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जबलपुर: हाइराइज का बढ़ता कल्चर

जबलपुर में हाइराइज इमारतों और फ्लैट सिस्टम की लोकप्रियता बढऩे की वजह है महंगी जमीन और सुरक्षा को लेकर बढ़ती जागरूकता.

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रजनीश शुक्लजबलपुर, 12 March 2013
जबलपुर: हाइराइज का बढ़ता कल्चर हाइराइज इमारत

जमीन की महंगी कीमत और सुरक्षा की बढ़ती जरूरत ने जबलपुर में फ्लैट सिस्टम को लोकप्रिय बना दिया है. लोगों के बदलते रुझान की वजह से यहां हाइराइज बिल्डिंगों का कल्चर भी पनप रहा है. इसीलिए जब रेलवे सेवा से सेवानिवृत्त हुए देवीदास पटेल ने अपना आशियाना बनाने की बात सोची तो उनकी पसंद फ्लैट ही बना. पटेल बताते हैं, ''मैंने ढेर सारे मकान देखे. शहर से 12 किलोमीटर दूर एक प्लॉट भी खरीदा. लेकिन परिवार चाहता था कि मकान शहर में ही हो. इसलिए नर्मदा रोड स्थित कृष्णा हाइट्स में एक तीन कमरों का फ्लैट बुक करा दिया.” वे अपने फैसले की वजह बताते हैं, ''मैंने डुप्लेक्स इसलिए नहीं खरीदा क्योंकि उसमें परिवार एक साथ रह सकता है बल्कि फ्लैट में साथ रहना तो हो ही जाता है, सुरक्षा का अहसास भी रहता है.”

सोलह लाख की आबादी वाले इस शहर में धीरे-धीरे फ्लैट कल्चर विकसित हो रहा है. पिछले सात-आठ साल में ही यहां बहुमंजिला इमारतों की संख्या में अच्छी बढ़ोतरी हुई है. चूंकि शहर का एक बड़ा हिस्सा डिफेंस और छावनी में आता है इसलिए आबादी का अधिक दबाव मुख्य शहर में है. यहां फिलहाल ज्यादातर रिहाइशी इमारतें चार से पांच मंजिला ऊंची हैं. मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम 1984 के तहत इमारतों की अधिकतम ऊंचाई 53 मीटर निर्धारित थी. पिछले साल भूमि विकास नियम 2012 अस्तित्व में आया है, जिसके तहत हाइराइज बिल्डिंगों की ऊंचाई 90 मीटर कर दी गई है. नया नियम आने के बाद अब बिल्डर्स बड़ी संख्या में नए प्रोजेक्ट्स लेकर आ रहे हैं.

फिलहाल शहर में सबसे ऊंची रिहाइशी इमारत समदडिया बिल्डर्स और सेठी कंस्ट्रक्शंन का संयुक्त प्रोजेक्ट कृष्णा हाइट्स है. नर्मदा रोड पर बने इस प्रोजेक्ट में 21 मीटर ऊंचाई की पांच इमारतें बनी हैं. हरेक इमारत में ग्राउंड फ्लोर के अलावा सात मंजिलें हैं. ग्राउंड फ्लोर पूरी तरह पार्किंग के लिए आरक्षित है. इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि किसी भी फ्लैट की दीवार दूसरे फ्लैट से नहीं जुड़ी है.

कृष्णा हाइट्स की चारों इमारतों के बीच में एक खूबसूरत टेरेस गार्डन बनाया गया है. इसके अलावा इसमें स्विमिंग पूल, सामुदायिक भवन, जिम इत्यादि की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं. समदडिया बिल्डर्स के प्रोप्राइटर अजीत समदडिया कहते हैं, ''कृष्णा हाइट्स में फ्लैट बुक करवाने वाले ज्यादातर लोग बिजनेस और सर्विस क्लास से हैं.” वे फ्लैट को बढ़ावा मिलने की वजह बताते हैं, ''निजी मकान की अपेक्षा फ्लैट में बिजली और पानी का खर्च 30 प्रतिशत से भी कम आता है. इसके अलावा रख-रखाव का खर्च और जिम्मेदारी भी कम हो जाती है.”

बीच शहर में जमीन की कमी और उपलब्ध जमीन के बेतहाशा महंगी होने की वजह से ज्यादातर बिल्डर्स के प्रोजेक्ट शहर के बाहर ही हैं. जैसा कि समदडिया कहते हैं, ''शहर के बीच अब जमीन मिलती नहीं है, इसलिए नए प्रोजेक्ट शहर के बाहर ही आ रहे हैं. हमारा अब तक का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट मुस्कान गोल्ड जल्द ही पूरा हो जाएगा.

मुस्कान गोल्ड अंतरराष्ट्रीय बस टर्मिनल के पास बन रहा है और इसकी उंचाई 40 मीटर से भी ज्यादा होगी.” हाइराइज कमेटी के सदस्य-सचिव और टाउन ऐंड कंट्री प्लानिंग के संयुक्त निदेशक सी.के. साधव कहते हैं, ''अब तक जबलपुर में 30 मीटर और उससे कम उंचाई वाले भवन ही बन रहे थे.” शहर से छह किलोमीटर दूर फ्लैटों की कीमतें 1,700-1,800 प्रति वर्गफुट हैं जबकि शहर के बीचोबीच 2,300-2,400 रु. प्रति वर्ग फुट.

शहर में नर्मदा रोड, विजय नगर, शताब्दीपुरम, रांझी, तिलहरी, नेपियर टाउन, राइट टाउन, ग्वारीघाट, मदन महल आदि हाइराइज इमारतों के मुख्य केंद्र हैं. बिल्डर सुधीर दत्त कहते हैं, ''जबलपुर में सोसाइटी कल्चर विकसित हो रहा है लेकिन उसकी रफ्तार धीमी है.”

व्यावसायिक इमारतों में शहर के बीच सिविक सेंटर में बने मॉल को शहर की सबसे उंची इमारत का खिताब हासिल है. 30 मीटर ऊंचे इस मॉल में मनोरंजन की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं. इसमें शॉपिंग जोन के अलावा थिएटर, होटल, पब, बैंक्वेट हॉल, दुकानें, मनोरंजन जोन और फूड जोन भी हैं. बड़ी-बड़ी इमारतों में फ्लैट्स खरीदने के कुछ फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी. लोगों का मानना है कि महंगाई बढऩे के कारण रख-रखाव बहुत महंगा हो गया है. फ्लैट्स में रख-रखाव पर कम खर्च आता है. सबसे बड़ा फायदा सुरक्षा का है. लेकिन फ्लैट में क्षेत्रफल निश्चित होता है और उसे जरूरत के मुताबिक बढ़ाया नहीं जा सकता जबकि स्वतंत्र मकान में जरूरत के हिसाब से कमरे या मंजिलें बढ़ाने की गुंजाइश होती है.

शहर की जीवनरेखा नर्मदा नदी के पार नया शहर आबाद किया जाने वाला है. जमीन की किल्लत की वजह से हाइराइज इमारतें इस शहर में भी होंगी.

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