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आंध्र: बापटला में TDP और कांग्रेस का मेल बिगाड़ सकता है YSR का खेल

आंध्र प्रदेश की बापटला लोकसभा सीट पर वर्तमान में TDP का कब्जा है. हालांकि, इस सीट पर अभी तक हुए 11 आम चुनावों में कांग्रेस और तेलुगू देशम पार्टी के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली है. वहीं, वाईएसआर कांग्रेस को यहां से एक बार भी जीत नहीं मिल सकी है.

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अजीत तिवारीनई दिल्ली, 20 February 2019
आंध्र: बापटला में TDP और कांग्रेस का मेल बिगाड़ सकता है YSR का खेल मलयाद्री श्रीराम (तस्वीर- फेसबुक)

बापटला लोकसभा सीट प्रसिद्ध प्रचीन मंदिरों के लिए जाना जाता है. यहां प्रसिद्ध भवनारायणस्वामी मंदिर है, जो लोगों की आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है. समुंद्र से सटा होने के कारण मछलीपालन यहां का मुख्य व्यापार श्रोत है. यहां धान की पैदावार अच्छी होती है, वहीं पटसन और तंबाकू भी किसानों के व्यापार का बड़ा श्रोत माना जाता है. कृषि योग्य भूमि ज्यादा होने के कारण यहां एक कृषि शोध केंद्र भी स्थापित है. साथ ही पर्यटन के लिहाज से भी यह इलाका काफी मशहूर है. यहां का सूर्यलेक बीच, भवनारायणस्‍वामी मंदिर और सेंचुरी बैपस्चिक चर्च लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

आंध्र प्रदेश की बापटला लोकसभा सीट पर वर्तमान में TDP का कब्जा है. हालांकि, इस सीट पर अभी तक हुए 11 आम चुनावों में कांग्रेस और तेलुगू देशम पार्टी के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली है. वहीं, वाईएसआर कांग्रेस को यहां से एक बार भी जीत नहीं मिल सकी है. 2014 के आम चुनाव में वाईएसआर ने कांग्रेस को पछाड़ते हुए दूसरे नंबर पर पहुंच गई थी. वाईएसआर कांग्रेस के अस्तित्व में आने के बाद पूरे प्रदेश में कांग्रेस का प्रभाव तेजी से नीचे गिरा है. यही कारण है कि 2014 के आम चुनाव में ज्यादातर सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार 2 फीसदी तक ही वोट हासिल कर सके. इस सीट पर 1977 में पहली बार आम चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी. हालांकि, टीडीपी की स्थापना के बाद से दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों का आना जाना लगा रहा है. 11 बार के आम चुनावों में कांग्रेस ने 6 बार जीत हासिल की. वहीं, 5 बार यह सीट टीडीपी के पास रही.

सामाजिक ताना-बाना

बापटला लोकसभा क्षेत्र में 84.47 फीसदी लोग ग्रामीण इलाके में रहते हैं, वहीं शेष बचे लोग शहरी क्षेत्र में रहते हैं. अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक यहां की 23.83 फीसदी आबादी अनुसूचित जाति यानी एससी और 4.74 फीसदी लोग अनुसूचित जनजाति यानी एसटी है. 2014 में हुए आम चुनाव के मुताबिक इस लोकसभा सीट पर 13,92,964 वोटर हैं, जिसमें 6,86,494 पुरुष और 7,06,453 महिलाएं शामिल हैं. 2014 के आम चुनाव में इस सीट पर 85.16 फीसदी वोटिंग हुई. बापटला लोकसभा में 7 विधानसभाएं आती हैं. इसमें वेमुरु और संथानुथालापाडु आरक्षित सीटें हैं. 7 सीटों में से 3 (वेमुरु, रेपल्ली, परचुर) टीडीपी के पास हैं, वहीं 3 (बापटला, अड्डांकी, संथानुथालापाडु) पर वाईएसआर कांग्रेस के विधायक हैं. इसके अलावा चिरला विधानसभा सीट एनपीटी के पास है.

2014 का जनादेश

बापटला लोकसभा सीट से टीडीपी सांसद मल्याद्री श्रीराम ने जीत हासिल की थी. उन्होंने अपने विरोधी वाईएसआर कांग्रेस उम्मीदवार वरीकुटी अमरुथापानी को 32,754 वोटों के अंतर से हाराया था. इस दौरान टीडीपी को सबसे ज्यादा 48.74 फीसदी वोट, वाईएसआर कांग्रेस को 45.98 फीसदी वोट और तीसरे नंबर पर रही कांग्रेस को 1.95 फीसदी वोट मिले. इस चुनाव में टीडीपी उम्मीदवार मल्याद्री श्रीराम ने 35,754 वोटों के अंतर जीत दर्ज की थी.

सांसद का रिपोर्ट कार्ड

मलयाद्री श्रीराम पूर्व आईआरएस अफसर रह चुके हैं. राजनीति में आने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी और 2009 में टीडीपी के टिकट पर चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा. 2009 में मिली हार के बाद 2014 में टीडीपी ने दोबारा उन पर भरोसा जताया, जिस पर वो खड़ा उतरे और जीत हासिल की. श्रीराम संसद में काफी एक्टिव रहे हैं. सदन में उनकी मौजूदगी 91 फीसदी रही है. इस दौरान उन्होंने संसद के तीन बहस में हिस्सा लिया और 204 सवाल पूछे. साथ ही श्रीराम ने सांसद निधि में से 18.64 करोड़ रुपये की राशि विकास कार्यों पर खर्च की.

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