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जानें, मोदी कैबिनेट में क्यों शामिल हैं एबीवीपी से निकले ये 8 बड़े नाम

aajtak.in
09 July 2019
जानें, मोदी कैबिनेट में क्यों शामिल हैं एबीवीपी से निकले ये 8 बड़े नाम
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देश के सबसे बड़े छात्र संगठनों में शुमार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) को नौ जुलाई से 70 साल पूरे हो गए. इन 70 सालों के सफर में एबीवीपी ने देश को राजनाथ सिंह से लेकर अमित शाह, अरुण जेटली जैसे तमाम बड़े नेता दिए हैं. आइए जानें वर्तमान राजनीति में कौन-कौन हैं एबीवीपी संगठन से निकले नेता. क्या है इन्हें कैबिनेट में शामिल करने की वजह.
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ABVP राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय छात्र शाखा है. देश के कॉलेजों में और यहां तक ​​कि विदेशों में 2016 में तीन मिलियन से अधिक सदस्य इसमें पंजीकृत थे.
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद  के राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री श्रीनिवास ने बताया कि साल 2018 में देश भर के कैंपस में 28,36,922 छात्रों ने एबीवीपी की सदस्यता ली है. हम अपनी वैज्ञानिक सोच के साथ राजनीतिक संघर्ष के लिए अलग पहचान रखते हैं. बता दें कि एबीवीपी का गठन वर्ष 1948 में किया गया था जिसका ध्येय ज्ञान, शील, एकता है. एबीवीपी आरएसएस की ही तरह हिंदुत्व आधारित राष्ट्रीयता पर कायम है. देश के कुल 790 परिसरों में 1,60,000 से अधिक सदस्यों के साथ, एबीवीपी दिल्ली विश्वविद्यालय सहित भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों में छात्र चुनाव जीतने में कामयाब रहा है.
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अमित शाह

अमित शाह के राजनीतिक करियर की शुरुआत 1983 में एबीवीपी के नेता के रूप में हुई थी. 1986 में शाह बीजेपी में शामिल हो गए और बीजेपी की युवा शाखा भारतीय जनता युवा मोर्चा के सक्रिय नेता रहे. अमित शाह वर्तमान में केंद्रीय गृह मंत्री हैं.
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रविशंकर प्रसाद

केंद्रीय संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद एबीवीपी के छात्र नेता थे. उन्हें जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन के हिस्से के रूप में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ आंदोलन करने के लिए जेल में डाल दिया गया था. साल 1995 में भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनने से पहले वो एबीवीपी में कई जिम्मेदार पदों पर रहे हैं.
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राजनाथ सिंह

भारत के पूर्व गृह मंत्री और वर्तमान में डिफेंस मिनिस्टर बने राजनाथ सिंह ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 13 साल की उम्र में 1964 में की थी. वो सबसे लंबे समय तक आरएसएस से जुड़े रहे और युवा आरएसएस कैडेट के रूप में प्रमुख पदों पर रहे. फिर 1969 से 1971 तक, उन्होंने एबीवीपी की गोरखपुर इकाई के संगठनात्मक सचिव के रूप में कार्य किया.
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अरुण जेटली

भारत के पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली 1970 के दशक में दिल्ली यूनिवर्सिटी में एबीवीपी के छात्र नेता थे. वह 1974 में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ के अध्यक्ष बने. इसके बाद 1977 में जेटली दिल्ली ABVP के अध्यक्ष बने. बाद में उन्हें ABVP का अखिल भारतीय सचिव नियुक्त किया गया था.
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नितिन गडकरी

सड़क परिवहन, राजमार्ग और शिपिंग मंत्री नितिन गडकरी 1976 में एबीवीपी में शामिल हुए. संगठन के एक सक्रिय सदस्य, गडकरी ने एबीवीपी के 28 वें राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया था. 24 वर्ष की आयु में उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा का अध्यक्ष चुना गया था.
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जेपी नड्डा

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने 1975 में तत्कालीन इंदिरा गांधी के खिलाफ जयप्रकाश नारायण द्वारा शुरू की गई सम्पूर्ण क्रांति (संपूर्ण क्रांति) आंदोलन में हिस्सा लेने के साथ राजनीति में प्रवेश किया. इसके बाद वो एबीवीपी में शामिल हो गए और 1977 में पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के सचिव बने और छात्र चुनाव जीते.
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प्रकाश जावड़ेकर

मिनिस्टर ऑफ एन्वारमेंट,फॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज प्रकाश जावड़ेकर अपने कॉलेज के दिनों में एबीवीपी के सक्रिय सदस्य थे. जावड़ेकर ने तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी द्वारा घोषित आपातकाल के दौरान पुणे में सत्याग्रह आंदोलन का नेतृत्व किया और उन्हें कई महीनों तक गिरफ्तार रखा गया.
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धर्मेंद्र प्रधान

मोदी के दूसरे कार्यकाल में  Minister of Petroleum & Natural Gas and Minister of Steel  धर्मेंद्र प्रधान ने भी एबीवीपी के सदस्य के तौर पर राजनीति की पाठशाला में प्रवेश लिया. फिर 1985 में उन्हें तलचर कॉलेज छात्र संघ के अध्यक्ष के रूप में चुना गया था. वह ओडिशा राज्य में छात्रों के आंदोलनों में सक्रिय थे. साल 2004 में एबीवीपी के राष्ट्रीय सचिव और फिर 2006 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव बने थे.
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