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स्‍कूल जाने से पहले बेचते थे अखबार, खंभे के नीचे बैठकर करते थे पढ़ाई

27 July 2017
स्‍कूल जाने से पहले बेचते थे अखबार, खंभे के नीचे बैठकर करते थे पढ़ाई
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खास होकर, आम जिंदगी बिताने वाले देश के 11वें राष्ट्रपति डॉ: ए. पी. जे अब्दुल कलाम पूरे देश के लिए एक आदर्श उदाहरण थे. उनकी कामयाबी के किस्से तो सारी दुनिया में मशहूर हैं. लेकिन इस कामयाबी के पीछे क्या संघर्ष था, ये शायद कम ही लोग जानते हैं. भले ही आज कलाम साहब हमारे बीच नहीं है पर सदियों तक प्रेरणा देने वाले है. जानतें है मिसाइल मैन की जिंदगी के अहम पहलू.
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कलाम का जन्म (रामेश्वरम) तमिलनाडु के छोटे से गांव धनुषकोडी में एक मध्यमवर्ग मुस्लिम परिवार में हुआ. पर कौन जानता था गरीब परिवार में जन्मा एक लड़का विज्ञान की दुनिया में छा जायेगा.
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उनका कहना था कि 'तुम जैसे सपने देखोगे वैसे ही बन जाओगे' कलाम को चीजों की जानने और जिज्ञासा में काफी रुचि थी. अकसर उन्हें उड़ती हुई चिड़ियां काफी आकर्षित करती थी. 5वीं कक्षा में पढ़ने वाले कलाम ने एक दिन टीचर से पूछ ही लिया 'आखिर ये चिड़िया उड़ती कैसे है? बता दें वह टीचर थे सुब्रमण्‍यम अय्यर. जिनका जिक्र कलाम साहब अकसर करते थे.
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कलाम साहब के मुताबिक, जब उन्होंने ये सवाल अपने टीचर से पूछा तो वह पूरी क्लास को समुद्र किनारे ले गए और उड़ती हुई चिड़ियों की उड़ने के तकनीक समझाई.
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नन्हे कलाम को उस दिन अपने सवाल का जवाब ही नहीं मिला बल्कि उड़ान का एक सपना भी मिल गया.
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सबसे ज्यादा मुश्किल ये थी कि वह सपना पूरा कैसै होता. हालात ऐसे थे कि एक पतंग भी बड़ी मुश्किल से उड़ाने को मिलती थी.
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कलाम साहब के पिता जैनुलाब्दीन न तो ज़्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे, ना ही पैसे वाले थे. अपने पिता की मदद के लिए स्कूल जाने से पहले वे अखबार बेचा करते थे.
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शाम को स्कूल से लौटते वक्त कलाम अखबार के पैसों की वसूली के लिए जाते थे. उस दौरान बिजली नहीं होती थी इसलिए वह बिजली के खंभों के नीचे बैठकर पढ़ा करते थे.
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मद्रास इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में स्कॉलरशिप पाने के लिए उन्होंने तीन रात तक जगकर अपनी थीसिस पूरी की थी.
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1962 में वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में आये, जहां उन्होंने सफलतापूर्वक कई उपग्रह प्रक्षेपण परियोजनाओं में अपनी भूमिका निभाई.
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वे इतने साधारण स्वभाव के थे कि जब वह देश के राष्ट्रपति बनकर राष्ट्रपति भवन गए तो उनके हाथ में दो सूटकेस थे. और जब राष्ट्रपति भवन छोड़ा तब वह वही दो सूटकेस के साथ विदा हुए.
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