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सुशील कुमार की तदबीर से बदली तकदीर

जब पिछले दिनों सुशील कुमार पटेल को 5 करोड़ रु. का चेक मिला तो कौन बनेगा करोड़पति-5 की टैगलाइन ''कोई भी इंसान छोटा नहीं होता'' सच होती दिखी. छह महीने पहले तक कहानी कुछ और ही थी. 28 वर्षीय सुशील के सिर पर छत तो थी लेकिन वह भी गिरवी पड़ी थी.

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अशोक कुमार प्रियदर्शीनई दिल्‍ली, 30 December 2011
सुशील कुमार की तदबीर से बदली तकदीर सुशील कुमार

जब पिछले दिनों सुशील कुमार पटेल को 5 करोड़ रु. का चेक मिला तो कौन बनेगा करोड़पति-5 की टैगलाइन ''कोई भी इंसान छोटा नहीं होता'' सच होती दिखी. छह महीने पहले तक कहानी कुछ और ही थी.

28 वर्षीय सुशील के सिर पर छत तो थी लेकिन वह भी गिरवी पड़ी थी. मोतिहारी के हनुमानगढ़ी मुहल्ले में स्थित उनका घर परिवार के 14 सदस्यों के लिए छोटा पड़ता था. वैसे भी मकान इतना जर्जर था कि वे 3,000 रु. प्रतिमाह पर किराए के मकान में रहते थे.

सुशील 2011 में उस समय सुर्खियों में आए जब उन्होंने केबीसी-5 में 5 करोड़ रु. जीते. सुशील की परेशानियां अब अतीत बन कर रह गई हैं. सोनी टीवी चैनल के इस गेम शो में अमिताभ बच्चन के सवालों का जवाब देकर उन्होंने अपना जीवन बदल लिया है. लक्ष्मी पूजा से एक दिन पहले सुशील ने पूरे परिवार की दरिद्रता को दूर भगाया.

अमरनाथ पटेल और रेणु देवी के पांच बेटों में सुशील तीसरे नंबर पर हैं. वे पश्चिम चंपारण के चनपटिया में मनरेगा कार्य के लिए अनुबंध पर कंप्यूटर ऑपरेटर का काम करते हैं जिसकी एवज में उन्हें 6,000 रु. मासिक मिलते हैं. पिता एक ठेकेदार के यहां बतौर मुंशी काम करते थे.

बड़े भाइयों में सुनील दुकान चलाते हैं, अनिल एलआइसी एजेंट हैं, जबकि छोटे भाइयों में सुजीत 2,500 रु. के मासिक वेतन पर कपड़े की दुकान में काम करते हैं और सुधीर आइटीआइ में पढ़ रहे हैं.सुशील ने साइकोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रखा है.

सुशील के बड़े भाई अनिल पटेल बताते हैं, ''सुशील बचपन से मेधावी था. उसे मौका नहीं मिल पा रहा था. फिर भी उसमें कुछ अच्छा करने की ललक थी जिसके कारण जॉब पाने के बाद भी उसने प्रयास जारी रखे.''

सुशील को भी यकीन नहीं था कि वे इतनी जल्दी केबीसी की हॉट सीट पर पहुंच जाएंगे. वे घर के कर्ज से मुक्ति और यूपीएससी की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर अपना जीवन बदलना चाहते थे. शायद यही वजह थी कि उन्होंने अपना पड़ाव भी 1.60 लाख रु. का रखा था. कहते हैं, भगवान जब देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है. सुशील ने अपनी जीत से एक झटके में मनरेगा की नौकरी के करीब 700 वर्षों की एकमुश्त राशि कमा ली. केंद्रीय ग्रामीण विकास विभाग ने उन्हें मनरेगा का ब्रांड एंबेसेडर भी बना दिया है.

एक समय सुशील जीवन में सिर्फ एक बार हवाई जहाज से सफर का सपना देखा करते थे, अब हर हफ्ते उन्हें इसका मौका मिल रहा है. सुशील को यह कामयाबी यूं ही नहीं मिली है. वे उस समय से केबीसी देखा करते थे, जब उनके घर में न तो टीवी था और न ही टेलीफोन. 14 नवंबर, 2007 को जब उन्हें कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी मिली तब उन्होंने मोबाइल भी खरीदा और टीवी भी. उन्होंने पहली बार केबीसी-4 में भाग्य आजमाया. लेकिन उनका चयन नहीं हो सका.

केबीसी-5 में जब सवालों का दौर शुरू हुआ, तब मुहल्ले का ट्रांसफॉर्मर जल गया. तब उनके ससुराल वाले टीवी देखकर उन्हें सवाल बताते थे. जिसके आधार पर वे जवाब मैसेज करते. वह भी सौ बार. जब उन्हें ऑडिशन के लिए कॉल आया तब वे अच्छे लिबास और फर्राटेदार अंग्रेजी बोलनेवाले प्रतिभागियों को देखकर डर गए. लेकिन उन्होंने आत्मविश्वास नहीं खोया. मुश्किलें यही नहीं थमीं.

ऑडिशन के बाद सुशील का वह मोबाइल सिम गुम हो गया, जिससे वह मैसेज करते थे. उन्हें लगा सब खत्म. जब ससुरालवालों के वैकल्पिक नंबर पर कॉल आया तो उन्होंने राहत की सांस ली.

सुशील बताते हैं, ''ज्‍यादातर लोग ऐसी परिस्थितियों से हार जाते हैं, और मंजिल तक नहीं पहुंच पाते. यह उनकी भूल है. सब कुछ कभी खत्म नहीं होता, जब तक जीवन है, तब तक संभावनाएं हैं. जरूरत निरंतर प्रयास की है.''

सुशील की सफलता पर बिग बी का कहना था, ''उन्होंने अपनी इंटेलीजेंस की बदौलत 5 करोड़ रु. जीते हैं. कोई भी इंसान छोटा नहीं होता.'' बिल्कुल सही, क्योंकि दिमाग से पैसा कमाया जा सकता है. लेकिन पैसे से दिमाग नहीं.

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