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स्कूल में नहीं था साइंस का टीचर, फिर भी टॉपर बने ये स्टूडेंट्स

aajtak.in [Edited by: प्रियंका शर्मा ]
16 May 2019
स्कूल में नहीं था साइंस का टीचर, फिर भी टॉपर बने ये स्टूडेंट्स
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जब भी कोई छात्र परीक्षा में पहला स्थान हासिल करते हैं तो जाहिर है उसकी सफलता के पीछे एक टीचर का ही हाथ होता है. वहीं अगर स्कूल में टीचर ही न हो तो जरा सोचकर देखिए उन बच्चों के लिए पढ़ने के साथ परीक्षा में टॉप करना कितना मुश्किल होगा.


(प्रतीकात्मक फोटो)
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इस साल हरियाणा बोर्ड में कक्षा 12वीं की परीक्षा में दीपक कुमार ने पहला स्थान हासिल किया है. उन्होंने बोर्ड में 500 में से 497 मार्क्स हासिल किए हैं. बता दें, दीपक के पिता एक मजदूर हैं और मां हाउसवाइफ.



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दीपक साइंस स्ट्रीम के छात्र हैं उन्होंने हरियाणा के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल से पढ़ाई की है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार दीपक ने जिस स्कूल से कक्षा 12वीं की पढ़ाई की है वहां फिजिक्स और केमेस्ट्री का कोई टीचर नहीं है. जिसका असर उनकी पढ़ाई पर पड़ा.



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दीपक ने बताया कि कक्षा 12वीं में फिजिक्स और केमेस्ट्री के टीचर न होने की वजह से पढ़ाई काफी डिस्टर्ब हुई. वहीं ये विषय काफी मुश्किल हैं ऐसे में सेलेबस को कवर करने के लिए ट्यूशन का सहारा लेना पड़ा. दीपक दिन में 10 घंटे पढ़ाई करते हैं.



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वहीं दूसरी ओर झारखंड बोर्ड में कक्षा 12वीं में राधेश्याम साहा ने परीक्षा में पहला स्थान हासिल किया है. उन्होंने 89.8 प्रतिशत मार्क्स हासिल किए हैं.  


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राधेश्याम ने बताया मैंने जिस स्कूल में पढ़ाई की वहां साइंस का कोई टीचर नहीं था. मेरा परिवारा आर्थिक रूप से ठीक नहीं हैं. इसलिए वह मेरा ट्यूशन का खर्चा नहीं उठा सकते हैं. इन सबके बावजूद मैंने अपनी पढ़ाई जारी रखी.

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उन्होंने कक्षा 12वीं में 500 में से 449 मार्क्स हासिल किए हैं. जहां उनके फिजिक्स में 96, केमेस्ट्री में 91, मैथेमेटिक्स में 98, इकोनॉमिक्स में 89 और इंग्लिश में 75 मार्क्स  हासिल किए है.


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राधेश्याम ने फ्यूचर के बारे में बताते हुए कहा कि वह इंजीनियर नहीं बनना चाहता हैं, लेकिन वह एक टीचर बनना चाहते हैं. क्योंकि गांव में साइंस के टीचर की काफी कमी है. उन्होंने कहा "मैं एक टीचर बनना चाहता हूं ताकि मैं अपने टीचर में शिक्षा दे सकूं,".  बता दें, इस साल  कॉमर्स में 57% और साइंस में 70.44% स्टूडेंट पास हुए हैं.


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