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लखनऊ: ऊंची होती नवाबी नगरी

नव धनाढ्य वर्ग को हजरतगंज के भीड़भाड़ वाले इलाकों की तुलना में महानगरों की तरह बड़ी बाल्कनी वाली ऊंची इमारतें ज्यादा लुभा रहीं.

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आशीष मिश्रलखनऊ, 12 March 2013
लखनऊ: ऊंची होती नवाबी नगरी राजधानी लखनऊ

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, जो कभी इस्लामी स्थापत्य और मीनारों के शहर के रूप में विख्यात थी, अब रिहाइश के नए तौर-तरीकों को तेजी से अपना रही है. सैकड़ों एकड़ में फैलीं उत्तर मुगलकाल की पुरातात्विक इमारतों के लिए मशहूर इस शहर में अब इमारतों के झुंड आसमान की ओर बढऩे की होड़ करते दिखते हैं.

लखनऊ के पूर्व में बसे पॉश गोमती नगर इलाके के विभूति खंड में पहुंचते ही इस बात का अंदाजा हो जाता है कि शहर में अब ऊंची बहुमंजिला इमारतें लोगों के रहने की पसंदीदा जगह हैं. लखनऊ की सर्वाधिक इमारतें इसी इलाके में खड़ी दिखती हैं. हालांकि ये आवासीय इमारतें अधिकतम 14 मंजिला हैं क्योंकि लखनऊ विकास प्राधिकरण के मास्टर प्लान में फिलहाल इससे ऊंची रिहाइशी इमारतों को जगह नहीं दी गई है.

विभूति खंड में ओमेक्स, पार्श्वनाथ समेत कई अन्य बिल्डरों के प्रोजेक्ट मौजूद हैं. एल्डिको हाउसिंग ऐंड इंडस्ट्रीज रियल एस्टेट प्रोजेक्ट एलिगेंस 2007 में शुरू हुआ और दो वर्ष पहले बनकर तैयार हो गया. लखनऊ की यह सबसे ऊंची 14 मंजिला रिहाइशी बिल्डिंग है, जिसके सभी 350 फ्लैट बिक चुके हैं. आठ टावरों वाली इस हाउसिंग सोसायटी की खासियत इसकी इमारतों का न केवल भूकंपरोधी होना है, बल्कि इनमें आग से बचाव के भी खासे प्रबंध किए गए हैं. एल्डिको हाउसिंग ऐंड इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक एस.के. गर्ग कहते हैं, ''अपनी अन्य हाउसिंग स्कीमों की तरह मैंने एलीगेंस में भी फायर, पर्यावरण, लखनऊ विकास प्राधिकरण समेत अन्य सभी जरूरी विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया. इससे लोगों को भविष्य में किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं होगी.”

एलीगेंस में मौजूद फ्लैट्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये हवादार हों और इनमें प्रकाश सही से पहुंचता हो. इसके अलावा 40,000 वर्ग फुट वाली इस हाउसिंग सोसायटी में पर्यावरण का ध्यान रखते हुए 60 फीसदी हिस्से में हरित पट्टी डेवलप की गई है. यहां सोसायटी के भीतर क्लब, जिम, स्विमिंग पूल और चौबीस घंटे पावर बैकअप की सुविधाएं हैं.

45 वर्षीया किरनजीत कौर, जो इंग्लिश स्पीकिंग सेंटर चलाती हैं, ने एक महीने पहले ही एलीगेंस में एक फ्लैट खरीदा है, हालांकि किरनजीत का पुश्तैनी मकान लखनऊ के पुराने इलाके आलमबाग में है. वे कहती हैं, ''मेरा पुश्तैनी मकान काफी बड़ा है, लेकिन फ्लैट में रहने की अपनी सहूलियतें हैं. सुरक्षा, मेंटेनेंस और सबसे खास बात है कि हाउसिंग सोसायटी में हर उम्र के लोगों को एक बढिय़ा कंपनी मिल जाती है, जो मुहल्लों व अन्य पुरानी कॉलोनियों में नहीं मिलती.”

किरनजीत जैसे हजारों लोग अब लखनऊ में ऊंची रिहाइशी इमारतों में अपना आशियाना बना चुके हैं. फैजाबाद रोड से नजदीकी के चलते गोमती नगर का विभूति खंड इलाका सबसे पहले ऊंची रियल एस्टेट हाउसिंग योजनाओं का ठिकाना बना. इस इलाके में अगले एक साल के भीतर आधा दर्जन नए हाउसिंग प्रोजेक्ट बनकर तैयार हो जाएंगे, जो 2,500 परिवारों को आशियाना मुहैया कराएंगे. यही नहीं, शहर के बाहरी किनारे से होकर गुजरने वाले 20 किलोमीटर लंबे शहीद पथ, सुल्तानपुर रोड पर बनने वाली आइटी सिटी के आसपास रायबरेली रोड और सीतापुर रोड वे इलाके हैं, अंसल, यूनीटेक, जहां ओमेक्स, पार्श्वनाथ, एसएएस, रोहतास जैसी हाउसिंग कंपनियों ने अपने प्रोजेक्ट शुरू कर दिए हैं.

औसतन इन प्रोजेक्ट्स में 1,100 वर्ग फुट के दो बेडरूम वाले फ्लैट 33 लाख रु., 3 बेडरूम वाले फ्लैट 40 लाख और 4 बेडरूम वाले फ्लैट 50 लाख रु. में उपलब्ध हैं. लखनऊ के एक बिल्डर मनीष शुक्ल बताते हैं कि 2006 में छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने से एक ओर सरकारी कर्मचारियों के वेतन में इजाफा हुआ तो दूसरी ओर होटल, मोबाइल, कॉल सेंटर, बीमा और बैंक जैसे सेक्टर की निजी कंपनियों ने बड़ी संख्या में लखनऊ में अपने ऑफिस खोले. इससे शहर में नए मध्यम वर्ग का उदय हुआ. वे कहते हैं, ''लखनऊ में अचानक लोगों के पास पैसा आने से रियल एस्टेट का बाजार भी बढ़ा. चूंकि संपन्न वर्ग के लोग अपने ऑफिस के पास ही रहना चाहते हैं. ऐसे में ऊंची रियल एस्टेट इमारतें इनकी पसंद हैं क्योंकि ये इमारतें न भीड़भाड़ वाले इलाके में हैं और न ही बहुत दूर.”

धनी लोगों की नई जमात ने लखनऊ में एक नए उपभोक्ता वर्ग को भी जन्म दिया है. इसी के चलते यहां लगातार नई देशी-विदेशी कंपनियां अपने दफ्तर खोल रही हैं. इन दफ्तरों को जगह मुहैया कराने के लिए कॉमर्शियल क्षेत्र में भी रियल एस्टेट इमारतें खड़ी हो रही हैं. गोमती नगर के विभूति खंड में 12 मंजिल वाली 'एल्डिको कॉमर्शियल चेंबर’ शहर की सबसे ऊंची व्यावसायिक रियल एस्टेट बिल्डिंग है. शीशे की बनी यह बिल्डिंग गत वर्ष जुलाई में बनकर तैयार हुई.

यहां की खासियत उच्चस्तरीय फायर फाइटिंग सिस्टम और सेंट्रल एयर कंडीशनिंग सिस्टम तो है ही, साथ में 400 से अधिक गाडिय़ों की क्षमता वाली अत्याधुनिक पार्किंग इस बिल्डिंग को एक 'इंटरनेशनल टच’ देती है. यहां दफ्तर खोलने वाले 'राधे कृष्ण ग्रुप’ के मार्केटिंग मैनेजर इमरान खान कहते हैं, ''बीच शहर में अब दफ्तर खोलने की जगह ही नहीं बची है. ऐसे में कॉमर्शियल ब्लॉक निजी कंपनियों की पसंद बन रहे हैं. यहां का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां 'विश्वस्तरीय माहौल’ मिलता है और मेंटेनेंस के लिए दौड़-भाग नहीं करनी पड़ती.”

लखनऊ के गोमती नगर, अलीगंज, आलमबाग जैसे इलाके अपनी व्यावसायिक गतिविधियों के कारण ही कॉमर्शियल रियल एस्टेट के केंद्र बनकर उभर रहे हैं. एसएएस ओमेक्स, पार्श्वनाथ, एल्डिको, जैसी कंपनियों ने यहां कॉमर्शियल ब्लॉकों का निर्माण करवाया है.

सीतापुर रोड, रायबरेली और सुल्तानपुर रोड जैसे बाहरी इलाकों में भी कंपनियों ने कॉमर्शियल रियल एस्टेट के लिए जमीन खरीदी है. लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष राजीव अग्रवाल कहते हैं, ''ऊंची रियल एस्टेट इमारतें जरूरी हैं. प्राधिकरण बिल्डरों को हर संभव सहायता मुहैया करा रहा है.”

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