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कमाई का कूल टूल बनता सोशल मीडिया

वे पूरी शिद्दत से काम करते हैं, वेब पर बतियाते हैं, किस्सागोई करते हैं, दिल जीतते हैं और कारोबार बढ़ाते हैं.

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सुधीर गोरेनई दिल्‍ली, 05 February 2012
कमाई का कूल टूल बनता सोशल मीडिया मालती और आंचल, मेपल, दिल्ली

- डेढ़ साल पहले दिल्ली के अशोक विहार की दो बहनों का महज मौज-मस्ती में अपने फर्निशिंग्स के कारोबार 'मेपल' को फेसबुक से जोड़ना बेहद फायदेमंद और यादगार साबित हुआ.

- देश-दुनिया की आला विज्ञापन कंपनियों में 12-14 साल ऊंचे ओहदों पर काम कर गुड़गांव लौटे एक पेशेवर योजनाकार ने 2009 में अपने 5 कमरों के गेस्ट हाउस के साथ ही दिल के दरवाजे भी फेसबुक और ट्विटर पर खोल दिए. नतीजा बेहतरीन रहा. दुनिया के पच्चीस देशों के यायावर अब 'सिनामन स्टेज़' नाम के इस बेड ऐंड ब्रेकफस्ट/गेस्ट हाउस की खातिरदारी के मुरीद हैं.

8 फरवरी 2012: तस्‍वीरों में इंडिया टुडे

- अगर आप इस बार वैलेंटाइन डे पर मुहब्बत की मिसाल ताजमहल को देखने आगरा जाना चाहते हैं तो पहले इंटरनेट पर वीडियो वेबसाइट यूट्यूब देखिए. अंग्रेजी बोलता एक नौजवान टैक्सी ड्राइवर आपकी सेवा के लिए तैयार है.

नए भारत के ये युवा उद्यमी और पेशेवर पूरे जोश के साथ अपने छोटे-बड़े कारोबार को सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस, यूट्यूब का इस्तेमाल कर रहे हैं. उनकी यह सारी कवायद सोशल मीडिया मार्केटिंग के रूप में मशर है. कुछ लोगों ने कई लोगों से सुना है कि फेसबुक, ट्विटर या गूगल प्लस जैसे सोशल मीडिया के जरिए लोग घर बैठे अपना कारोबार बढ़ा रहे हैं. मेपल के जैन परिवार और सिनामन स्टेज़ के मनीष सिन्हा और उनकी पत्नी शिल्पी कामयाबी की मिसालें हैं.

1 फरवरी 2012: तस्‍वीरों में इंडिया टुडे

अस्सी और नब्बे के दशक में दिल्ली के अशोक विहार की मालती जैन अपने घर से बच्चों के लिए फर्निशिंग्स का कारोबार करती थीं, जिसे उन्हें बंद करना पड़ा. उनकी दो बेटियों मेघा और आंचल ने 8 साल बाद यह कारोबार 2005 में फिर शुरू किया. उन्होंने महिला क्लबों, मेलों में प्रदर्शनियां लगाकर इसे आगे बढ़ाया. कुछ साल ऐसे ही निकले. आंचल बताती हैं, ‘लेकिन फिर बाजार में हमारे उत्पादों की नकल दिखाई देने लगी, प्रतिस्पर्धा बढ़ी और हमें क्वालिटी बनाए रखते हुए नए-नए प्रयोग करने पड़े.’ विज्ञापन और बेहतर मार्केटिंग की दरकार थी, लेकिन बजट मामूली था. परचे छपवा कर हम लोगों के घरों तक पहुंचे, लेकिन ज्‍यादा लोग मेपल तक नहीं पहुंचे. आंचल बताती हैं, ‘एक दिन हमने अचानक खेल-खेल में ही मेपल के लिए फेसबुक पेज बनाया. शुरू में हमने अपने दोस्तों, रिश्तेदारों को जोड़ा. इनमें से कइयों ने हमारे काम को पसंद किया. फिर इन दोस्तों ने अपने दोस्तों को हमारे बारे में बताया. इसी तरह हमारे दोस्त बढ़े.’ मेपल को शुरू में फेसबुक पर पसंद करने वाले 120 से 150 लोग मिले. फिर उन्होंने इस प्लेटफॉर्म पर मौजूद माताओं के लिए एक मैसेज पोस्ट किया. जिसे पढ़कर उनके कई फैन बढ़े. आंचल बताती हैं, ‘हमने लोगों को मेल या मैसेज भेज कर उनकी प्राइवेसी में दखल नहीं दिया. इस तरह हमें पसंद करने वाले बढ़ने लगे और हमारा बिजनेस भी बढ़ने लगा.’

25 जनवरी 2012: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

ठहरने-खाने-पीने के बेहतरीन ठिकानों को रैंकिंग देने वाली मशर ट्रैवल वेबसाइट 'ट्रिप एडवाइजर' गुड़गांव में सिनामन स्टेज़ को सबसे अच्छे बेड ऐंड ब्रेकफस्ट/गेस्ट का दर्जा देती है. इसके संचालक सिन्हा इसकी पूरी सफलता का श्रेय सोशल मीडिया को ही देते हैं. ‘25 से ज्‍यादा देशों के लोग हमारे मेहमान बन चुके हैं. इनमें से ज्‍यादातर से हमारी पहली मुलाकात फेसबुक या ट्विटर जैसे किसी प्लेटफॉर्म पर होती है.’ सिन्हा बताते हैं कि 2009 में जब उन्होंने यह कारोबार शुरू किया तब वे अपने ग्राहकों से गेस्ट हाउस के बारे में अपने ट्रिप एडवाइजर पर अनुभव दर्ज करने के लिए कहते. मेहमानों के साथ ही मेजबान सिन्हा परिवार के अनुभवों और किस्से-कहानियों को भी तस्वीरों और वीडियो के साथ सलीके से फेसबुक पर पोस्ट किया जाता. इन पर प्रतिक्रिया मिलती, नए लोग जुड़ते और नई बातें होतीं. दिल मिलते, नए दोस्त बनते और कुछ दिन बाद वे सिनामन स्टेज़ के मेहमान बनते. सिन्हा का कहना है, ‘यह 'पुश' नहीं 'पुल' मार्केटिंग है. इससे हम अपने मेहमानों की सही सेवा कर पाते हैं‌. हम अपनी बातें लोगों तक जबरदस्ती नहीं पहुंचाते. फेसबुक और ट्विटर पर उनके साथ संवाद कायम करते हुए उन्हें अपने बारे में धीरे-धीरे बताते है.’

18 जनवरी 2012: तस्‍वीरों में देखिए इंडिया टुडे

सिनामन स्टेज़ जैसी सफलताओं के बारे में सोशल मीडिया मार्केटिंग सेवाएं देने वाली कंपनी वेबीट्यूड के निदेशक गिरीश महाजन का कहना है, ‘ऐसी कामयाबी के लिए स्थानीय स्तर पर कंपनी का कारोबार बहुत अच्छा होना चाहिए, हर कंपनी के पास कहने के लिए खुद के बारे में और अपने ग्राहकों के बारे में कोई कहानी होती है जो उसे पूरे जोश के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों के साथ शेयर करनी चाहिए. लोग देखते हैं, प्रतिक्रिया देते हैं और आपसे जुड़ते हैं.’

महाजन का मानना है कि स्थानीय स्तर पर अच्छा काम कर रहे व्यवसायियों के पास अपने ग्राहकों के बारे में तमाम तरह की छोटी-छोटी बातें और कई तरह की कहानियां होती हैं. ऐसी दुकानों से जुड़ी ये छोटी-छोटी बातें, ये कहानियां, ये किस्से जब सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म पर सुनाए जाते हैं तो इनसे जुड़े लोग कहीं भी बैठ कर बड़े चाव से इन्हें पढ़ते हैं, पसंद करते हैं, अपनी प्रतिक्रिया देते हैं. और कई बार अपने पुराने दिनों की बातें भी ताजा करते हैं. इसमें नए लोग जुड़ते हैं, पुराने कमेंट करते रहते हैं, और किसी भी आउटलेट के साथ अनजाने में उन ग्राहकों का रिश्ता बन जाता है.

11 जनवरी 2012: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

डिजिटल मार्केटिंग सलाहकार शुभोमय सेनगुप्ता के मुताबिक, फिलहाल 35 लाख भारतीय सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स का इस्तेमाल करते हैं. इनमें से 60 फीसदी लोग ब्रांड्स को अपने साथ संवाद की अनुमति देते हैं. देश में सोशल मीडिया का इस्तेमाल 100 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहा है और उम्मीद है, 45 लाख यूजर साल के अंत तक इस प्लेटफॉर्म से जुड़ेंगे. ऐसे में निश्चित ही छोटे और मझोले उद्योगों के लिए कारोबार की गुंजाइश काफी बढ़ जाती है.

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