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कैसे तैयार होती है बुलेटप्रूफ जैकेट, सेना को ऐसे मिलती है मदद

aajtak.in [Edited by: प्रियंका शर्मा ]
11 June 2019
कैसे तैयार होती है बुलेटप्रूफ जैकेट, सेना को ऐसे मिलती है मदद
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एक सेना तभी मजबूत होती है जब उनके पास दुश्मनों से लड़ने के अलावा खुद की हिफाजत के भी पर्याप्त संसाधन हो. भारत में सेना से लेकर देश के कई महत्वपूर्ण नागरिकों की सुरक्षा में तैनात अधि‍कारी बुलेटप्रूफ जैकेट इस्तेमाल करते हैं.ये बुलेट प्रूफ जैकेट विशेष तकनीक से बनाई जाती है. यहां हम आपको उसी तकनीक के बारे में बता रहे हैं. ये आधुनिक समय में सैनिकों की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण उपकरण बन गया है. आइए जानते हैं ये कैसे तैयार होती है और सेना के लिए कितनी उपयोगी है.


कैसे तैयार होती है बुलेटप्रूफ जैकेट, सेना को ऐसे मिलती है मदद
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ऐसे की जाती है तैयार

बुलेटप्रूफ जैकेट का निर्माण शारीरिक सुरक्षा देने के लिए किया गया था. यह मजबूत और प्रभावी है लेकिन भारी और बोझिल होती है. बुलेटप्रूफ की जैकेट आम कपड़े से तैयार नहीं की जाती है. इसके लिए अलग से कपड़ा तैयार किया जाता है. कपड़े के लिए फाइबर या फिलामेंट का उत्पादन किया जाता है जो कि वजन में हल्का लेकिन मजबूत होता है. जिसके बाद  फाइबर की रसायनों के एक घोल में कताई द्वारा के ठोस धागे की रील तैयार की जाती है, जिसके बाद धागे से चादर की तरह एक बड़ा कपड़ा तैयार किया जाता है. इस तैयार कपड़े का इस्तेमाल जैकेट बनाने में किया जाता है.

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बुलेटप्रूफ जैकेट को तैयार करते समय दो लेयर पर ध्यान दिया जाता है. पहला सेरैमिक लेयर और दूसरा बैलिस्टिक लेयर. जिसे मिलाकर बुलेटप्रूफ जैकेट तैयार की जाती है.
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ऐेसे काम करती है जैकेट

जैसे ही कोई गोली जैकेट की ओर आती है तो वह सबसे पहले सेरैमिक लेयर से टकराती है. सेरैमिक लेयर काफी मजबूत होता है ऐसे में गोली का नुकीला हिस्सा टूट जाता है. जिसका असर खत्म हो जाता है और वह गोली छोटे कणों में बिघर जाती है. फिर बैलिस्टिक लेयर इसके बाद अपना काम शुरू करती है. जैसे गोली से जो उर्जा निकलती है और शरीर पर लगती है उसे बैलिस्टिक लेयर सोख लेती है और एक सेना अधिकारी को कम नुकसान होता है.


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क्या है इतिहास

पहले लड़ाई के दौरान दुश्मनों के हमलों से बचने के लिए चमड़े का इस्तेमाल किया जाता था.  जिसके बाद लकड़ी और धातु से बने कवच भी बनने लगे. फिर  15वीं सदी में बुलेटप्रूफ जैकेट का आइडिया आया. 1538 में, फ्रांसेस्को मारिया डेला रोवर ने बुलेटप्रूफ जैकेट बनाने के लिए फिलिपो नेग्रोली को कमीशन दिया था.



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आपको बता दें. प्रथम विश्व युद्ध के लड़ाकों ने सैनिकों को बॉडी कवच ​​के बिना ही युद्ध शुरू किया था. उस दौरान विभिन्न निजी कंपनियों ने बॉडी प्रॉटेक्शन जो बुलेटप्रूफ जैकेट की तरह ही मदद करता है उसके लिए विज्ञापन दिए थे, लेकिन उस दौरान ये सैनिक के लिए बहुत महंगे थे.


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साल 1940 में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन में मेडिकल रिसर्च काउंसिल ने सेना की रक्षा के लिए हल्के सूट के कवच का उपयोग करने का प्रस्ताव रखा था और अधिक खतरनाक स्थिति में सैनिकों के लिए एक भारी सूट, जैसे कि विमान-रोधी और नौसेना बंदूक दल. फरवरी 1941 तक मैंगनीज स्टील प्लेटों से बने शरीर के कवच पर परीक्षण शुरू हो गए थे.


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भारत में बुलेटप्रूफ जैकेट
दिन-रात देश की रक्षा में मुस्तैद रहने वाले जवानों को अपनी सुरक्षा के लिए एक भी बुलेटप्रूफ जैकेट 2009 से 2014 तक नहीं खरीदी गई थी. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अब तक 2.30 लाख बुलेट प्रूफ जैकेट खरीदीं गई हैं.



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चीनी माल से बन रही भारतीय सेना की बुलेटप्रूफ जैकेट

भारत में बुलेटप्रूफ जैकेट बनाने वाली कंपनिया  कच्चा माल मंगवा सस्ता मिलने के कारण चीन से मंगवा रही है. ऐसे में नीति आयोग ने कहा है कि सामान की गुणवत्ता को लेकर अभी तक कोई शिकायत नहीं आई है. ऐसे में चिंता की कोई बात नहीं है. आपको बता दें, पहले अमेरिका और यूरोप से बुलेटप्रूफ जैकेट बनाने के लिए कच्चा माल मंगवाया जाता था.

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क्या है बुलेटप्रूफ जैकेट की कीमत

सामान्यी तौर पर एक बुलेटप्रूफ जैकेट की कीमत 40,000 रुपए से शुरू होकर 2 लाख रुपये तक होती है. इस जैकेट का वजन 8 किलो ग्राम के आसपास होता है.


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