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इंडिया टुडे कॉनक्लेवः भविष्य के नेटवर्क

हम बहुत ऊर्जा इस बात में लगा रहे हैं कि हम किस प्रकार अपने उपयोगकर्ताओं को उनके डेटा पर अधिक नियंत्रण प्रदान कर सकते हैं.

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aajtak.in
संध्या द्विवेदी नई दिल्ली, 11 March 2019
इंडिया टुडे कॉनक्लेवः भविष्य के नेटवर्क यासिर इकबाल

लगभग हर व्यक्ति इन दिनों सोशल मीडिया पर है, वास्तविक समय में सूचनाओं का प्रसार कर रहा है. लेकिन इसके कारण कई तरह की चुनौतियां सामने आ खड़ी हुई हैं, जिसमें गोपनीयता का अधिकार और झूठी खबरों का बड़ा खतरा भी शामिल है. फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट उपयोगकर्ताओं और साथ ही अधिकारियों द्वारा दुर्व्यवहार और फर्जी सामग्री पर लगाम लगाने के भारी गुस्से का सामना कर रही हैं.

जब हम एक ऐसे डिजिटल समाज की ओर बढ़ रहे हैं, जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) और संवर्धित वास्तविकता जैसी अवधारणाएं नई नहीं हैं. भारत एक डिजिटल सोसाइटी के रूप में दुनिया के सामने खुद को कहां पाता है? सोशल मीडिया को अधिक सक्वमानजनक बातचीत का मंच बनाने के सामने क्या चुनौतियां हैं? फेसबुक के भारत प्रमुख अजित मोहन ने इन सब चिं ताओं पर अपना पक्ष रखने का प्रयास किया.

खास बातें

मोहन कहते हैं कि फेसबुक को महिलाओं के लिए एक ऐसा सुरक्षित स्थान बनाना जहां वे उन समुदायों के साथ खुलकर बातचीत कर सकें जिनमें उनकी दिलचस्पी है, सर्वोच्च प्राथमिकता है. प्रोफाइल पिक्चर को लॉक करने का विकल्प इसी दिशा में किया गया प्रयास है.

एआइ का इस्तेमाल सामाजिक लाभ के लिए करने के मुद्दे पर मोहन ने कहा कि एफबी अपने सर्वश्रेष्ठ एआइ संसाधनों को भारत में लेकर आया है और यह देखने का प्रयास होगा कि क्या इसे देश की कुछ जटिल समस्याओं को ठीक करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

मोहन ने महसूस किया कि यह सुनिश्चित करने में माता-पिता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है कि उनके बच्चे इंटरनेट पर किस प्रकार जुड़े हैं. ‘‘हम निरंतर इस बात के प्रयास कर रहे हैं कि ऐसे उत्पाद बनाए जाएं जिसमें बच्चों को आनंद के साथ सीखने के अवसर भी मिले, साथ ही यह भी सुनिश्चित करते हैं कि माता-पिता का नियंत्रण हो और वे अपने बच्चों के लिए इसे एक सुरक्षित स्थान बना सकें.’’ उन्होंने इसके लिए ‘मैसेंजर फॉर किड्स’ का उदाहरण दिया. यह फीचर माता-पिता को अपने बच्चों के करीबी लोगों का एक क्लोज्ड लूप निर्धारित करने की अनुमति देता है जिससे उनके बच्चे जुड़ सकते हैं.

मोहन का मानना है कि किस तरह के इंटरनेट का निर्माण होना चाहिए, उसे तय करने में समाज की भूमिका होनी चाहिए. उन्होंने महसूस किया कि निजी संस्थानों, नागरिक समाज और सरकार द्वारा मिलकर इसका सह-निर्माण किया जाना चाहिए.

मोहन ने कहा कि सोशल नेटवर्किंग स्पेस में लगातार अच्छे और बुरे के बीच संघर्ष दिखता है. एक लड़ाई लगातार यह सुनिश्चित करने के लिए होती है कि एफबी ने जो नेटवर्क बनाए हैं वे अच्छी चीजों से भरे हैं और आर्थिलक तथा सामाजिक अवसरों को बढ़ावा देते हैं.

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