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मैं अभिनय का पाठ सीखना चाहता हूंः अमिताभ

एक ने '70 के दशक के गुस्से को रुपहले परदे पर पारिभाषित किया और फिर '90 के दशक में खुद को एक नए रूप में पेश किया. दूसरे को फिल्म इंडस्ट्री में बमुश्किल एक दशक ही हुए हैं, मगर उनके साथ उनकी समृद्ध विरासत है. एक के पास बोलती हुई गुस्सैल आंखें थीं जो खफा और बागी नौजवान पीढ़ी का प्रतीक थीं तो दूसरे के पास वह बेचैनी है जो नई पीढ़ी की छटपटाहट दिखाती है. कुल मिलाकर वे मुंबई फिल्म उद्योग के सबसे शानदार अभिनेताओं में से हैं. अमिताभ बच्चन और रणबीर कपूर ने सिनेमा, स्मृति और परिवार के बारे में एक दूसरे बात की

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मोहम्मद वक़ास/ मंजीत ठाकुर Ghaziabad, 20 December 2017
मैं अभिनय का पाठ सीखना चाहता हूंः अमिताभ अमिताभ बच्चन-रणबीर कपूर

एक ने '70 के दशक के गुस्से को रुपहले परदे पर पारिभाषित किया और फिर '90 के दशक में खुद को एक नए रूप में पेश किया. दूसरे को फिल्म इंडस्ट्री में बमुश्किल एक दशक ही हुए हैं, मगर उनके साथ उनकी समृद्ध विरासत है. एक के पास बोलती हुई गुस्सैल आंखें थीं जो खफा और बागी नौजवान पीढ़ी का प्रतीक थीं तो दूसरे के पास वह बेचैनी है जो नई पीढ़ी की छटपटाहट दिखाती है. कुल मिलाकर वे मुंबई फिल्म उद्योग के सबसे शानदार अभिनेताओं में से हैं. अमिताभ बच्चन और रणबीर कपूर ने सिनेमा, स्मृति और परिवार के बारे में एक दूसरे बात की

रणबीरः मैं आपकी आंखों की ओर नहीं देखूंगा, क्योंकि मुझे डर लगता है. मैं आपके काम का जबरदस्त फैन हूं. मैंने बचपन से आपको अपने आसपास देखा. मुझे अजूबा के सेट की याद है—आपकी मौजूदगी, आपका आकर्षण मेरे साथ चिपक गया. एक और बात, अमित अंकल, पिछले बीस साल में ऐसा नहीं हुआ कि आपने मेरे जन्मदिन पर मुझे बधाई न दी हो. और जब मैं न्यूयॉर्क में पढ़ाई कर रहा था और पहले सेमेस्टर में था, जब मैं घर लौटा तो ऑन्सरिंग मशीन में एक संदेश थाः ''हाय रणबीर, मैं अमिताभ बच्चन बोल रहा हूं, आपको जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं.'' पूरे सेमेस्टर के दौरान मैंने हर किसी को वह फोन कॉल सुनाई. यह मेरा तुरूप का पत्ता था. बहुत-सी महिलाएं इससे मेरे प्रति आकर्षित हुईं. मगर आपसे जुड़ी मेरी सबसे अच्छी याद उस वक्त की है, जब मैं ब्लैक में संजय लीला भंसाली का असिस्टेंट था. मैंने तो आपको अपने सामने देखकर अपनी तालीम पाई. आप बताइए कि कमर्शियल सिनेमा के बारे में आप क्या सोचते हैं? जब लोग मुझसे कहते हैं कि कोई मसाला फिल्म करो तो मैं यह बात पचा नहीं पाता हूं.

अमिताभ बच्चनः मैं नहीं समझता कि इस पर बहस की जरूरत है. हर फिल्म पैसा बनाने के लिए बनाई जाती है, फिर वह तथाकथित कला फिल्म हो या 'अलग तरह का सिनेमा'. दर्शक तय करते हैं कि यह मसाला फिल्म है या नहीं और क्या वे इसे दोबारा देखना पसंद करेंगे? इसलिए जब आप अलग तरह के सिनेमा की बात करते हैं, तो इसका श्रेय सही मायने में दर्शकों को जाना चाहिए, क्योंकि वे कुछ विश्वसनीय चीज देखना चाहते हैं.

लेकिन अगर आप यह कह रहे हैं कि आपकी तरह का सिनेमा पैसा नहीं बना रहा है, तो आप गलत हैं. आपकी कई फिल्मों ने भारी कारोबार किया. दर्शक आपको पसंद करते हैं. आपमें एक खासियत है; आपकी आंखों में गजब की हलचल होती है और आप अपने शरीर से भी ऐसा ही कुछ करते हैं. आप प्रतिभाशाली हैं और दर्शक बहुत परिपक्व हैं, इसलिए अपनी फिल्मों को लेकर परेशान न हों कि वे अच्छा नहीं कर रही हैं.

रणबीरः अमित अंकल, आप मेरी टांगखिंचाई कर रहे हैं! जब आप काम नहीं कर रहे होते, क्या तब भी आप लगातार प्रेरणादायी मुद्रा में होते हैं? आप हमेशा जागरूक होते हैं कि दुनिया, राजनीति और खेल में क्या हो रहा है या फिर ऐसे भी क्षण होते हैं, जब आप सिर्फ आराम कर रहे होते हैं?

अमिताभः यह मोबाइल फोन एक आतंक है. जैसे ही आप इसे चालू करते हैं, आप ट्विटर वगैरह में जाना चाहते हैं. आप स्क्रॉलिंग करने लगते हैं और रुकना नहीं चाहते. मैं नहीं जानता कि यह सेहत के लिए ठीक है या नहीं पर इसे रोकना कठिन है.

रणबीरः मैं सोशल मीडिया से अलग हूं. मैंने देखा है कि सोशल मीडिया के जरिए हवाई अड्डों तक में अभिनेताओं तक आसानी से पहुंचा जा सकता है...

अमिताभः हां यह एक समस्या है! हवाई अड्डा जाने से पहले मुझे सोचना होगा कि मैंने पिछली बार क्या पहना था?

रणबीरः आपको क्या लगता है कि सोशल मीडिया में न होकर मैं कुछ खो रहा हूं?

अमिताभः मैं सोचता हूं कि आपको वह करना चाहिए जो आपके लिए महत्वपूर्ण हो. मैंने ब्लॉग शुरू किया तो पहले दिन मैंने सिर्फ दो लाइन लिखीः सभी को नमस्कार. मैंने यह ब्लॉग शुरू किया है. अगले दिन मुझे काफी प्रतिक्रियाएं मिलीं और मैंने सोचा कि यह बहुत शानदार है. मैं अब 3,103 दिनों से लगातार लिख रहा हूं. यह मैं खुद करता हूं. ट्विटर और फेसबुक भी.

रणबीरः सोशल मीडिया के अलावा आप और क्या करते हैं? आपको सफर करना अच्छा लगता है?

अमिताभः मैं यह नहीं कह सकता कि मैं ऐसा चाहता हूं, लेकिन यदि कोई साथ हो, तो अच्छा लगता है. जहां तक यात्रा की बात है, तो मैं सोचता हूं कि अब मैं घर पर ही ज्यादा ठीक हूं.

रणबीरः लेकिन जब खुद को तरोताजा नहीं करेंगे, तो फिर आप कुछ नया कैसे रच सकते हैं?

अमिताभः इस बात की क्या गारंटी है कि सफर से तरोताजा हो सकते हैं?

रणबीरः मुझे याद है कि एक बार आप अभिनय से अलग हो गए थे. क्या आपने ऐसा नाकामी के कारण किया था या फिर छुट्टी ली थी?

अमिताभः यह एक गलती थी. मैं नहीं समझता कि मुझे कैमरे और स्टुडियो से अलग होना चाहिए था. मैंने सोचा था कि तीन साल बाद मैं फिर से काम करने लगूंगा, लेकिन इस पेशे में हमेशा कुछ न कुछ इंतजार करता रहता है; आपसे कुछ बेहतर, कुछ बेहतर दिखने वाला, कुछ अधिक लोकप्रिय शख्स आपकी जगह ले लेगा.

रणबीरः आपके लिए सबसे चुनौतीपूर्ण दौर कब था?

अमिताभः हर दिन चुनौतीपूर्ण होता है रणबीर. मैंने अनेक नाकामियों का सामना किया है. कभी आप खुद से सवाल पूछते हैं कि आप सर्वश्रेष्ठ क्या कर सकते हैं और आप क्या चीज वापस हासिल कर सकते हैं. थोड़ा काम कीजिए, तालमेल बिठाइए. मैंने जो कॉर्पोरेशन शुरू किया था, उसमें मुझे बड़ी नाकामी मिली, इसने मुझे दिवालिया कर दिया. मेरे पास पैसा नहीं था, कोई फिल्म नहीं थी, कर्ज देने वाले मेरे पीछे पड़े थे, यह भयावह अनुभव था. मैंने तय किया कि मैं एक अभिनेता हूं और मैं काम मांगने यश चोपड़ा के पास गया.

रणबीरः और काम मांगते समय आपका अहम आड़े नहीं आया.

अमिताभः मैं नहीं जानता कि अहम क्या है. अगर मेरे पास काम नहीं होगा, तो मैं जाऊंगा और कहूंगा कि मेरे पास काम नहीं है. इसी तरह मुझे मोहब्बतें मिली थी. मुझे इसमें कोई शर्मिंदगी नहीं हुई.

रणबीरः ब्लैक के सेट पर हम आपका अभिनय देखकर अवाक रह गए थे. लेकिन आप भंसाली के पास गए और उनसे कहा कि ओह, मैंने अपना जबड़ा कुछ पहले भींच लिया था. आप रीटेक चाहते थे.

अमिताभः मैं अब ब्लैक देखता हूं, तो डाइनिंग रूम का दृश्य मुझे अच्छा नहीं लगता, जहां मैं चिट्ठी पढ़ रहा हूं.

रणबीरः जब आप चिट्ठी पढ़ रहे हैं और आपका गला भर आता है. मुझे यह अच्छी तरह से इसलिए याद है, क्योंकि भंसाली ने मुझे इसे एक मिसाल की तरह दिखाते हुए कहा था कि आप अपनी शारीरिक भंगिमाओं को कैसे नियंत्रित कर सकते हैं. उन्होंने बताया था कि एक अभिनेता के रूप में आपमें ऐसा करने की काबिलियत होनी चाहिए.

अमिताभः मुझे यह मेरी गलती के कारण याद है. मैं चिट्ठी निकालता हूं और चश्मा लेता हूं और पढऩा शुरू करता हूं, लेकिन मुझे यदि अल्जाइमर है, तो मैं यह कैसे जान सकता हूं कि मेरा चश्मा कहां रखा है? मुझे इसके बारे में सोचना चाहिए था. मैंने खुद का कबाड़ा कर दिया. मैं संजय को बार-बार बोलता रहा कि मैं इसे दोबारा करना चाहता हूं. लेकिन रणबीर, आप ब्लैक में संजय के सहायक थे और आपका काम था उस छोटी लड़की को यह समझाना कि उसे कैसे नेत्रहीन लड़की की भूमिका करनी है. यदि कोई उसके प्रदर्शन की तारीफ करता है, तो इसका श्रेय आपको जाता है.

रणबीरः एक मामूली-सा वाकया, मैंने सिर्फ एक शख्स के लिए बॉडी डबल की भूमिका की और वो शख्स आप हैं और इस दृश्य में मुझे फव्वारे के पास देवराज के बगल में बैठना था. मैंने ओवरकोट और टोपी पहन रखी थी, मेरा सौभाग्य था कि मैं एक दिन के लिए अमिताभ बच्चन बन गया. यह अद्भुत था. अगर मैं बंदूक की नोक पर पूछूं कि आपकी सबसे पसंदीदा फिल्म कौन सी है तो?

अमिताभः तो मैं कहूंगा कि उस बंदूक से मुझे उड़ा दो, क्योंकि सही में मैं नहीं चुन सकता. मुझे लगेगा कि मैं उन लोगों का अपमान कर रहा हूं, जिनके साथ मैंने बाकी दो सौ फिल्में की हैं. आप न्यूयॉर्क में ऐक्टिंग स्कूल गए थे. मैं यह जानना चाहूंगा कि अभिनय कैसे सिखाया जाता है. क्योंकि मुझे ऐसा मौका नहीं मिला. जब तक मैं जया से नहीं मिला था, मुझे पता नहीं था कि ऐक्टिंग स्कूल भी होते हैं.

रणबीरः ईमानदारी से कहूं तो यह बकवास है. आप नौ महीने में अभिनय का तरीका नहीं सीख सकते. वहां वे आपको सिखाते हैं कि नाटकीय दृश्यों के लिए कैसे आप सेंस मेमोरी और इमोशनल मेमोरी को रीकॉल करें. कोई भी समझदार व्यक्ति यह कर सकता है. अभिनय का मेरा पाठ मुझे आपसे ब्लैक के सेट पर मिला. मैं किसी को ऐक्टिंग स्कूल जाने की सलाह नहीं दूंगा. मैं कहूंगा कि अमिताभ बच्चन के सेट पर जाओ. आपने थियेटर नहीं किया. क्या आप फिर कभी थियेटर करना चाहेंगे?

अमिताभः मैंने शौकिया तौर पर किया है. लेकिन मैं अब स्टेज पर नहीं कर सकता. मुझे लगता है कि स्टेज पर करना काफी कठिन है. मैं अपनी लाइनें याद नहीं रख पाऊंगा. जो लोग ऐसा कर सकते हैं, मैं उनकी तारीफ करता हूं.

रणबीरः मैंने आपको चार पेज का एकालाप एक घंटे में याद करते देखा है. आप स्क्रिप्ट से बंधे होते हैं या उसमें कुछ सुधार करते हैं?

अमिताभः मैं स्क्रिप्ट पर ही आगे बढ़ता हूं. लेखक किसी फिल्म का सबसे अहम शख्स होता है. वह सिर्फ लेखक नहीं होता, बल्कि वह लिखते समय निर्देशक, सेट डिजाइनर, संगीत निर्देशक सब कुछ होता है. यह सबसे कठिन काम है. इसलिए यह कहना कि मैं वही कहूंगा जो मुझे अच्छा लगता है, उसका अपमान करना होगा.

रणबीरः और आपने कभी फिल्म निर्देशन के बारे में नहीं सोचा?

अमिताभः नहीं. मैं नहीं जानता कि यह कैसे किया जाता है.

रणबीरः लेकिन निर्देशन तो यह बताना है कि कहानी कैसे कही जाए?

अमिताभः लेंस के जरिए इसे कहना कठिन है. आप यह कैसे जानेंगे हैं कि ट्रॉली कहां रखनी है, कहां पैदल चलना है, कलाकार को यह बताना कि आप उससे क्या चाहते हैं?

रणबीरः क्या आप कोई कहानी लिखेंगे?

अमिताभः मैंने कभी कोशिश नहीं की.

रणबीरः मैंने की. मेरे मन में एक कहानी का विचार आया, मैंने कुछ लोगों के साथ इसे साझा किया, लेकिन मैंने आलस में इसे लिखा नहीं. मुझमें वह कौशल नहीं है. यह कौशल या तो पैदाइशी होता है या नहीं होता.

अमिताभः यदि आपके मन में ऐसा विचार आता है और आधी रात भी क्यों न हो रही हो, उसे बोलकर रिकॉर्ड कर लो. उसे किसी ऐसे दोस्त को दे दो, जो लेखक हो. पता नहीं, उससे ही कहीं कोई कीमती चीज निकल आए.

रणबीरः क्या आप ऊटी में अभिनेत्रियों के साथ नाच-गाना मिस करते हैं?

अमिताभः यह बड़ी मेहनत का काम है और मुझे पसंद नहीं. मैं ऐसा करता रहा, क्योंकि यह मेरे पेशे का हिस्सा है. लेकिन मेरे करियर की शुरुआत में ऐसी कई घटनाएं हुईं, जब मुझसे गाने और नाचने के लिए कहा गया और मैंने अच्छे से नहीं किया, जिसके कारण मुझे हटा दिया गया. इसलिए यह मेरे लिए एक धब्बा हो गया. आपके शरीर के अंग कैसे अलग-अलग दिशाओं में हरकत करते हैं?

रणबीरः सारा जमाना...में आपने मांसपेशियों को कैसे नचाया था?

अमिताभः मैंने कुछ नहीं किया था. मैंने सिर्फ एक गिटार लिया और काले रंग का चश्मा पहना, जिससे मैं किसी को देख न सकूं. मैं सिर्फ स्ट्रमिंग कर रहा था और सिंपल-से स्टेप कर रहा था.

रणबीरः मेरी निजी जिंदगी के बारे में काफी कुछ लिखा गया है. अधिकांश बातें नकारात्मक ढंग से कही गई हैं, मुझे बेअदब, दिलफेंक कहा गया है, मैं इनसे कैसे छुटकारा पा सकता हूं?

अमिताभः नकारात्मकता बिकाऊ है, इसलिए ऐसा होता है. मुझे आज भी नकारात्मक मीडिया का सामना करना पड़ता है.

रणबीरः आपने काफी समय तक मीडिया से बात नहीं की थी.

अमिताभः उन्हें लगता था कि इमरजेंसी के समय मीडिया पर लगे प्रतिबंध के लिए मैं जिम्मेदार था. फोटोग्राफरों ने विरोध में अपने कैमरे जमीन पर रख दिए थे. उन्होंने जब मुझे प्रतिबंधित करने का फैसला किया, तब मैंने भी कहा था कि मैं भी उनसे बात नहीं करूंगा. करीब 15 वर्षों तक मैंने उनसे बात नहीं की थी!

रणबीरः आज आपके संबंध कैसे हैं?

अमिताभः मैं उनसे प्रेम करता हूं. मैं और क्या कह सकता हूं (ठहाका)? मुझे लंदन में आपसे हुई एक मुलाकात याद आ रही है, हम लोग एक ही होटल में ठहरे हुए थे. आपके हाथ में एक किताब थी और आप इसे पढऩे के लिए पार्क जा रहे थे. आपने कहा था, "मुझे अपने लिए थोड़ा जगह चाहिए. मुंबई बहुत तंग है. मैं वहां ऐसा नहीं कर सकता."

रणबीरः मैं अपने जीवन में बदलाव के दौर से गुजर रहा था, गर्लफ्रैंड के साथ मेरा ब्रेकअप हुआ था. मैं कुछ समय बिताना चाहता था. इसीलिए मैंने आपसे अकेलेपन की बात की थी. वाकई मुझे अकेला रहना अच्छा लगता है. यह सबसे मजेदार होता है.

रणबीरः क्या आप किसी को आपकी बायोपिक बनाने देंगे?

अमिताभः नहीं. मैं सबसे नीरस आदमी हूं. न ही आत्मकथा लिखूंगा.

रणबीरः आपका ब्लॉग आपकी आत्मकथा का लघु रूप है?

अमिताभः यह व्यावसायिक जोखिम है. यदि मैं अपडेट न करूं तो हजारों लोग मेरी गर्दन पकड़ लेंगे. लेकिन आत्मकथाएं लिखना डरावना होता है.

रणबीरः मुझे आपके साथ काम करने का मौका कब मिलेगा?

अमिताभः मैं उम्मीद करता हूं कि हम साथ काम करेंगे, क्योंकि मुझे आपसे ऐक्टिंग का पाठ पढऩा है.

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