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चार धाम यात्रा: खुल गए कपाट बैकुंठ के

तमाम बदइंतजामियों के बीच शुरू हुई चार धाम की तीर्थयात्रा.

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aajtak.in
प्रवीण कुमार भट्टदेहरादून, 08 May 2012
चार धाम यात्रा: खुल गए कपाट बैकुंठ के बद्रीनाथ

खराब यातायात व्यवस्था, मौसम की बेरुखी और अधूरी बनी हवाईपट्टियों के बीच विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा शुरू हो गई. इस बार यह 15 दिन ज्‍यादा चलेगी. 24 अप्रैल अक्षय तृतीया को मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने ऋषिकेश से यात्रियों को रवाना कर यात्रा का शुभारंभ किया. यात्रियों की संख्या हर साल बढ़ रही है.

बीते साल 22 लाख श्रद्धालुओं ने चारों धाम के दर्शन किए. इनमें से दस लाख बद्रीनाथ पहुंचे थे. 28 और 29 अप्रैल को क्रमशः केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट खुलने से यात्रा पूरी तरह से शुरू हो गई है. केदारनाथ यात्रा के पहले दिन उमा भारती, अनिल अंबानी, अशोक लीलैंड के अधिकारी बी. खेतान, रेमंड के सीएमडी गौतम सिंघानिया और नीरा राडिया आदि ने पहुंचकर केदारनाथ के दर्शन किए. नीरा राडिया तो तीन दिनों तक कव्दारनाथ में ही डेरा जमाए रहीं.

तीन हजार से ज्‍यादा यात्रियों ने पहले दिन केदारनाथ और करीब बाईस हजार यात्रियों ने बद्रीनाथ के दर्शन किए. पर सभी श्रद्धालु इतने खुशकिस्मत नहीं थे. पहले ही दिन चार यात्रियों की शीतलहर और बर्फबारी की चपेट में आने से मौत हो गई. अब प्रशासन की कोशिश है कि 60 साल से ज्‍यादा के बुजुर्ग भी गौरीकुंड तक ही जाएं.

सेना की मेडिकल टीम केदारनाथ, गौरीकुंड और रामबाड़ा में और आइटीबीपी की टीम केदारनाथ और गौरीकुंड में बीमार यात्रियों का परीक्षण कर रही हैं. सेना ने रिलीफ  सेंटर भी लगाए हैं. रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी नीरज खैरवाल के मुताबिक, अभी तक करीब 500 लोगों को स्वास्थ्य कारणों से गौरीकुंड से आगे जाने से रोका गया है. बद्रीनाथ और केदारनाथ के साथ ही इस बार गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा भी रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है. यहां इस दौरान तापमान अधिकतम 20 और न्यूनतम करीब 5 डिग्री तक बना हुआ है.

यात्रा शुरू होने के बाद से ही केदारनाथ धाम में खराब मौसम व बर्फबारी लगातार जारी है. इससे हेलीकॉप्टरों से वहां पहुंचने की चाहत रखने वालों को निराश होना पड़ा है. केदारनाथ की हेलीकॉप्टर से यात्रा कराने वाले निजी कंपनियों के विमान भी घाटे में खड़े हैं. बद्रीनाथ में मोबाइल भी केवल बीएसएनएल का काम कर रहा है.

चारधाम यात्रा को लेकर सरकार के लचर रवैये से निजी वाहन मालिक खासे नाराज हैं. बाहर से यात्रा पर आ रही बसों पर रोक लगाने की मांग को लेकर स्थानीय वाहन मालिक एकजुट हो गए हैं.

संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति ने बाहरी बसों पर रोक नहीं लगने तक अपनी नौ कपंनियों की बसों को यात्रा पर न भेजने का ऐलान कर दिया है. गढ़वाल मंडल टैक्सी एसोसिएशन भी इस आंदोलन के साथ हो गई है. वाहन चालकों की इस हड़ताल से यात्रियों के आने वाले दिन मुश्किलों से भरे हो सकते हैं.

चारधाम यात्रा के शुरुआती चार दिनों में घटी घटनाओं और लचर व्यवस्थाओं के बाद अब सरकार की नींद खुली है. यात्रियों को आ रही दिक्कतों के चलते मुख्यमंत्री ने एक तीन सदस्यीय निगरानी प्रकोष्ठ बनाया है. मुख्यमंत्री के सचिव एसएस संधू इसके प्रभारी हैं. सरकार ने मौसम की जानकारी लेने के लिए एक मौसम विंग का गठन भी किया है. बद्रीनाथ के दर्शनों के लिए पहली बार टोकन व्यवस्था की गई है. अब यात्री को लंबी लाइन में लगने के बजाए यह पता है कि दर्शन कितने बजे होंगे.

चारधाम यात्रा की खराब हालत पर भाजपा नेता भी तंज कस रहे हैं. चारधाम विकास परिषद के पूर्व अध्यक्ष सूरत राम नौटियाल का कहना है कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की मौत से जाहिर है कि सरकार का ध्यान यात्रा पर नहीं है. यात्रा मार्गों की हालत खराब है. यात्रा मार्ग में बिजली और पीने का पानी तक नहीं है.

वहीं भाजपा के युवा नेता अजेंद्र अजय ने चारधाम यात्रा पर लगी निजी विमान कंपनियों से किराया कम करवाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है. उनका कहना है कि वैष्णो देवी में विमानन कंपनियां प्रति यात्री लगभग 2,000 रु. लेती हैं जबकि यहां विमानन कंपनियां केदारनाथ आने- जाने का 7,000 रु. से ज्‍यादा लेती हैं.

राज्‍य में सत्ता परिवर्तन का असर चारधाम यात्रा पर भी दिख रहा है. भाजपा सरकार के समय गठित चारधाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष सूरतराम नौटियाल ने सरकार के जाते ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया. पूरे चार साल काम करने के बाद इस समय जब परिषद की जरूरत थी उसी समय वह वजूद में नहीं है.

कांग्रेस सरकार की ओर अभी तक परिषद के गठन की कोई पहल नहीं की गई है. परिषद के अलावा चारों धाम से समन्वय स्थापित करने का राज्‍य सरकार के पास कोई तंत्र नहीं है. क्योंकि चार धामों में से दो बद्री और कव्दार की एक मंदिर समिति है जबकि गंगोत्री और यमुनोत्री की अलग. चार धाम की यात्रा पर जाने वाले यात्री इससे कहीं बेहतर बर्ताव के हकदार हैं.

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