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JNU के पूर्व छात्र डॉ महमूद को 2 करोड़ रूपये की ग्रांट, करेंगे ये काम

aajtak.in
12 August 2019
JNU के पूर्व छात्र डॉ महमूद को 2 करोड़ रूपये की ग्रांट, करेंगे ये काम
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इस्लाम के बारे में सबसे बड़ा स्टीरियोटाइप यही है कि इस पर मेल डोमिनेटिंग और महिलाओं को दबाने वाला माना जाता है, लेकिन क्या वाकई इस्लाम पितृसत्तात्मक है? ये वो सवाल है जिसका जवाब जेएनयू के पूर्व छात्र डॉ महमूद कूरिया ने अपने प्रोजेक्ट में खोजने की कोशिश की है.
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डॉ महमूद के प्रोजेक्ट ‘Matriarchal Islam: Gendering Sharia in the Indian Ocean World(मातृसत्तात्मक इस्लाम: हिंद महासागर क्षेत्र में शरियत का प्रतिपादन)’ के लिए नीदरलैंड की लीडेन यूनिवर्सिटी ने दो करोड़ रुपये(ढाई लाख यूरो) की ग्रांट दी है. जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय जेएनयू के पूर्व छात्र डॉ महमूद अब इस पर आगे अध्ययन करेंगे.
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यूनिवर्सिटी के एक आधिकारिक बयान के अनुसार डॉ महमूद इस्लामिक ढांचे के भीतर मातृसत्तात्मक व्यवस्था के कथित अंतर्विरोधों को अब कानूनी सुधारों के माध्यम से सुलझाने की कोशिश करेंगे. डॉ महमूद ने लीडेन यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट आफ हिस्ट्री से अपनी पीएचडी की है.
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डॉ महमूद NDTV को बताया कि ये अध्ययन हमें मुस्लिम समुदायों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा. जो भी लोग इस्लाम को लेकर अलग-अलग रुढिवादी सोच रखते हैं. उन्हें दुनिया में बड़े पैमाने पर मौजूद मुस्लिम समुदाय में मौजूद विविधता को समझने का मौका मिलेगा.

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इस स्टडी के लिए वो दुनिया भर के ऐसे विशेषज्ञों की राय लेंगे जो इस क्षेत्र में सक्रिय तौर पर काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि  इस स्टडी से इस्लाम में मातृसत्तात्मक समूहों के बारे में जान सकते हैं कि वो किस तरह लैंगिक समानता को बढ़ रहे थे.
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डॉ महमूद कूरिया ने स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से की. इसके बाद उन्होंने इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एशियन स्टडीज और अफ्रीकन स्टडीज सेंटर लीडेन में ज्वाइंट रिसर्च फेलो के तौर पर काम किया.

सभी फोटो: Facebook से
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