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इंदौर प्रदूषण: धूल से पटी फिजा

जगह-जगह हो रहे निर्माण कार्यों के कारण उड़ रही धूल से हलकान हो रही है इंदौर की जनता.

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aajtak.in
जयश्री पिंगलेइंदौर, 29 October 2011
इंदौर प्रदूषण: धूल से पटी फिजा उड़ रही धूल

यह, प्रदेश का शिक्षा का केंद्र है, तेजी से विकसित होता मिनी मुंबई कहा जाने वाला महानगर है, लेकिन इन सभी उपलब्धियों से इतर यह एक ऐसा शहर है जो पूरी  तरह धूल से अटा पड़ा है, जहां दूर-दूर तक कुछ दिखाई देता है तो वह है धूल के गुबार. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी अपनी ताजा रिपोर्ट में इंदौर को देश का पांचवां सबसे प्रदूषित शहर बताया है. यहां हवा में तैरने वाले ठोस कणों की प्रति घन मीटर संख्या 174 है, मानक रूप से यह संख्या 20 मानी गई है. इसी तरह श्वसन योग्य ठोस कण का मानक प्रति घन मीटर 60 है जबकि यहां इनकी संख्या 130 पाई गई है.

दरअसल अलग-अलग सरकारी एजेंसियों ने विकास कार्यों के नाम पर शहर का चप्पा-चप्पा खोद रखा है. बेतरतीब निर्माण कार्य खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं. शहर के अंदरूनी और बाहरी इलाके को मिलाकर करीब 165 किमी क्षेत्र में जेएनयूआरएम, बीआरटीएस और नर्मदा के तीसरे चरण के लिए पाइपलाइन और सीवरेज लाइन डालने का काम चल रहा है.

एबी रोड़ पर साढ़े ग्यारह किमी की सड़क पर पिछले दो साल से निर्माण कार्य चल रहा है. नगर निगम पिछले पांच साल से धार रोड़ से लेकर अन्नपूर्णा रोड, वीआइपी रोड, पलासिया, कंचनबाग, नवरतन बाग जैसे तमाम इलाकों में करीब 80 किमी की फीडर रोड़ (सीमेंट की सड़कें) बना रहा है लेकिन इस बीच शहर में सीवरेज लाइन बिछाने की 307 करोड़ रु. की नगर निगम की योजना को केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने से सड़कों का निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया ताकि सीवरेज लाइन और नर्मदा पाइपलाइन बिछाई जा सके. यही नहीं, इस काम के लिए तैयार हो चुकी सड़कें फिर से खोद दी गईं.

सरकारी एजेंसियों में तालमेल के गंभीर अभाव के कारण नर्मदा परियोजना, सीवरेज, फीडर रोड़, बीआरटीएस, जेएनयूआरएम के निर्माण कार्य ऐसे गुत्थमगुत्था हुए हैं कि शहर हांफ-हांफकर रेंगने की स्थिति में आ गया है. धूल से बचाव के लिए मुंह पर कपड़ा बांधकर घर से निकलने के बावजूद लोग सांस के रोगों से नहीं बच पा रहे हैं. फिजीशियन डॉ. डी. मैत्रा बताते हैं कि धूल की वजह से लंबे समय से खांसी-जुकाम से पीड़ित, आंखों में संक्रमण और त्वचा पर खुजली की समस्या के मरीज आ रहे हैं.

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ए.ए. मिश्रा के मुताबिक बोर्ड नगर निगम और प्राधिकरण को सलाह पत्र जारी कर निर्माण कार्य तेजी से पूरा करने के लिए दो बार कह चुका है लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला. रही सही कसर दो पहिया और चार पहिया वाहनों की तेजी से बढ़ती संख्या ने पूरी कर दी है. क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय के मुताबिक शहर में 12 लाख से ज्‍यादा वाहन दौड़ रहे और धूल उड़ा रहे हैं.

अधिकारियों की मानें तो धूल और निर्माण कार्यों से परेशान लोगों को निकट भविष्य में राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है. सीवरेज लाइन के प्रभारी निगम इंजीनियर हरभजन सिंह कहते हैं, ''पाइपलाइन डालने के लिए सड़क  नौ इंच तक खोदी जाती है. इस पर दो-तीन साल तक पक्की सड़क नहीं बन सकती.''

फीडर रोड के प्रभारी निगम के सिटी इंजीनियर हंसकुमार जैन कहते हैं कि अच्छी निर्माण कंपनियों के अभाव में निर्माण का समय और गुणवत्ता प्रभावित हो रहे हैं. बीआरटीएस की सड़क बना रहे इंदौर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी चंद्रमौलि शुक्ल यह दावा तो करते हैं कि काम तेजी से हो रहा है लेकिन निर्माण कार्यों से हो रहे प्रदूषण से शहर कब मुक्त होगा यह नहीं बता पाते.

महापौर कृष्णमुरारी मोघे कहते हैं कि सड़कों का पैचवर्क शुरू कर दिया गया है इससे उम्मीद है कि धूल से जल्द ही निजात मिलेगी. धूल हटाने की मशीन भी काम पर लगाई गई है. विकास प्राधिकरण से निर्माण कार्य जल्द से जल्द पूरे करने और मिट्टी हटाने के लिए कहा गया है. विकास कार्य कर रही सरकारी एजेंसियों में तालमेल न होने की वजह एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी प्रशासनिक अक्षमता और राजनैतिक नेतृत्व के अभाव को बताते हैं.

इधर पुराने इंदौरी लोग शहर की बिगड़ती सूरत देख दुखी हैं. इंदौर डेवलपमेंट फाउंडेशन के न्यासी 78 वर्षीय मुकंद कुलकर्णी कहते हैं कि राज्य की व्यावसायिक राजधानी को विकास के नाम पर बरबाद किया जा रहा है. वे कहते हैं कि इंदौर में बेटी बचाओ अभियान के साथ शहर बचाओ अभियान भी शुरू करना चाहिए और इसकी निगरानी खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को करनी चाहिए.

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