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हर चीज में बेस्ट होना चाहती थी

''मैं समझ सकती हूं कि आज के दौर में ऐक्टर को कितना दबाव झेलना पड़ता है क्योंकि आप पर लगातार नजर रखी जाती है, परखा जाता है. आप सोच भी नहीं सकते कि कोई चप्पलें पहन कर जहाज पर सवार होने जा रहा है (और लोग ध्यान न दें).'' रानी मुखर्जी

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aajtak.in
संध्या द्विवेदी/ मंजीत ठाकुर नई दिल्ली, 19 December 2017
हर चीज में बेस्ट होना चाहती थी अगली कतार में रानी और अनुष्का

रानी मुखर्जी और अनुष्का शर्मा को यश राज फिल्म्स और एक-दूसरे की तारीफ में खुलकर बोलने में ज्यादा देर नहीं लगी. दोनों इस प्रोडक्शन हाउस से जुड़ी रही हैं. रानी मुखर्जी की शादी यश राज फिल्म्स के मालिक और फिल्म निर्माता आदित्य चोपड़ा से हो चुकी है, जिन्होंने रब ने बना दी जोड़ी में अनुष्का को पहला मौका दिया था. लेकिन यश राज फिल्म्स के अलावा दोनों में कई दूसरी समानताएं भी हैं, मसलन दोनों को उनकी मां से पूरा सहयोग मिला, दोनों विनोदप्रिय हैं, दोनों स्वतंत्र विचारों की हैं. दोनों आत्मविश्वास से लबरेज हैं लेकिन उनमें दंभ नहीं

रानीः मैंने अपने शौहर (आदित्य चोपड़ा) से सुना है कि आप जब अभिनेत्री बनी थीं तो हिंदी फिल्में बहुत ज्यादा नहीं देखती थीं. आपने रब ने बना दी जोड़ी (2008) के लिए ऑडिशन दिया था और मुझे याद है, आपका ऑडिशन देखकर मैंने कहा था, ''माइ गॉड, इस लड़की में कितनी चमक है.'' मैं यह नहीं कहूंगी कि आप बला की खूबसूरत लगी थीं. लेकिन आपके काम में कुछ खास बात थी, आपकी पर्सनालिटी में कुछ था, जो उमंग से भरपूर और आकर्षक था.

अनुष्काः थैंक गॉड, आपने भी यह देखा.

रानीः आपने अभिनेत्री बनने का फैसला कैसे लिया?

अनुष्काः मुझे याद है, आपसे भी किसी को यह सवाल पूछते हुए सुना था कि क्या आप पढ़ाई में अच्छी थीं. और आपने कहा था कि हां थी. आपने यह भी कहा था कि आपको...

रानीः ...पढऩा बहुत अच्छा लगता था.

अनुष्काः आपको नंबर भी अच्छे मिलते थे. यह दूसरी बात है जो हम दोनों में कॉमन है. वैसे बचपन में मेरा कोई खास सपना नहीं था.

रानीः पर क्या आपको भी वैसा ही महसूस होता था जैसा मैं हमेशा महसूस करती थी—मैं नहीं जानती थी कि मैं कौन-सा रास्ता चुनूं. लेकिन इतना जरूर पता था कि मैं कामयाब होना चाहती हूं.

अनुष्काः और मैं यह बात किसी को समझा नहीं सकती थी लेकिन मुझे पता था कि मुझे लाइफ में कुछ बनना है.

रानीः हां, आप एकदम ठीक-ठीक नहीं बता सकते कि आप क्या बनना चाहते हैं...

अनुष्काः वह एक इंस्टिंक्ट होता है ना, तो मुझे लगता था कि मैं बहुत कामयाब शख्सियत बनूंगी. लेकिन क्या, यह पता नहीं था. एक बार आदि ने मुझसे अजीब सवाल पूछा था, ''क्या आप पढ़ाई में बहुत अच्छी थीं?''

रानीः (हंसती हैं)

अनुष्काः इसलिए आदि जब सवाल पूछते हैं तो मुझे आश्चर्य नहीं होता क्योंकि वे कुछ भी पूछ सकते हैं. मैंने कहा, ''हां. मैं पहली या दूसरी पोजिशन पर आती थी.'' तब उन्होंने कहा, ''अच्छा...तभी तो तुम इतनी अच्छी हो.'' मैं सोचने लगी कि वे क्या कह रहे हैं!

रानीः कि इसका क्या मतलब है.

अनुष्काः आज मैं समझ सकती हूं कि उनका क्या मतलब था. मैं समझती हूं कि मैं हमेशा से कामयाबी पाने वाली लड़की थी. स्कूल में किसी खेल में हिस्सा लेती तो उसमें भी खासा अच्छा परफॉर्म करती.

रानीः हम अपने स्कूल में केवल थ्रोबॉल खेलते थे.

अनुष्काः मैं कोलाज बनाने के कंपीटिशन में भी हिस्सा लेती तो सबसे आगे रहना चाहती थी. तो मुझे लगता है कि कोई ऐसी चीज थी, जो मुझे ड्राइव कर रही थी. मेरी मां भी मुझे बहुत प्रोत्साहित करती रहती थीं. मुझे लगता है कि मेरी मां ने ही पहली बार मेरी फोटो लोगों के पास भेजी थी.

रानीः मेरी मां और आपकी मां को एक-दूसरे से मिलना चाहिए.

अनुष्काः लंबे वक्त तक मुझे यही नहीं एहसास हुआ कि मैं फिल्मों में कैसे आ गई. किसने मेरे दिमाग में इसका बीज बो दिया? क्योंकि मैंने सोचा था कि मैं मॉडल बनूंगी. मुझे लगता है कि वह भी कहीं न कहीं मेरी मां की वजह से ही मेरे मन में आया था.

रानीः मैं आपको बड़ी मजेदार बात बताती हूं. मेरी नानी बहुत तेज-तर्रार महिला हैं. मेरी मां ने 13 साल की उम्र में मोहम्मद रफी के साथ स्टेज पर गाना शुरू कर दिया था. मेरी मां के परिवार के सभी लोग आर्ट फील्ड में रहे हैं. कोई रवींद्रनाथ टैगोर के संस्थान से जुड़ा है, मेरी सबसे छोटी मौसी कोलकाता में अभिनेत्री हैं. इसलिए जिस दिन मैं पैदा हुई, उसी दिन से मेरी नानी ने तैयारी शुरू कर दी कि वे मुझे अभिनेत्री बनाएंगी. अभिनेत्री बनने तक यह बात मैं बिल्कुल नहीं जानती थी.

वे मेरी मां से कहा करती थीं, ''कृष्णा तुम्हारी बेटी बहुत सुंदर है. हमें उसे अभिनेत्री बनाना चाहिए.'' यह बड़ी अजीब बात है कि मेरी सारी प्रेरणा हमेशा मेरी मां के घरवालों की तरफ से मिलती रही है. मैंने उस समय शुरुआत की जब चीजें बदल रही थीं, सितारे आसमान से उतर चुके थे. वे प्लास्टिक के चमकने वाले उन सितारों की तरह हो गए थे जिन्हें आप बच्चे के बेडरूम की छत में लगा देते हैं. फिल्मी सितारे अधिक सहज हो चुके थे, आप उनसे बड़े आराम से मिल सकते हैं. वे लोग आसमान से नहीं उतरे हैं, बल्कि हमारी तरह ही सामान्य लोग हैं.

अनुष्काः तो व्यायाम के लिए घर से निकलने के दौरान आप से लोग मिल सकते थे और आपकी फोटो खींच सकते थे.

रानीः यह पहले की तरह नहीं था. आज मैं सोचती हूं कि जो फैन हमें प्यार भरे पत्र लिखा करते थे, वे अब नफरत भरे पत्रों के गवाह जैसे हो गए हैं. सोशल मीडिया पर कलाकारों को गालियां दी जाती हैं. शुक्र है, मैं उनसे बची हुई हूं. शायद इस वजह से कि बहुत ही एकांत में रहने वाले शख्स से मेरी शादी हुई है.

अनुष्काः जो एक मिथ हो सकते हैं.

रानीः हां, वे एक मिथ हो सकते हैं.

अनुष्काः आपकी बेटी ही है जिसकी वजह से लोग सोचते होंगे कि आपकी जिंदगी में आदि भी हैं.

रानीः (हंसती हैं) वे मिस्टर इंडिया नहीं हैं. इसीलिए मैं जान-बूझकर सोशल मीडिया पर नहीं हूं क्योंकि जब आप सोशल मीडिया पर होते हैं तो यह चुनाव नहीं कर सकते कि आप सिर्फ अपने प्रशंसकों से ही बात करें. आपको उन लोगों को भी जवाब देना पड़ता है जो आपको फॉलो करते हैं, आपके ट्वीट पढ़ते हैं या वहां आपकी निजी बातें जानना चाहते हैं. आज मैं शादीशुदा हूं, मेरी एक बच्ची है और मैं अपने पति पर दबाव डाल कर नहीं कह सकती कि वे मीडिया से दूर न रहें और क्या मैं उनके साथ अपनी फोटो पोस्ट कर सकती हूं.

चैबीसों घंटे अपनी तस्वीरें देने में मुझे कोई दिक्कत नहीं क्योंकि मैं इस फील्ड में हूं और मुझे इसकी आदत हो गई है. लेकिन मैं अचानक इस बात की जिम्मेदारी नहीं ले सकती कि मेरे पति या मेरी बेटी की तस्वीरें प्रकाशित की जा रही हैं. मैं ऐसा नहीं कर सकती क्योंकि उसके पिता भी उसके बारे में कुछ फैसले लेते हैं. लेकिन मैं यह समझ सकती हूं कि आज कलाकारों को किस तरह दबाव झेलना पड़ता है क्योंकि लगातार उन पर नजर रखी जाती है. आज आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि कोई चप्पलें पहन कर फ्लाइट में यूं ही चढ़ जाएगा (लोग नोटिस न लेंगे). आज स्टाइलिस्ट होते हैं जो एयरपोर्ट जाते समय भी आपके पहनावे का ध्यान रखते हैं. मुझे इस पर बहुत हंसी आती है.

अनुष्काः लेकिन आप जानती हैं कि इन सबसे मुझे कितनी राहत हुई है? तब मैंने फैसला लिया कि इस पर गुस्सा जाहिर नहीं करूंगी.

रानीः क्या आपकी स्टाइलिस्ट आपको बताती है कि आप एयरपोर्ट पर कौन-सा बैग ले जाएं?

अनुष्काः नहीं, लेकिन कुछ लोग मेरा मजाक उड़ाते हैं कि मैं एक ही तरह के बैग क्यों ले जाती हूं या मैं एक ही तरह की जूतियां क्यों पहनती हूं. सच बात तो यह है कि मैं इन बातों पर ध्यान ही नहीं देती.

रानीः नहीं मैं बस समझना चाहती हूं. मुंबई में हमारे घर इतने छोटे हैं कि इतने सारे बैग-जूते रखेंगे कहां. पहन तो सकते हैं पर रखेंगे कहां?

अनुष्काः मैंने अपनी जिंदगी सादगी भरी बना ली है. मैं काले रंग के कपड़े पहनती हूं.

रानीः ब्लैक पहनती हो. (हंसती हैं)

रानीः लेकिन मैं हमेशा सोचती हूं कि आखिर क्या तुक है? एयरपोर्ट सेक्युरिटी पर बेल्ट, बूट उतारना पड़ता है न.

अनुष्काः मैं अफसरों से इतना डरती हूं कि वह सब नहीं कर सकती.

रानीः मैंने कुछ कलाकारों के बारे में सुना है जो सोशल मीडिया के कारण डिप्रेशन में चले गए. क्योंकि उनके बारे में जो कुछ लिखा जाता है, उसे वे बहुत गंभीरता से लेते हैं और उन्हें सच मानने लगते हैं.

अनुष्काः मुमकिन है. मैंने अपने बारे में नकारात्मक बातें पढऩी शुरू कीं तो मुझे भी समझने में वक्त लगा कि उसका क्या मतलब है.

रानीः पर मेरे समय में कितना अच्छा था कि कोई मुझे गालियां देने के लिए पोस्टल स्टांप खरीदने पर पैसा बर्बाद नहीं करता था न?

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