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नई संस्कृति, नए नायकः खुशियों का पयम्बर

रेडियो और सोशल मीडिया के जरिए नवेद दुनियाभर में खुशियां बिखेर रहे हैं, और दुनिया ने तजुर्बे के तौर पर उन्हें जो दिया है, उसे खूबसूरती से बांट रहे

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aajtak.in
मोहम्मद वक़ासनई दिल्ली, 03 December 2019
नई संस्कृति, नए नायकः खुशियों का पयम्बर फोटो साभारः इंडिया टुडे

नावेद खान 43 वर्ष, रेडियो जॉकी (दिल्ली)

जब हमैं इस बात को एहसास हुओ कि जब जहाज डूब रओ है तो सारे मर रहे हैं, वा में फट्टो रखो है एक. अब फट्टो के पा लियोनार्डो दि कैप्रियो, हमाओ लौंडो अर केट विंसलेट वा छपरिया. जे कौन-सौ संविधान में लिखो थो कि जब टाइटैनिक डूब रओ है तो फट्टो पै छपरिया छपाक सै बैठ जावै...'' भारी और गडग़ड़ाती आवाज में टाइटैनिक की दास्तान को अपने अंदाज में सुनाता एक शख्स, जिसे सुनकर दिल्ली-एनसीआर के लोग लोटपोट हो जाते हैं.

उसे लगता है कि अगर फट्टे और होते तो उसका 'लौंडा कैप्रियो' बच गया होता. रेडियो मिर्ची पर बरसों पहले शुरू हुए इस शो का कैप्रियो अब जैक बन गया है और विंसलेट छपरिया. आरजे नवेद का शो फट्टो अब भी अपने भदेस अंदाज में लोगों को उतना ही हंसाता है. लेकिन इससे भी ज्यादा लोकप्रिय है मिर्ची मुर्गा. इसके कई एपिसोड वायरल हुए हैं. इनमें से कई एपिसोड में गंभीर सामाजिक संदेश होते हैं, जो खुद नवेद के अपने अनुभवों से उभरते हैं.

हरियाणा के फरीदाबाद में 7 जुलाई 1976 को मकसूद अहमद खान और जमाल फातिमा के घर जन्मे नवेद की दो छोटी बहनें हैं—सादिया और सारा. मूलत: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के बुगरासी गांव के रहने वाले मकसूद फरीदाबाद की आयशर कंपनी में काम करते थे. नवेद ने फरीदाबाद में आठवीं तक और फिर दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया में नौवीं से ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की. 1999 में बीबीए करने के बाद नौकरी की तलाश शुरू हुई. इस सिलसिले में यूएई और कतर में एक साल काम किया. वे दिल्ली में सबसे पहली नौकरी के बारे में बताते हैं, ''मैंने परदा लगाने वाली कंपनी की ओर से घर-घर जाकर रॉड और परदा लगाया.''

पश्चिम एशिया से लौटने के बाद एयरटेल के कॉल सेंटर में करीब तीन साल तक कस्टमर केयर एजेंट की हैसियत से काम किया. फिर 2004 में रेडियो मिर्ची का आरजे हंट शुरू हुआ. नवेद बताते हैं, ''तब मुझे यह भी नहीं मालूम था कि रेडियो जॉकी क्या होता है, शो क्या चीज होती है.'' कई राउंड में चले इस टेस्ट में हजारों प्रत्याशियों ने हिस्सा लिया और नवेद चुन लिए गए.

रेडियो मिर्ची में उन्हें ओबी जॉकी का काम मिला. उन्होंने सात महीने में ही अपनी काबिलियत का परिचय दे दिया और उन्हें रात का स्लॉट मिला डॉ. लव पेश करने के लिए. नवेद हंसते हुए बताते हैं, ''मुझे प्यार-मोहब्बत का कतई तजुर्बा नहीं था और न ही किसी को मुझसे लव हुआ पर मैं लोगों को बताया करता था कि प्यार कैसे करें.'' तीन साल तक टोटल फिल्मी में नई फिल्मों की समीक्षा की और यहीं से फट्टो निकला. वे कहते हैं, ''मेरी अंग्रेजी बिल्कुल अच्छी नहीं है, समझ में नहीं आती. टाइटैनिक मूवी रिलीज हुई थी और मैंने हरियाणा, यूपी की लैंग्वेज मिलाकर अपनी तरह का शो बना दिया, जिसमें मंगल बाजार लगा दिया, खाने के बाद गुड़ खिलाया...'' टाइटैनिक को दिल्ली की यमुना तक ले आए!

फिर उन्हें प्रमोट करके शाम को प्राइमटाइम शो दे दिया गया. यह उनके करियर का सबसे लंबा शो है, जिसे उन्होंने आठ साल किया. उस शो का नाम सनसेट समोसा हुआ करता था लेकिन इसी में मिर्ची मुर्गा पैदा हुआ, जो पहले हफ्ते में एक रोज, फिर तीन और अब दिन में कई बार आता है. यह प्रोग्राम इतना मकबूल हुआ कि शो का असली नाम पीछे रह गया और नवेद को 'दिल्ली का डॉन' कहा जाने लगा. वे बताते हैं, ''मिर्ची मुर्गा इतना चला कि (मिर्ची के) तकरीबन 38 केंद्रों से इसका प्रसारण शुरू हो गया.'' आज मुर्गा बनाने के लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम और फोन के जरिए 10-15,000 रिक्वेस्ट रोज आते हैं.

नवेद ने शोहरत के उरूज पर जाकर 2016 में रेडियो मिर्ची से तीन साल की छुट्टी ली और मुंबई में कपिल शर्मा के शो में काम करने लगे. वहां सोशल मीडिया के लिए काम किया लेकिन आखिरकार फिर अपनी जगह लौट आए और अब द नवेद खान शो कर रहे हैं. नई दिल्ली में अपनी शरीक-ए-हयात शाइस्ता खान, बेटे रबी रहमान खान, बेटी ज़ोया खान और वालदैन के साथ रह रहे नवेद हमेशा लोगों से बात करते रहते हैं, लेकिन कुछ घंटे अकेले में रहना पसंद करते हैं. तब उनके घर वाले भी उनके पास नहीं जाते, मानो सारे आइडियाज को तरतीब से जेहन में सजा रहे हों.

रेडियो और सोशल मीडिया के जरिए नवेद दुनियाभर में खुशियां बिखेर रहे हैं, और दुनिया ने तजुर्बे के तौर पर उन्हें जो दिया है, उसे खूबसूरती से बांट रहे हैं.

संघर्ष

खुशकिस्मत हूं कि स्ट्रगल कर रहा हूं

टर्निंग पॉइंट

तीन साल पहले मॉर्निंग शो में सोशल कॉज उठाना, ह्यूमरस रहते हुए थोड़ा संजीदा होना

उपलब्धि

बच्चों से लेकर जईफों तक में एक जैसी मकबूलियत

सफलता के सूत्र

आप बिल्कुल नैचुरल रहें, जो हैं वही

लोकप्रियता के कारक

किस्मत, अवसर, गाइडेंस, मेहनत

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