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वकीलों ने इतनी बार की हदें पार, खाकी वर्दी वाले लगाते रहे सुरक्षा की गुहार

aajtak.in
05 November 2019
वकीलों ने इतनी बार की हदें पार, खाकी वर्दी वाले लगाते रहे सुरक्षा की गुहार
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दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट के बाहर वकील और पुलिस कर्मी की झड़प के बाद दोनों पक्षों का विरोध रुकने का नाम नहीं ले रहा है. दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर जवानों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है. सभी काली पट्टी हाथ में बांधकर विरोध कर रहे हैं. आपको बता दें, ये पहली दफा नहीं है जब खाकी वर्दीवालों और वकीलों को बीच झड़प हुई हो. इससे पहले भी दोनों के बीच लड़ाई- झगड़े हुए हैं. आइए जानते हैं इस बारे में-  
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जानें- कैसे शुरू हुआ मामला


जहां पुलिसकर्मी दूसरों की रक्षा करते हैं आज अपनी सुरक्षा की मांग कर रहे हैं. आपको बता दें, 2 नवंबर को तीस हजारी कोर्ट के लॉकअप में जब एक वकील को पुलिस जवानों ने अंदर जाने से रोका था. उसी के बाद कहासुनी बढ़ गई थी और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए थे. जिसके बाद पुलिस और वकील भिड़ गए थे. दोनों के बीच मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी. जिसके बाद वकीलों ने पुलिस जीप समेत कई वाहनों को आग लगा दी थी और तोड़फोड़ की थी.
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मार्च 2015 (इलाहाबाद)
इलाहाबाद में जिला अदालत परिसर के अंदर एक सब-इंस्पेक्टर द्वारा एक वकील की गोली मारकर हत्या कर दी गई और एक अन्य को गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था. जिसके बाद वकीलों ने उग्र प्रदर्शन किया था.
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वकीलों ने प्रशासनिक अधिकारियों पर पथराव किया. घटना के बाद गुस्साए, वकीलों ने इलाहाबाद जिला न्यायालय, उच्च न्यायालय और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय में हिंसा की. गुस्साए वकीलों ने ट्रैफिक को ब्लॉक कर दिया और इलाहाबाद-कानपुर राजमार्ग पर कम से कम चार सरकारी वाहनों को आग लगा दी थी.
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जब अदालत परिसर में पुलिस ने लाठीचार्ज किया तो लगभग 10 वकील घायल हो गए थे. जिसके बाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने घटनास्थल का दौरा किया. फिर उच्च न्यायालय में आंदोलन को शांत कर दिया गया और आश्वासन दिया गया कि वे व्यक्तिगत रूप से जिला अदालत का दौरा करेंगे और स्थिति का जायजा लेंगे.
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मार्च 2013 (चंडीगढ़)

एक पुलिस मामले में अपने सहयोगियों के नाम पर गुस्साए पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के वकील चंडीगढ़ के पंजाब राज भवन के पास पुलिस से भिड़ गए थे.
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वकीलों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को बल और वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा था. जिसके बाद उच्च न्यायालय के वकील ने काम करना बंद कर दिया था. उनकी मांग वरिष्ठ वकील रूपिंदर सिंह समेत 19 अन्य वकीलों के खिलाफ दर्ज की गई FIR को रद्द करने की थी.
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फरवरी 2009 (चेन्नई)

वकीलों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं, जब वकीलों के एक ग्रुप को गिरफ्तार करने की कोशिश की गई थी. क्योंकि उन्होंने जनता पार्टी के प्रमुख सुब्रमण्यम स्वामी पर अंडे फेंके थे. साल 2009 में वह सुब्रमण्यम स्वामी मद्रास उच्च न्यायालय के अंदर एक मामले पर बहस कर रहे थे. जिसके बाद पुलिस और वकीलों के बीच झड़प हुई. अदालत परिसर के अंदर लाठीचार्ज शुरू हो गया था. वहीं वकीलों ने कोर्ट परिसर के अंदर वाहनों में आग लगा दी और पथराव शुरू कर दिया. इस वजह से उनमें से कई घायल हो गए, जिनमें न्यायाधीश भी शामिल थे.
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तत्पश्चात, उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच का आदेश दिया, जिसके आधार पर मद्रास उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष जी मोहनकृष्णन और भारतीय दंड संहिता और तमिलनाडु संपत्ति के विभिन्न प्रावधानों के तहत 10 पुलिस कर्मियों सहित 31 वकीलों के खिलाफ चार्जशीट किए गए (रोकथाम) नुकसान और हानि) अधिनियम, 1992 में 22 पुलिस कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई थी.
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अप्रैल 2007 (इलाहाबाद)


इलाहाबाद उच्च न्यायालय और जिला अदालत परिसर में वकीलों और पुलिस के बीच एक साथ हुई झड़प में यूपी के अटॉर्नी जनरल SMA काजमी समेत 50 से अधिक लोग घायल हो गए थे. इस वजह से लखनऊ में वकीलों ने हड़ताल शुरू कर दी थी. दोनों के बीच फिर झड़प हुई और एक-दूसरे को नुकसान पहूंचाया. आपको बता दें, सुल्तानपुर, आजमगढ़, वाराणसी, कानपुर, एटा, फैजाबाद और बस्ती में वकीलों के अदालतों का बहिष्कार करने की भी खबरें थीं.
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जानें- क्या मांग कर रहे पुलिस वाले


कानून के रखवाले अब अब अपनी सुरक्षा की मांग कर रहे हैं. दिल्ली पुलिस के बाहर प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों का कहना है कि वह इस समय खुद को वर्दी में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं. क्योंकि जहां पर वकीलों का गुट किसी पुलिसकर्मी को देख रहा है तो वह उसपर हमला कर दे रहा है. वहीं पुलिसकर्मी अपने हाथ में एक पेपर लिए प्रदर्शन कर रहे हैं जिसपर लिखा है "HOW IS THE JOSH" और नीचे लिखा है "LOW SIR."
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