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3 दोस्तों की कहानी, जिन्होंने खड़ी की 132 करोड़ की कंपनी

मानसी मिश्रा
13 November 2019
3 दोस्तों की कहानी, जिन्होंने खड़ी की 132 करोड़ की कंपनी
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मोबाइल रिपेयरिंग जैसे काम को हम और आप आज भी अच्छे करियर के तौर पर शायद ही देखते हों. लेकिन, दिल्ली के इन तीन दोस्तों ने मोबाइल रिपेयरिंग का स्टार्टअप शुरू करके पांच साल में 132 करोड़ की कंपनी खड़ी कर दी. महज तीन लोगों की मेहनत से शुरू हुई कंपनी में आज हजारों लोगों को रोजगार मिला है. ये तीन दोस्त हैं यांत्रा (Yaantra) के सह संस्थापक जयंत झा, अंकित सराफ और अनमोल गुप्ता, आइए जानें- किस तरह उनके स्टार्ट अप को मिली सही राह और फोर्ब्स तक पहुंचा नाम.
फोटो: Yaantra Co-founder (L to R)- Ankit Saraf, Co-founder & CFO, Jayant Jha, Co-founder & CEO and Anmol Gupta, Co-founder & CTO
Image Credit: jayant jha/aajtak.in
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कंपनी के सह संस्थापक जयंत झा ने aajtak.in से बताया कि कैसे उनके दिमाग में इस स्टार्टअप का आइडिया आया था. वो बताते हैं कि 2012 में हम तीनों एक कंपनी में कलीग थे. मैंने महसूस किया कि जब फोन या मोबाइल खराब हो तो हमें लोकल मार्केट में जाना होता है, जहां न कीमतों की कोई सीमा होती है और न ही क्या कंपोनेंट यूज हो रहा है, इसका पता होता है. 
फोटो: जयंत झा, सह संस्थापक, यांत्रा
Photo Credit: jayant jha, yaantra.com
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जयंत बताते हैं कि 2012 में एक नामी कंपनी के सर्विस सेंटर में मुझे ये अनुभव हुआ. जहां मुझे कहा गया कि फोन ठीक कराने में टाइम लगेगा. वहां से लोकल में गया तो देखा कि उस कंपनी का फोन सुधारने वाले लोग बहुत कम थे.

फोटो: यांत्रा रिपेयर सेंटर
Photo Credit: jayant jha, yaantra.com
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मुझे बाजार में अच्छे रिसपांसेंस नहीं मिल रहे थे. फोन में बहुत सारा डेटा था जिसके फार्मेट होने का भी डर था. इन सब प्रॉब्लम्स को देखा तो फिर दोस्त की सलाह पर दिल्ली के गफ्फार मार्केट गया. वहां भी अलग अलग रेट बताए जा रहे थे.
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जयंत कहते हैं कि तभी से हमने मार्केट रिसर्च करना शुरू किया तो पता चला कि इस स्टार्टअप में बहुत संभावनाएं हैं. इंडिया इतना बड़ा देश है जहां 900 मिलियन से ज्याद ही फोन है. तभी हमने ये निर्णय लिया कि हम रिपयेर का काम शुरू करें तो ये फायदेमंद होगा. अगर हम घरों में लोगों को ये सुविधा दें तो इससे अच्छा रिसपांस मिलने की संभावना थी.
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बस तभी हमने जॉब छोड़कर ये स्टार्टअप डालने का मन बनाया और शुरुआत कर दी. तब मेरी उम्र 23, अंकित की 24 और अनमोल की 25 साल थी. हमने अपनी सारी जमापूंजी लगाकर कुछ लाख की रकम से स्टार्टअप डाला, जिसके छह महीने बाद ही हमें अच्छा रिसपांस मिला. मेरे दोस्त अंकित और अनमोल भी इसी काम में जुटे थे. प्रॉफिट मिलने पर हमने फंड जुटाया और सपोर्ट मिलने के बाद देश के अलग अलग छह महानगरों (तकरीबन 600 कस्बों) तक हमारी पहुंच हो चुकी है.
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कैसे करते हैं काम
जयंत ने बताया कि हमारी कंपनी एकदम अलग ढंग से काम करती है. जिन ग्राहकों की हमें कॉल आती है, उनके यहां इंजीनियर को भेजा जाता है. वो घर पर ही रिपेयर कर देते हैं. उनके पास पूरा किट होता है, जिससे वो तत्काल फोन की प्रॉब्लम को दूर कर देते हैं. वो कहते हैं कि आज हमारी कंपनी लीडिंग एंश्योरेंस कंपनी के साथ काम कर रही है.
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ईकामर्स प्लेटफॉर्म पर भी हम यूज किए हुए फोन को रीफर्ब करके रीसेल करते हैं. ये कंपनी का नया स्टार्ट है. इसके लिए हमारी फैक्ट्री पहले पुराने फोन की रीमैनुफैक्चरिंग करते हैं. उसके बाद उनकी पैकिंग एक्सेसरीज के साथ करके वाजिब दामों में बेची जाती है.
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वो बताते हैं कि साल 2013 में शुरू किया गया बिजनेस 2018 में 132 करोड़ का हो चुका है. कंपनी में 450 इंजीनियर, 150 लॉजिस्टिक सहित सैकड़ों स्किल्ड कर्मचारी हैं. जब उन्होंने ये शुरुआत की, तो एंड्रॉइड के लिए न्यूनतम डिलीवरी शुल्क 300 रुपये और आईफोन के लिए 1,000 रुपये था. आज, हालांकि ये  पहले से कम यानी 199 रुपये (एंड्रॉइड) और 300 रुपये (आईफोन) के लिए हो गया है.
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साल 2016-17 तक, कंपनी ने सिर्फ रिपेयरिंग और सर्विसिंग पर ध्यान केंद्रित किया. अब कंपनी ने फोन कैश एप लांच के साथ ही नया स्टार्टअप शुरू किया है. ई कॉमर्स प्लेटफार्म के जरिये यांत्रा बेहतर हालत के अच्छे फोन लोगों तक पहुंचा रहा है. जयंत ने बताया कि प्ले स्टोर से फोन कैश ऐप को किसी भी फोन में डाउनलोड किया जा सकता है. इस ऐप के जरिये आप अपने फोन की सही कीमत आंक सकते हैं. अगर आपको वो कीमत वाजिब लगे तो आप अपना फोन सेल कर सकते हैं.
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आज भी दोस्ती कायम

जयंत कहते हैं कि कंपनी की उन्नति के साथ ही हम तीनों दोस्तों (जयंत, अनमोल और अंकित) की दोस्ती भी गहरी हुई है. हम तीनों के संबंध आज भी वैसे ही हैं, जैसे पहले दिन स्टार्ट अप के वक्त थे.
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ऐसे शुरू करें स्टार्टटप

वो कहते हैं कि कोई भी स्टार्टअप शुरू करने से पहले उसकी उपलब्धता आंकना बहुत जरूरी है. इसके लिए हमें मार्केट रिसर्च करना जरूरी होता है. उसके बाद स्टार्ट अप को आगे बढ़ाने के लिए बेहतर ढंग से स्ट्रेटजी भी बहुत जरूरी है. बता दें कि इस साल जयंत को फोर्ब्स मैगजीन ने 30 अंडर 30 रीइन्वेंटिंग द वे वी शॉब कैटेगरी के लिए नामित किया है.
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