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इंडिया टुडे कॉन्क्लेव-संघ के उपदेश

भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण रहे दो क्षेत्रों—जम्मू और कश्मीर तथा पूर्वोत्तर में—पार्टी के प्रभारी भी हैं. राम माधव और कृष्ण गोपाल, दोनों ने सामाजिक, रणनीतिक और चुनावी मुद्दों पर संघ परिवार की नीतियों को लेकर दृष्टि साझा की.

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aajtak.in
इंडिया टुडे टीमनई दिल्ली, 14 March 2019
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव-संघ के उपदेश राम माधव, बीजेपी राष्ट्रीय महासचिव

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2019

'कश्मीर में यह पहले हो जाना चाहिए था'

राम माधव, बीजेपी राष्ट्रीय महासचिव

'मां भारती—आरएसएस का विचार्य

कृष्ण गोपाल, आरएसएस संयुक्त महासचिव

उनके राजनैतिक करियर की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की शाखाओं से हुई. दोनों ही फिलहाल 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी की चुनावी रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा रहे हैं. आरएसएस के संयुक्त महासचिव कृष्ण गोपाल, भाजपा और आरएसएस के बीच समन्वय सेतु की भूमिका भी निभाते हैं. उनके सहयोगी राम माधव आधिकारिक रूप से आरएसएस से भाजपा में प्रवेश पा चुके हैं और अब पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं.

वे भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण रहे दो क्षेत्रों—जम्मू और कश्मीर तथा पूर्वोत्तर में—पार्टी के प्रभारी भी हैं. राम माधव और कृष्ण गोपाल, दोनों ने सामाजिक, रणनीतिक और चुनावी मुद्दों पर संघ परिवार की नीतियों को लेकर दृष्टि साझा की.

खास बातें

राम माधव

''हमने पहले नियंत्रण रेखा पार की और फिर अंतरराष्ट्रीय सीमा भी. अगर पाकिस्तान अब भी रास्ते पर नहीं आता है, तो हम तीसरा कदम उठाएंगे'' माधव ने ऐसा कहते हुए यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई का समय और प्रकृति सशस्त्र बल ही तय करेंगे.

माधव का कहना है कि जवाहरलाल नेहरू ने संविधान में अनुच्छेद 370 को एक अस्थायी प्रावधान के रूप में जोड़ा था. उन्होंने कहा कि भाजपा धारा 370 को जारी रखने के खिलाफ है क्योंकि यह ''अलगाववादी मानसिकता के लिए खुराक का काम करती है.''

''कश्मीर के बारे में कोई भी राय कायम करते समय, आपको आम कश्मीरी और नेतृत्व के बीच अंतर करना चाहिए.''

कृष्ण गोपाल

गोपाल के अनुसार, आरएसएस किसी भी भाजपा नीत सरकार के कामकाज में कोई हस्तक्षेप नहीं करता. उन्होंने कहा, ''आरएसएस के स्वयंसेवक सरकार सहित विभिन्न संगठनों में काम करते हैं.''

प्रधानमंत्री, आरएसएस के एक स्वयंसेवक हैं और हमसे उन विषयों पर सलाह लेते हैं जो उन्हें उपयुक्त लगते हैं.

उन्होंने कहा कि वे आरएसएस-भाजपा के संयोजक नहीं हैं.

गोपाल ने कहा कि मुसलमान जब तक भारत की परंपराओं का सम्मान करते रहेंगे, तब तक आरएसएस की उनसे कोई शत्रुता नहीं रहेगी.

''जनता समझती है कि इस देश में कौन सही दृष्टिकोण रखता है जिससे समाज अनुशासित होगा. जनता सही निर्णय करेगी.''

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