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और यहां जीता भी ‘भगवान’, हारा भी ‘भगवान’ | कॉमनवेल्‍थ एक्‍सप्रेस

राष्ट्रमंडल खेलों का पहला स्वर्ण पदक जीतने वाली नाईजीरियाई भारोत्तोलक आगुस्टिना नवाओकोलो ने जहां भगवान का लाख लाख शुक्रिया अदा किया वहीं रजत पदक से संतोष करने वाली भारतीय सोनिया चानू को लगता है कि भगवान ने उनकी मदद नहीं की.
और यहां जीता भी ‘भगवान’, हारा भी ‘भगवान’ | <a style='COLOR: #d71920' href='http://is.gd/fy32c' target='_blank'>कॉमनवेल्‍थ एक्‍सप्रेस </a>
भाषानई दिल्‍ली, 05 October 2010

राष्ट्रमंडल खेलों का पहला स्वर्ण पदक जीतने वाली नाईजीरियाई भारोत्तोलक आगुस्टिना नवाओकोलो ने जहां भगवान का लाख लाख शुक्रिया अदा किया वहीं रजत पदक से संतोष करने वाली भारतीय सोनिया चानू को लगता है कि भगवान ने उनकी मदद नहीं की.

चानू को भारोत्तोलन के महिला वर्ग के 48 किग्रा में रजत पदक मिला जबकि उन्हें सोने के तमगे का दावेदार माना जा रहा था. वह इस हार से काफी निराश थी.

उन्होंने कहा, ‘मेरे कोच (हरनाम सिंह) ने मुझे बहुत अच्छी ट्रेनिंग दी थी. मैं किसी भी तरह से स्वर्ण पदक जीतना चाहती थी लेकिन भगवान ने मेरी मदद नहीं की. मैं शर्मिंदा हूं कि मैं कोच की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पायी.’

दूसरी तरफ स्वर्ण पदक जीतने वाली सत्रह वर्षीय नवाओकोलो ने 175 किग्रा भार उठाकर नया रिकार्ड बनाया. उन्होंने कहा, ‘मैं रिकार्ड तोड़कर खुश हूं. मैंने अच्छा अभ्‍यास किया था और मैं इससे भी अधिक भार उठा सकती हूं लेकिन आज की जीत के लिये मैं ईश्वर का शुक्रिया अदा करना चाहूंगी.’

भारतीय कोच हरनाम भी चानू की हार से काफी निराश दिखे. उन्होंने कहा, ‘मैं आयोजकों और अपनी टीम की तरफ खेद व्यक्त करता हूं. हमने आज अच्छा मौका गंवाया. भाग्य हमारे साथ नहीं था. वह इस भार को उठा सकती थी लेकिन ऐसा नहीं कर पायी.’

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