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हैदराबाद के वो सातवें निजाम, चूहों ने कुतर दिए थे जिनके लाखों के नोट

aajtak.in
08 October 2019
हैदराबाद के वो सातवें निजाम, चूहों ने कुतर दिए थे जिनके लाखों के नोट
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बीते लंबे समय से हैदराबाद के सातवें निजाम मीर उस्मान अली खान चर्चा में हैं. इसकी वजह उनकी वो संपत्ति है, जिसे लेकर 70 साल बाद ब्रिटेन के हाई कोर्ट से फैसला आया है. ये फैसला भारत और निजाम के उत्तराधिकारियों के पक्ष में है. बताते हैं कि हैदराबाद के इस निजाम की रईसी के किस्से देश-दुनिया में सुनाए जाते हैं. कहा जाता है कि निजाम मीर उस्मान अली खान के पास इतनी अकूत दौलत थी कि उनके लाखों रुपये के नोट चूहों ने कतर दिए थे. एक रिपोर्ट के मुताबिक, वो उस दौरान भारत के सबसे अमीर और दुनिया के टॉप टेन अमीर लोगों में शामिल थे. उनके रईसी के किस्से कुछ इस तरह लोग सुनाते थे.
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चूहों ने काट दिए थे नोट

द इंडिपिडेंट की एक रिपोर्ट के आधार पर साल 1911 से 1948 तक हैदराबाद पर शासन करने वाले मीर उस्‍मान अली खान असल में एक सम्राट जैसा वैभव रखते थे. उनके पास इतने पैसे थे कि वो उसकी हिफाजत नहीं कर पाते थे. उनके तहखाने में नोट कुतरने का किस्सा भी लोगों में खूब प्रचलित है. कहते हैं कि एक बार नौ मिलियन पाउंड के नोट चूहों ने काटकर नष्ट कर दिए थे. यही नहीं उनके पास करोड़ों के हीरे होने की कहानी भी मशहूर है.
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रिपोर्ट के अनुसार देश में आजादी के बाद रियासतों का विलय होने लगा, तब निजाम मीर उस्मान अली खान ने 1948 में करीब 10,07,940 पाउंड और नौ शिलिंग की रकम को ब्रिटेन में पाकिस्तान के तत्कालीन उच्चायुक्त हबीब इब्राहिम रहीमतुल्ला को अपने वित्तमंत्री के जरिए सुरक्षित रखने के इरादे से दी थी. तभी से ये रकम नेटवेस्ट बैंक PLC के उनके खाते में जमा है. ये रकम अब बढ़कर करीब 300 करोड़ रुपये हो गई है. कहते हैं कि हैदराबाद रियासत के भारत में विलय के बाद सन 1950 में निजाम ने इस रकम पर अपना दावा किया, लेकिन तत्कालीन उच्चायुक्त रहीमतुल्लाह ने पैसे वापस करने से इनकार कर दिया था और कहा कि ये अब पाकिस्तान की संपत्ति बन गई है.
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कंजूसी की कहानियां भी हैं मशहूर

बताते हैं कि उनके पास अकेले 100 मिलियन पाउंड के सोने के गहने थे. वहीं, अन्‍य धातुओं के गहनों की कीमत 400 मिलियन पाउंड थी. मौजूदा वक्‍त में ये रकम अरबों पाउंड के बराबर कीमत के बराबर है.
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बताते हैं कि समय बीतने के साथ वो कंजूस भी हो गए थे, अब वो लोगों से सिगरेट मांगकर पीने से लेकर फटे मोजे और फटे कुर्ते को सिलकर पहनने लगे थे. उनकी रईसी के साथ ही उनकी कंजूसी के किस्से भी खासे नामचीन हुए.
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साल 1954 में 7वें निजाम और पाकिस्तान के बीच इस रकम को लेकर कानूनी जंग की शुरुआत हुई थी. नि‍जाम ने अपने पैसे वापस पाने के लिए ब्रिटेन के हाई कोर्ट में मुकदमा किया. वहीं पाकिस्तान ने सॉवरेन इम्यूनिटी का दावा कर दिया था जिससे केस की प्रक्रिया रुक गई थी. फिर साल 2013 में पाकिस्तान ने रकम पर दावा करके सॉवरेन इम्यूनिटी खत्म कर दी.
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इसके बाद पाकिस्तान सरकार के खिलाफ कानूनी लड़ाई में सातवें निजाम के वंशजों व आठवें निजाम प्रिंस मुकर्रम जाह उनके छोटे भाई मुफ्फखम जाह ने भारत सरकार से हाथ मिला लिया था. इसके बाद उनके और भारत सरकार के हक में ये फैसला आया है.
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