद, मैं सोडा बनाने की मशीन बेचता था. मैंने अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए बच्चों को ट्यूशन भी दिया.
(सीएम नवीन पटनायक के साथ स्टूडेंट्स, फोटो फेसबुक से )
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उन्होंने बताया कि अपने घर पर वित्तीय संकट पर काबू पाने के बाद मैंने तय किया कि अब मैं जरूरतमंद छात्रों को उनका सपना पूरा करने में मदद करूंगा. वह कहते हैं कि अब मैं अच्छी स्थिति में हूं, तो मुझे लगता है कि मुझे ऐसे असहाय छात्रों को ढूंढना चाहिए जो कोचिंग की मोटी फीस अदा नहीं कर सकते. मैंने ऐसे ही स्टूडेंट को आवास, भोजन, अध्ययन और चिकित्सा के साथ उनके कंपटीशन एग्जाम का खर्च हमारे द्वारा वहन किया जाता है.


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उन्होंने इस साल 14 छात्रों को पढ़ाया और उन सभी ने NEET परीक्षा पास की. उनकी कोचिंग जिंदगी से पास होने वाले 14 में से छात्र कृष्णा मोहंती भी एक हैं. वह कहते हैं कि कृष्णा की मां मां भुवनेश्वर के इस्कॉन मंदिर में स्थानीय केक बेचती हैं. कृष्णा ने एएनआई को बताया कि मेरे पिता राजमिस्त्री थे, जबकि मेरी मां एक गृहणी थीं. जब मेरे पिता का निधन हुआ, तब मैं छठी कक्षा में था. मेरी मां ने कठिन परिस्थ‍ितियों से मुझे पढ़ाया, फिर मैं राज सर से बात करके यहां आया. इस साल NEET परीक्षा 2019 में मेरे 573 अंक हासिल किए हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो)
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जिंदगी के 14 छात्रों में से जिंदगी से 2018 में कटक के नरसिंहपुर के रहने वाले अनिरुद्ध नायक ने 5662 ऑल इंडिया रैंक (AIR) के साथ वहां की सर्वोच्च रैंक हासिल की थी. इनके अलावा अबनीकांत स्वैन (8582), सेलेंदु राउत (9196), साईं गौरव महापात्र (10558), सुधांशु प्रियदर्शनी (14831), कृष्णा मोहंती (15295), ओम सिंह (16501), अमिया रंजन दास (25361), रतुपर्णा (35265), जया प्रकाश पांडा (36900), मानस रंजन मिश्रा (47571), राकेश कुमार राउत (63502), हप्पन पट्टनायक (65010) और नम्रता पांडा (72778) ने परीक्षा उत्तीर्ण की.

(प्रतीकात्मक फोटो)
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ओडिशा में 30,000 से अधिक स्टूडेंट ने NEET परीक्षा उत्तीर्ण की है, लेकिन इन 14 छात्रों की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं, लेकिन धन की कमी के कारण उसे पूरा नहीं कर पाते. अजय जैसे शिक्षक अपने जज्बे से उनके सपने सच कर देते हैं. अजय कहते हैं कि इन बच्चों को मुफ्त पढ़ाने के बाद मैं बच्चों से बस यही गुरुदक्षिणा चाहता हूं कि वे गरीब बच्चों को मुफ्त इलाज दें.

(प्रतीकात्मक फोटो)
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