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फौज बनाकर दी अंग्रेजों को टक्कर, जानें नेताजी के बारे ये बातें

aajtak.in [Edited By: प्रियंका शर्मा]
23 January 2018
फौज बनाकर दी अंग्रेजों को टक्कर, जानें नेताजी के बारे ये बातें
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'तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा' का नारा देने वाले नेताजी सुभाषचंद्र बोस का आज जन्मदिन है. आजाद हिंद फौज के संस्थापक और अंग्रेजों से देश को मुक्त कराने में अपना बहुमुल्य योगदान देने वाले नेताजी का जन्म 23 जनवरी साल 1897 में हुआ था.
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‘सुभाष चंद्र बोस’ भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों में एक वो नाम हैं, जिसने अपने क्रांतिकारी तेवर से ब्रिटिश राज को हिलाकर रख दिया था. लोग उन्हें ‘नेताजी’ कहकर बुलाया करते थे. उन्होंने देश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान दिया था. ‘देशभक्तों के इस देशभक्त’ नें अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे.
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आज उनका 121वां जन्मदिन है. आज भी़ उनकी मौत एक रहस्य बनी हुई है. 18 अगस्त 1945 को वे हवाई जहाज से मंचूरिया जा रहे थे. इस सफर के दौरान ताइहोकू हवाई अड्डे पर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें उनकी मौत हो गई. उनकी मौत भारत के इतिहास का सबसे बड़ा रहस्य है. उनकी रहस्यमयी मौत पर समय-समय पर कई तरह की अटकलें सामने आती रही.
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नेताजी का जन्म उड़ीसा के कटक शहर में हुआ था. कटक में प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने रेवेनशा कॉलिजियेट स्कूल में दाखिला लिया. जिसके बाद उन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की. 1919 में बीए की परीक्षा उन्होंने प्रथम श्रेणी से पास की, यूनिवर्सिटी में उन्हें दूसरा स्थान मिला था.
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20 जुलाई 1921 में सुभाष चंद्र बोस की मुलाकात पहली बार महात्मा गांधी जी हुई. गांधी जी की सलाह पर वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए काम करने लगे. भारत की आजादी के साथ-साथ उनका जुड़ाव सामाजिक कार्यों में भी बना रहा. बंगाल की भयंकर बाढ़ में घिरे लोगों को उन्होंने भोजन, वस्त्र और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का साहसपूर्ण काम किया था. समाज सेवा का काम नियमित रूप से चलता रहे इसके लिए उन्होंने 'युवक-दल' की स्थापना की
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बता दें, अपने सार्वजनिक जीवन में नेताजी को कुल 11 बार कारावास की सजा दी गई थी. सबसे पहले उन्हें 16 जुलाई 1921 को छह महीने का कारावास दिया गया था. 1941 में एक मुकदमे के सिलसिले में उन्हें कोलकाता (कलकत्ता) की अदालत में पेश होना था, तभी वे अपना घर छोड़कर चले गए और जर्मनी पहुंच गए. जर्मनी में उन्होंने हिटलर से मुलाकात की. अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध के लिए उन्होंने आजाद हिन्द फौज का गठन किया और युवाओं को 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा' का नारा भी दिया.
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नेताजी की रहस्यमयी मौत पर भारत सरकार ने RTI के जवाब में ये बात साफ तौर पर कही है कि उनकी मौत एक विमान हादसे में हुई थी. लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खुद जापान सरकार ने इस बात की पुष्टि की थी कि, 18 अगस्त, 1945 को ताइवान में कोई विमान हादसा नहीं हुआ था. इसलिए आज भी नेताजी की मौत का रहस्य खुल नहीं पाया है.
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