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चौहान की 'ना काहू से बैर’ की राजनीति

अल्पसंख्यक वोट साधने के लिए शिवराज सिंह चौहान कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. अल्पसंख्यक समुदाय के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के साथ ही उनके लिए योजनाएं भी चलाईं.
चौहान की 'ना काहू से बैर’ की राजनीति
लेमुअल लाल 12 November 2013

अक्तूबर की पहली तारीख को ईसाई आइएएस अधिकारी एंटनी डीसा ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव पद का जिम्मा संभाल लिया. वहीं पिछले पखवाड़े 18 सितंबर को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में प्रदेश कैबिनेट ने भोपाल के निकट पिपलनर में मौलाना आजाद उर्दू यूनिवर्सिटी को 6.44 एकड़ सरकारी भूमि सिर्फ एक रु. पट्टे पर आवंटित कर दी.

डीसा को मुख्य सचिव बनाए जाने के ठीक एक दिन पहले ही केंद्र सरकार के उर्दू यूनिवर्सिटी के लिए भूमि चिन्हित करने के प्रस्ताव का एजेंडा तय हुआ था. लेकिन डीसा की पदोन्नति संघ परिवार को अखरनी ही थी. इंदौर के एक आरएसएस पदाधिकारी ने भोपाल में संघ की एक बैठक में यह कहते हुए अपना गुस्सा जाहिर किया कि इस महत्वपूर्ण पद पर डीसा के आने से प्रदेश में धर्म परिवर्तन का रास्ता खुल जाएगा.

दरअसल चौहान की इन सारी कवायदों का मकसद अपनी सेक्युलर छवि को मजबूत करना है. जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव पास आ रहे हैं, वे और ज्यादा सेक्युलर होते जा रहे हैं. प्रदेश के 6 फीसदी मुसलमानों और 2 फीसदी ईसाइयों को लुभाने के लिए वे एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं. वे नहीं चाहते कि ये वोट एकमुश्त कांग्रेस को जाएं उनके करीबी सूत्रों के मुताबिक, आगामी चुनावों में अल्पसंख्यकों के समर्थन को लेकर वे बहुत आशावादी हैं.

भोपाल उत्तर से 1993 से ही लगातार जीत रहे कांग्रेस के मौजूदा विधायक आरिफ अकील के खिलाफ उन्होंने एक मुस्लिम उम्मीदवार उतारने की योजना बनाई है. 15 वर्ष के बाद बीजेपी मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों में किसी मुस्लिम प्रत्याशी को मैदान में उतारने वाली है. भोपाल जिले में लगभग 25 फीसदी आबादी मुस्लिम है. उसके बाद खंडवा का नंबर आता है जहां मुस्लिम आबादी 20 फीसदी के आसपास है. ईद के दौरान भी चौहान टोपी पहनकर ईदगाह पहुंच गए थे और अपने सरकारी आवास पर उन्होंने इफ्तार पार्टी का इंतजाम किया था.

इसके पहले 29 अप्रैल को उन्होंने भोपाल के सिंगरचौली इलाके में 2.01 एकड़ में बनने वाले हज हाउस की आधारशिला रखी. राज्य सरकार हज हाउस बनाने के लिए पहले ही 6.11 करोड़ रु. मंजूर कर चुकी थी. मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत 4,500 से अधिक बुजुर्ग मुस्लिम अजमेर दरगाह की जियारत पर जा चुके हैं और 900 ईसाई नागपट्टनम के होली वेलांकन्नी चर्च के दर्शन कर चुके हैं.

मुख्यमंत्री निकाह योजना के तहत भी प्रदेश सरकार मुसलमानों के लिए सामूहिक विवाह आयोजित करती है और घर-गृहस्थी का सामान देती है. अप्रैल 2012 के बाद से इस योजना के तहत 1,469 से ज्यादा जोड़ों का विवाह हो चुका है. सरकार ने राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षा के लिए अल्पसंख्यक युवाओं को मुफ्त कोचिंग उपलब्ध करवाई.

स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ रहे 2 लाख अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को 1,000 रु. से 35,000 रु. सालाना तक की छात्रवृत्ति दी जा रही है. मध्य प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री अजय विश्नोई बताते हैं, ''चार साल पहले लाभार्थियों की संख्या महज 18,000 ही थी.” उनके मुताबिक, पांच मुस्लिम छात्रों को पढऩे के लिए विदेश भेजा गया है और प्रत्येक को 15 लाख रु. अग्रिम दिए गए हैं.

धार जिले में 15 फरवरी को वसंत पंचमी के दिन भी चौहान की सेक्युलर छवि को बचाने की मुहिम दिखी थी, जब मुसलमानों को नमाज पढऩे से रोक रहे हिंदू नेताओं से पुलिस सख्ती से निबटी थी. इसकी गूंज विधानसभा में भी सुनाई पड़ी. उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जब इस मामले में हिंदू कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीचार्ज का विरोध किया तो चौहान ने कहा था कि उन्होंने राजधर्म का पालन किया.

मध्य प्रदेश बीजेपी के उपाध्यक्ष प्रभात झा कहते हैं, ''चौहान की जन आशीर्वाद यात्रा में जिस तरह से मुस्लिम आ रहे हैं, उससे लगता है कि वे जबरदस्त ढंग से बीजेपी को वोट देंगे.” वहीं इससे इनकार करते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष राजा पटेरिया कहते हैं, ''अल्पसंख्यकों को लुभाने की चौहान की रणनीति काम नहीं आएगी. मुस्लिम और ईसाई बीजेपी का असली चेहरा पहचानते हैं.”

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