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तीन पर्यावरण प्रेमियों के सूत्र

ग्रीन आर्गेनिक क्लोदिंग प्राइवेट लिमिटेड को ग्लोबल आर्गेनिक टेक्सलाइल स्टैंडर्ड का सर्टिफिकेट मिला है. इसके अलावा कई कंपनियों ने ''फेयर ट्रेड सर्टिफिकेट" भी दिया है. अजमेर के मेयो कॉलेज के साथ देश के सभी बड़े बोर्डिंग स्कूलों के प्रशासन ने दुर्गंध से मुक्त मोजों की सार्वजनिक तौर पर प्रशंसा की है

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aajtak.in
आशीष मिश्र नई दिल्ली, 08 December 2017
तीन पर्यावरण प्रेमियों के सूत्र आदित्य सिंह , आनंद सिंह, सौरभ मिश्र

वर्ष 2006 में नोएडा के एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज से इंजीनियरिंग करने के बाद बिजनौर जिले के आदित्य सिंह और पटना के आनंद सिंह बेंगलूरू में ''एक्सेंचर" और कन्नौज के रहने वाले सौरभ मिश्र ''इन्फोसिस" में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर नौकरी करने लगे थे. उस वक्त तक तीनों एक-दूसरे को जानते तक न थे. ये सभी हमउम्र तो थे ही लेकिन तीनों में पर्यावरण संरक्षण का जुनून एक जैसा था.

पढ़ाई के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में तीनों लगातार बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे. ऐसे ही कार्यक्रमों के जरिए आदित्य, आनंद और सौरभ एक-दूसरे के अच्छे दोस्त बन गए. वही वह समय था जब महाराष्ट्र के विदर्भ में कपास की खेती करने वाले किसानों की आत्महत्या के आंकड़े भी बढ़ रहे थे. ये घटनाएं तीनों को परेशान कर रही थीं.

तीनों ने मिलकर गहराई से पड़ताल की तो पता चला कि खुदकुशी करने वाले किसान छोटी जोत के थे. उपज बढ़ाने के लिए कीटनाशकों और उर्वरकों का अधिक से अधिक प्रयोग करने से किसान कर्ज के बोझ तले दबते चले गए और इज्जत-आबरू के चक्कर में जान दे बैठते. दूसरी ओर विदर्भ में ही कुछ किसान  पूरी तरह जैविक खेती के जरिए कपास की पैदावार का निर्यात करके अपनी आय बढ़ा रहे थे.

आदित्य, आनंद और सौरभ ने सोचा कि क्यों न विदर्भ के ऑर्गेनिक कॉटन या जैविक कपास के किसानों के लिए देश में ही बाजार बनाया जाए. उसके बाद तीनों ने नौकरी छोड़ दी और अप्रैल, 2012 में ग्रीन ऑर्गेनिक क्लॉदिं प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई, जिसका दफ्तर उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद जिले के वैशाली में खोला गया. यह देश में जैविक कपास से बने कपड़ों की पहली कंपनी थी.

सौरभ बताते हैं, ''दुनिया भर में भारत में सबसे ज्यादा ऑर्गेनिक कॉटन की पैदावार होती है लेकिन पूरा माल दूसरे देशों में भेज दिया जाता है. जब हम अच्छा उगा सकते हैं तो अच्छा पहन क्यों नहीं सकते." इसी सोच को सामने रखकर तीनों दोस्तों ने कॉर्पोरेट, शिक्षा, आतिथ्य (हॉस्पिटेलिटी), रिटेल क्षेत्रों में ऑर्गेनिक कॉटन से बने कपड़ों का बाजार तलाशना शुरू किया. शुरुआत कॉर्पोरेट सेक्टर से की गई.

आदित्य बताते हैं, ''हमें यह पता था कि कई कॉर्पोरेट कंपनियां खास मौकों पर अपने कर्मचारियों को तरह-तरह के तोहफे भी देती हैं जिनमें टी-शर्ट या शर्ट वगैरह भी शामिल हैं." सो दो दर्जन से अधिक कंपनियों से संपर्क किया गया लेकिन सफलता एक वर्ष बाद जुलाई, 2013 में मिली. इंडिगो एयरलाइंस ने सातवीं वर्षगांठ के लिए ''ग्रीन ऑर्गेनिक क्लोदिंग प्राइवेट लिमिटेड" को जैविक कपास की बनी 7,700 टी-शर्ट का ऑर्डर दिया.

उस वक्त कोलकाता की राजलक्ष्मी कॉटन मिल देश में ऑर्गेनिक कॉटन से बने कपड़ों की सबसे बड़ी निर्यातक कंपनी थी. कई दौर की बातचीत के बाद आदित्य, आनंद और सौरभ राजलक्ष्मी कॉटन मिल के मालिक रजत जयपुरिया को देश में ही आपूर्ति करने के लिए एक ही तरह की डिजाइन वाली 7,700 टी-शर्ट बनाने के लिए राजी कर पाए. रजत जयपुरिया ने कोलकाता के जंगलपुर इंडस्ट्रियल एरिया में अपनी फैक्टरी में ऑर्गेनिक कॉटन से एक ही डिजाइन वाली टी-शर्ट बनाने का काम शुरू किया.

इसी समय ब्रान्ड ''आइ एम ग्रीनी" लॉन्च किया गया. रिकॉर्ड तीन हक्रते के भीतर इंडिगो को टी-शर्ट सप्लाई कर दी गई. इसके बाद राजलक्ष्मी कॉटन मिल उनकी सहयोगी बन गई. यह टर्निंग पॉइंट था. इसके बाद ''ग्रीन ऑर्गेनिक क्लोदिंग प्राइवेट लिमिटेड" को गूगल, वेल्स फार्गो बैंक, कैनन जैसी कंपनियों के ऑर्डर मिले.

इन तीन दोस्तों की कंपनी को सबसे ज्यादा चुनौती कोका कोला से मिली. कोका कोला अपने साथ सिर्फ उन्हीं वेंडर को जोड़ता है जो विश्व स्तरीय ''सप्लायर गाइडलाइंस प्रिंसिपल" (एसजीपी) के मानकों पर खरे उतरते हैं. एसजीपी के मानकों के लिए राजलक्ष्मी कॉटन मिल ने फैक्टरी में सुरक्षा और गुणवत्ता के लिहाज से कई बदलाव किए. एक वर्ष बाद ''ग्रीन ऑर्गेनिक क्लोदिंग प्राइवेट लिमिटेड" एसजीपी के मानक पूरा करने वाली देश की पहली कंपनी बनी. यह कोका कोला को ऑर्गेनिक कॉटन के कपड़े सप्लाई करने वाली दुनिया की पहली कंपनी भी बनी.

कॉर्पोरेट सेक्टर में धाक जमाने के बाद 2014 में आदित्य, आनंद और सौरभ ने शिक्षा के क्षेत्र में प्रविष्ठि की योजना बनाई. आनंद बताते हैं, ''हमें पता चला कि बांस के रेशे से बने धागे कीटाणुओं को नष्ट कर देते हैं. चीन की एक कंपनी से बांस के रेशे से बने धागे खरीदकर विश्वप्रसिद्ध ब्रान्ड के लिए मोजे बनाने वाली गुजरात की एक कंपनी से मोजे बनवाए." आदित्य, आनंद और सौरभ ने पूरे तीन महीने तक इन मोजों को पहना और पाया कि गंदा होने के बावजूद उनसे जरा भी बदबू नहीं आ रही.

इन खास मोजों के लिए ''स्मेल फ्री" ब्रान्ड लॉन्च किया गया. इसके लिए बाजार खोजने के क्रम में सबसे पहले अजमेर के मेयो कॉलेज में संपर्क किया गया. यह कॉलेज हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के मोजों से आने वाली बदबू से परेशान था. मेयो कॉलेज ने फौरन एक हजार स्मेल फ्री मोजे का ऑर्डर दे दिया. आज हर महीने 30,000 जोड़े मोजे देश के सभी बड़े बोर्डिंग स्कूल में भेजे जा रहे हैं. इन नतीजों से प्रोत्साहित होकर अब स्कूली छात्रों के लिए बांस के धागे से बनी टी-शर्ट और शर्ट की सप्लाई करने की तैयारी है.

मोजों की सफलता के बाद पंजाब की एक फैक्टरी से समझौता करके देश में पहली बार बांस के धागे से बने तौलियों को बाजार में उतारा गया. यह आम तौलिया से पतला होने के बावजूद उनसे कहीं ज्यादा पानी सोखता था. इन खूबियों के कारणग्रीन ऑर्गेनिक क्लोदिंग प्राइवेट लिमिटेड स्पा के क्षेत्र में विश्व के सबसे बड़े ब्रान्ड सिक्स सेंसेज को बांस का तौलिया सप्लाई करने वाली विश्व की अकेली कंपनी बन गई.

 एक नया ब्रान्ड ''मामाज टच" भी लॉन्च किया गया और बच्चों के लिए छोटी तौलिया बनाना शुरू किया गया. व्यापार बढऩे के बाद नोएडा, गाजियाबाद में मौजूद फैक्टरियों से ऑर्गेनिक कॉटन के कपड़े बनाना शुरू किया गया. पिछले वर्ष से ग्रीन ऑर्गेनिक क्लोदिंग प्राइवेट लिमिटेड रिटेल के क्षेत्र में भी उतरी है. देश में मौजूद सभी ऑनलाइन कंपनियां इस वक्त उसके ब्रान्ड बेच रही हैं. अब अगला लक्ष्य एक वर्ष के भीतर दुनिया के हर कोने में ऑर्गेनिक कॉटन और बांस के रेशे से बने कपड़ों को पहुंचाने का है जिसके लिए आदित्य, आनंद और सौरभ की तिकड़ी जुट चुकी है. नोएडा की फैक्टरी में हर जगह लिखा स्लोगन ''सच्ची जीत सभी को साथ लेकर चलने में है" इन तीन पर्यावरणवादियों की मंशा जाहिर करता है.—आशीष मिश्र

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