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मेरा शरीर विराट कोहली की तरह नहीं है

भारतीय क्रिकेट के सबसे कामयाब कप्तानों में से एक सौरव गांगुली और नए उभरते सितारे रविचंद्रन अश्विन बातचीत में बता रहे हैं कि इस खेल के शिखर पर पहुंचने के लिए क्या करना होता है. अश्विन याद करते हैं कि कैसे उन्होंने बतौर बल्लेबाज शुरुआत की थी, फिर मध्यम गति के गेंदबाज बने और आखिरकार ऑफ स्पिन पर आ गए, जिसमें वे बेहद कामयाब हो रहे हैं. वे गांगुली को यह भी याद दिलाते हैं कि किस तरह उन्हें खेलते देख वे बड़े हुए 

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टीम इंडिया टुडेनई दिल्ली, 20 December 2017
मेरा शरीर विराट कोहली की तरह नहीं है बराबरी की पिच पर अश्विन और सौरव

भारतीय क्रिकेट के सबसे कामयाब कप्तानों में से एक सौरव गांगुली और नए उभरते सितारे रविचंद्रन अश्विन बातचीत में बता रहे हैं कि इस खेल के शिखर पर पहुंचने के लिए क्या करना होता है. अश्विन याद करते हैं कि कैसे उन्होंने बतौर बल्लेबाज शुरुआत की थी, फिर मध्यम गति के गेंदबाज बने और आखिरकार ऑफ स्पिन पर आ गए, जिसमें वे बेहद कामयाब हो रहे हैं. वे गांगुली को यह भी याद दिलाते हैं कि किस तरह उन्हें खेलते देख वे बड़े हुए 

सौरव गांगुलीः आपको अपने रिकॉर्ड देखने का मौका मिला?

रविचंद्रन अश्विनः हां, मैंने देखा है और मुझे पता है कि आप भी रिकॉड्र्स पर नजर रखते हैं. एक वक्त मैं उन बच्चों में था जो आपको खेलते देखा करते थे और भारतीय क्रिकेट टीम के खेलने के तरीके से प्रेरित होते थे. अब आपके साथ एक मंच पर होना रोमांचकारी है.

सौरवः आप क्या पसंद करते हैं, बल्लेबाजी या गेंदबाजी?

अश्विनः निजी तौर पर गेंदबाजी. पर बल्लेबाजी भी मुझे पसंद है. शुरुआत में मैं सलामी बल्लेबाज था. अॉफ -स्पिन गेंदबाज मैं बाद में बना, वह भी मीडियम फास्ट बॉलिंग करने के बाद.

सौरवः आपकी लंबाई तेज गेंदबाज होने के लिए मुफीद है पर आप स्पिनर बन गए. मैंने भी थोड़ी-बहुत मीडियम पेस बॉल‌िंग की है और मुझे जब एक विकेट मिल जाता था तो टेस्ट में हाफ सेंचुरी बनाने जितनी खुशी होती थी. मेरी बल्लेबाजी अच्छी थी, गेंदबाजी नहीं. लेकिन आप दोनों में अच्छे हैं. मैंने आपका खेल देखा है, खासकर बैटिंग. आपने कुछ अच्छी पारियां खेली हैं, इंग्लैंड के खिलाफ  और न्यूजीलैंड के खिलाफ  भी. आपकी बल्लेबाजी में क्या खास बात है?

अश्विनः मैंने जब से प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलना शुरू किया, मेरी गेंदबाजी ने मेरी बल्लेबाजी की बहुत मदद की, खेल के चरणों को समझने के लिहाज से. अपने प्रथम श्रेणी के करियर में मैं जल्दी ही कप्तान बन गया और खेल के उतार-चढ़ावों को समझने लगा, जिनका मैं अपनी बल्लेबाजी में इस्तेमाल करता हूं, खासकर जब मैं मिडल अॉर्डर में आता हूं.

अश्विनः आपके शतकों से ज्यादा, आपकी कई तेजतर्रार पारियां मेरे दिमाग में हैं. क्या आप नैटवेस्ट सीरीज (2002) के बारे में बताएंगे जिसमें आपने गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दी थीं?

सौरवः असल में उस सीरीज में मैं रन नहीं बना पा रहा था. एक हाफ सेंचुरी लगाई और फिर बाहर कर दिया गया था. दरअसल जॉन राइट के साथ मेरी थोड़ी-सी कहासुनी हो गई थी और उसके अगले दिन मैं बैङ्क्षटग करने गया. हम 325 रन के लक्ष्य का पीछा कर रहे थे और मैं रक्षात्मक नहीं हो सकता था. मुझे भारतीय टीम को अच्छी शुरुआत देनी थी. सहवाग और मैं बल्लेबाजी करने गए और यह वे दिन थे जब आप गेंद को अच्छे-से मारो तो वह सीधे उड़ती हुई स्टैंड में चली जाती थी. वह शानदार लक्वहा था और मैं इसे टीवी पर देखता रहता हूं जब मैंने शर्ट उतारी थी. ऐसा भी नहीं था कि मेरा शरीर विराट कोहली की तरह है जिस पर कट्स और टैटू बने हों. यह अलग ही पीढ़ी है.

अश्विनः आप लोगों ने जो किया, वह एक किस्म का कायापलट था. हम इसे आगे ले जा रहे हैं. मुझे याद है जब आपने चैक्विपयंस ट्रॉफी (2000) में जहीर खान की गेंद पर एडम गिलक्रिस्ट का कैच पकड़ा था.

सौरवः वह आसान कैच था, मैंने उसे ऐसा दिखाया कि वह जरा मुश्किल-सा लगे.

अश्विनः बात यह नहीं कि वह कैच कितना मुश्किल था. बात उस मैसेज की है जो उसने अगली पीढ़ी को दिया. मैं पांच या छह साल की उम्र से टेस्ट क्रिकेट देख रहा हूं. मैं रेडियो पर कमेंट्री सुनता था और उन दिनों इंडिया मुश्किल से कोई मैच जीत पाता था.

सौरवः हमें अपनी पढ़ाई के बारे में कुछ बताइए.

अश्विनः मैंने स्कूल में ठीक-ठाक प्रदर्शन किया और अन्ना यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की. अपने आसपास प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों को देखना कैसा लगता था, और खासकर उस वक्त जब वे कभी-कभी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते थे?

सौरवः कुछ देर के लिए आप परेशान हो जाते हैं और फिर आपको एहसास होता है कि आखिर वे भी इनसान हैं, उनसे भी गलतियां हो सकती हैं. मैं परेशान था कि हमें नैटवेस्ट फाइनल में 325 रनों का पीछा करना था. बल्लेबाजी के लिए ग्राउंड में जाते वक्त वीरेंद्र सहवाग मेरे पीछे आ रहे थे. वे एक हिंदी गाना गुनगुना रहे थे. मैंने उनसे पूछा, यह क्या हो रहा है? उन्होंने कहा कि हम यह मैच जीतेंगे. सचिन, अजहर और राहुल के पास भी ऐसे ही अनुभव हैं.

अश्विनः इन लोगों का मार्गदर्शन करना कैसा अनुभव था? 325 रन जैसे स्कोर का पीछा करना उन दिनों बड़ी बात थी. मुझे याद है इंडियन टीम का पिछला सबसे अच्छा स्कोर ढाका (1998) में 315 रन था. उस मैच की आपकी क्या यादें हैं?

सौरवः मैच के दौरान अंधेरा हो गया. स्टेडियम की लाइटें ऐसी नहीं थीं जैसी अब होती हैं. वह मल्टीपरपज स्टेडियम था और वहां फुटबॉल भी खेला जाता था. उस मैच में बाद में पाकिस्तानी खिलाडिय़ों को पता नहीं चल पा रहा था कि गेंद कहां जा रही है. उन दिनों अगर दोनों कप्तान राजी हों तो लाइटें जला दी जाती थीं. सचिन उस मैच में भी अच्छा खेले. उन जैसे खिलाड़ी के साथ खेलने में अच्छी बात यह थी कि वे आपका सारा दबाव अपने ऊपर ले लेते हैं. मौजूदा इंडियन टीम में विराट कोहली ऐसा ही करते हैं.

सौरवः किस गेंदबाज से आप प्रेरणा लेते हैं?

अश्विनः शेन वार्न से.

सौरवः मीडिया में कहा जाता है कि अश्विन चेन्नै के सबसे विनम्र क्रिकेटर हैं. पहले के. श्रीकांत, दिनेश कार्तिक और सदगोपन रमेश थे. रविचंद्रन अश्विन चेन्नै की अलग तरह की पौध हैं. क्या यह सही है?

अश्विनः मुझे लगता है कि आप 40 फीसदी वही होते हैं जैसी आपकी परवरिश होती है, 40 फीसदी आपकी तालीम की देन होती है और 20 फीसदी इसकी कि आप इन दोनों का इस्तेमाल कैसे करते हैं. मेरी मां तमिलनाडु के एक गांव से हैं और मेरे लिए बड़ी प्रेरणा रही हैं. वे चेन्नै आईं, यहां पढ़ीं और एक कॉर्पोरेट कंपनी के साथ काम करने लगीं. आपके लिए लेफ्ट आर्म स्पिन या किसी भी किस्म की स्पिन को खेलना इतना ज्यादा आसान क्यों था?

सौरवः तेज गेंदबाजी पर मैं ज्यादा रन नहीं बना सका. मुझे लेफ्ट आर्म स्पिन का ही फायदा उठाना पड़ा. मैं आपके जितना भाग्यशाली नहीं हूं.

अश्विनः एडिलेड (2000 में पाकिस्तान के खिलाफ) में आपके बनाए 141 रन से तो ऐसा नहीं लगता. आपने वसीम अकरम को इतनी आसानी से खेला.

सौरवः मुझे टीम में अपनी जगह भी तो बनाए रखनी थी.

अश्विनः श्रीलंका में जीतना आसान नहीं होता.

सौरवः याद है, वहां हम उस वक्त गए थे जब तटस्थ अंपायर नहीं होते थे. अरविंद डीसिल्वा को आउट करना बुरे सपने की तरह होता था. उन्होंने अभय कुरुविला तक को गुस्सा दिला दिया था, जो आपकी तरह विनम्र थे, ऐसे में आप कल्पना कर सकते हैं कि डीसिल्वा को कितनी बार आउट करना पड़ता था. श्रीलंका की बात चल रही है, तो गाले (2015) में आप लोग पहला मैच हार गए थे, फिर उन्हें 2-1 से हराया. यह वापसी कैसी थी?

अश्विनः इस टीम में गजब की ईमानदारी है. जब हम गाले का मैच हार गए तो सभी बेहद दुखी थे. हम उस पर बातचीत कर रहे थे, तो मैंने कहा कि हम वैसे क्यों नहीं खेलते जैसे हम नेट्स पर खेलते हैं? चेतेश्वर पुजारा ने एक साल से एक भी टेस्ट मैच नहीं खेला था और रनों के भूखे थे. फिर उन्हें सैकड़ा लगाते हुए हम देख सकते थे.

सौरवः कोहली के अलावा आप इस टीम में सबसे कीमती शख्स हैं. इंडिया टुडे ने मुझसे पूछा कि टीम में सबसे कीमती खिलाड़ी कौन है? मैंने कहा कि मैं विराट को आधा फीसदी ज्यादा दूंगा. इंडियन क्रिकेट यहां से कहां जाएगा?

अश्विनः हम विदेशों में भी जाकर जीत सकते हैं. हम हर मामले में पूरी ताकत लगा रहे हैं. मेरे लिए पहली चीज फिटनेस थी. तेज गेंदबाजों के मामले में भी हमने उसे संभाल लिया है. अब बात तेज गेंदबाजों को अपना सामंजस्य बनाए रखने की है.

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