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चलें वहीं, जहां है नौकरियों की भरमार

सरकारी नौकरियों का सुनहरा दौर लगभग खत्म हो चला है. अब जॉब के अवसर निजी और नए क्षेत्रों में हैं. भविष्य की योजना बनाने से पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि किन सेक्टर में ज्‍यादा नौकरियां हैं. इस काम में आपकी मदद कर रहे हैं टीमलीज सर्विसेस के एमडी अशोक रेड्डी.

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अशोक रेड्डीनई दिल्ली, 22 January 2014
चलें वहीं, जहां है नौकरियों की भरमार

आर्थिक सुधारों की दिशा में भारत की यात्रा ने देश को तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना दिया है.

बड़ी और तेजी से बढ़ती आबादी देश की सर्वश्रेष्ठ और महत्वपूर्ण संपदा है जो कि आगामी एक दशक में सकल घरेलू उत्पाद को चौगुना करने का और भारत को विकसित अर्थव्यवस्थाओं की कतार में ला खड़ा करने का माद्दा रखती है. लेकिन यह सब तभी संभव होगा जब एक अरब की आबादी को प्रोडक्टिव वर्कफोर्स में बदला जाएगा.

21 दिसम्‍बर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

पिछले लगभग आधे दशक से भारत में यह तो कहा जा रहा है कि देश में जबरदस्त मैनपावर है लेकिन असल विकास बहुत कम है. वजहः अवसर के साथ कुछ चुनौतियां भी आती हैं.

सर्विस सेक्टर में लाखों नॉलेज वर्कर्स की जरूरत है. लेकिन रोजगार के मुताबिक योग्य लोगों की कमी स्थायी समस्या है. बड़ी संख्या में भारत की युवा आबादी खुद को परिवर्तन के मुताबिक नहीं ढाल पा रही है.

14 दिसंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

07 दिसंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

सेक्‍स सर्वे: तस्‍वीरों से जानिए कैसे बदल रहा है भारतीय समाज

यह संकेत है इस बात का कि लगभग 90 फीसदी लेबर फोर्स की अच्छी तरह से ट्रेनिंग नहीं हुई है. रोजगार के मौके लगातार बढ़ रहे हैं जिसके लिए एजुकेटेड वर्कफोर्स की जरूरत होगी.

30 नवंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

इनमें से ज्‍यादातर तेजी से उभरते क्षेत्रों में चाहिए. हमें नए अवसरों को पहचानना होगा और उसके हिसाब से तैयारी करनी होगी. भविष्य में रोजगार निर्माण और बिजनेस ग्रोथ के लिहाज से जो क्षेत्र हमारे विकास की गति को आगे बढ़ाते रहेंगे, डालते हैं उन पांच क्षेत्रों पर एक नजर.

1 इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी

पिछले काफी समय से भारत का आइटी सेक्टर अपना जलवा बिखेर रहा है. कभी भारत की छवि धीमी विकसित होती अर्थव्यवस्था की हुआ करती थी, जिसे बदलकर विश्वस्तरीय टेक्नॉलॉजी सॉल्यूशन देने वाले ग्लोबल खिलाड़ी की इमेज बनाने में इस इंडस्ट्री का बहुत बड़ा रोल रहा है. आइबीईएफ (इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन) के मुताबिक 2020 तक भारत का आइटी उद्योग 225 अरब डॉलर के आंकड़े को छू लेगा.

23 नवंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

16 नवंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

उद्योग के विशेषज्ञों और नेसकॉम के मुताबिक 2020 तक भारतीय आइटी सेक्टर के कर्मियों की संख्या तीन करोड़ हो जाने की संभावना है, जिसके चलते यह सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला सेक्टर बन जाएगा. इसके साथ ही इस सेक्टर की तनख्वाहें, जहां पहले से ही अच्छा-खासा पैसा दिया जाता है, भी बढ़ेंगी. आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री की निगाहें भी भारत पर टिकी हैं, अगले 24 महीनों में देश में इस उद्योग के 2.5 अरब डॉलर का होने की उम्मीद है.

2 टेलीकॉम

भारत में टेलीकॉम उद्योग लगातार बेहतरी की ओर बढ़ रहा है. मैनेजमेंट कंसल्टिंग कंपनी जिनोव के अनुमान के मुताबिक भारत में लगभग 85 करोड़ मोबाइल फोन कनेक्शन पहले से ही हैं. इनमें भी 15 फीसदी स्मार्ट फोन उपभोक्ता हैं.

9 नवंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे
2 नवंबर 201: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

यह इस बात का संकेत है कि भारत में एंटरप्राइज मोबिलिटी बढ़ रही है, जिससे रोजगार के क्षेत्र का विकास होगा. भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने भी 2014 तक ब्रॉडबैंड उपभोक्ताओं की संख्या में 10 गुना बढ़ोतरी के साथ इसके 10 करोड़ तक पहुंचने का लक्ष्य आंका है. कंसल्टेंसी फर्म ई ऐंड वाइ के अनुसार दूरसंचार क्षेत्र से आउटसोर्सिंग राजस्व 2012 तक करीब 2 अरब डॉलर का होने की संभावना है.

भारत आज टेलीकॉम सेक्टर में विकास की उस सीढ़ी पर है जहां संभवतः अमेरिका 30 साल पहले था. हमारे मोबाइल और इंटरनेट के क्षेत्र में तेजी से विकास के साथ नौकरियों के ढेर सारे मौके आएंगे.

3 हेल्थकेयर

इस बात के साफ संकेत हैं कि हेल्थकेयर एक बड़ा उपक्रम होने जा रहा है. ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन, बोस्टन कंसल्टिंग समूह और सीआइआइ की रिपोर्ट-इंडियाज न्यू अपॉर्चुनिटीज 2020-के मुताबिक इस क्षेत्र में 2020 तक चार करोड़ नये लोगों को नौकरियां मिलेंगी.

19 अक्‍टूबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे
12 अक्‍टूबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

5 अक्‍टूबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

मेडिकल टुरिज्‍म के लिहाज से ग्लोबल हब बनने के मामले में इंडियन हेल्थकेयर इंडस्ट्री दूसरे विकासशील देशों से आगे है. भारत में मेडिकल ट्रीटमेंट और इस क्षेत्र में शिक्षा सेवाओं का खर्च विकसित देशों से काफी कम है.

भले ही दवाओं के निर्माण और पेटेंट कराने में हम पीछे रह गये हैं लेकिन खर्च करने योग्य आय में बढ़त के चलते भारत के घरेलू बाजार में संभावनाएं और भी अधिक मजबूत हुई हैं. ऐसा होने से इस उद्योग के भीतर सेल्स, माकर्व्टिंग, एचआर, आइटी और ऑपरेशंस जैसे विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उल्लेखनीय रूप से बढ़ रहे हैं.

4 इन्फ्रास्ट्रक्चर

पिछले एक दशक में भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर के मामले में विकास देखने को मिला है. आज हम चौथी सबसे बड़ी और शायद दूसरी सर्वाधिक तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था हैं और इस विकास में इन्फ्रास्ट्रक्चर नींव का पत्थर है.

चूंकि हमारे यहां की इन्फ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री कई हिस्सों में में बंटी हुई है, इसलिए उद्योग का वास्तविक आकार और इसके जरिए उत्पन्न होने वाले रोजगार का सही-सही अंदाजा लगाना बहुत ही मुश्किल है.

चाहे ये सड़कें हों, राजमार्ग हों, रेलवे हो, एविएशन हो, शिपिंग हो, एनर्जी हो या फिर तेल या गैस का क्षेत्र हो, सभी में भारत सरकार और विभिन्न राज्‍य सरकारें तेजी से प्रगति करती दिख रही हैं. इसके चलते रोजगार के अच्छे-खासे अवसर पैदा हुए हैं.

हालांकि यह और बात है कि इनमें से ज्‍यादातर अब भी असंगठित क्षेत्र में हैं. अगले दस साल में भारत को इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अपने विकास की गति बनाए रखनी होगी और विकास दर के 7 से 10 फीसदी के बीच बने रहने की संभावना है जो एक अच्छा संकेत है.

28 सितंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे
21 सितंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे
7 सितंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

5 रिटेल

सिंगल ब्रांड रिटेल में 100 फीसदी एफडीआइ-जो कि अभी 51 फीसदी है-को मंजूरी दिए जाने की चर्चा के कारण रिटेल सेक्टर लगातार खबरों में बना हुआ था. फिलहाल यह मामला विवादों में चल रहा है.

वैसे देश के रिटेल सेक्टर को खोल दिए जाने पर एक मजबूत और संगठित उद्योग तैयार होगा जो रोजगार पैदा करेगा. इसके अलावा, एक अनुमान के मुताबिक भारत का रिटेल सेक्टर 400 अरब डॉलर से भी ज्‍यादा का है.

साथ ही इस क्षेत्र के कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी देश भर में बिजनेस फैलाने की तैयारी में हैं. उद्योग के जानकारों का मानना है कि विकास के अगले चरण की शुरुआत ग्रामीण बाजारों से होगी.

संगठित और असंगठित दोनों ही क्षेत्रों को मिलाकर फिलहाल रिटेल में पांच लाख लोग काम कर रहे हैं और 2015 तक इस संख्या के दोगुना हो जाने की उम्मीद है.

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